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खुद को गले लगाकर तो देखें: कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं खुद-ब-खुद हल हो जाएंगी, वर्तमान की नजर से देखना सबसे अहम
Sun, 20 Jul 2025 06:39 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
क्रिस्टीना कैरन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
क्रिस्टीना कैरन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 20 Jul 2025 06:39 AM IST
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विस्तार
टेक्सास के फोर्ट वर्थ में रहने वाली 54 वर्षीय फिटनेस कोच लॉरा वेल्स ने जब पहली बार खुद को गले लगाने की कोशिश की, तो उन्हें लगा कि यह बेवकूफी है। फिर उन्हें एहसास हुआ कि ‘इससे वाकई मदद मिलती है।’ अपने भीतर के आहत बच्चे की पुनः परवरिश उन तरीकों में से एक है, जिससे उन भावनात्मक जरूरतों को पूरा किया जाता है, जिनकी बचपन में उपेक्षा की गई थी। पुनः परवरिश का विचार दशकों से प्रचलित है, लेकिन हाल के वर्षों में यह चलन फल-फूल रहा है। पुनः परवरिश में रोगी को अपने भीतर के आहत बच्चे को खोजने और उसे प्यार का एहसास दिलाने में सक्षम बनाया जाता है, ताकि वह स्वयं के प्रति एक मजबूत भावना और दूसरों के साथ बेहतर संबंध विकसित कर सके। यह कोई आसान प्रक्रिया नहीं है।
पेशेवर परामर्शदाता और इस विषय पर एक नई पुस्तक की लेखिका निकोल जॉनसन ने कहा कि मैं हमेशा लोगों से कहती हूं कि अपने भीतर के बच्चे की पुनः परवरिश करना असुविधाजनक और अजीब होता है। पुनः परवरिश (पुनर्पालन) की शुरुआत 1960 के दशक में हुई, जब चिकित्सक जैकी शिफ ने सिजोफ्रेनिया से पीड़ित अपने मरीजों को अपने साथ रहने और फिर बचपन में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने एक देखभालकर्ता की भूमिका निभाई और अपने मरीजों को गोद में उठाया। उन्हें डायपर पहनने और बोतल से दूध पीने में भी मदद की। शुरू में उनकी अपारंपरिक पद्धति की प्रशंसा हुई, लेकिन जब उनकी देखभाल में एक मरीज की मौत हो गई, तो उन्हें नैतिकता के उल्लंघन का दोषी पाया गया और उनकी पद्धति की व्यापक रूप से आलोचना की गई।
1970 के दशक में, मनोचिकित्सक म्यूरियल जेम्स ने पुनर्पालन की नई अवधारणा प्रस्तुत की। उनका मानना था कि यह एक स्व-निर्देशित प्रयास होना चाहिए, जहां चिकित्सक नहीं, बल्कि रोगी अपने भीतर के बच्चे के लिए एक प्रेमपूर्ण अभिभावक की भूमिका निभाए। पुनर्पालन का यही वह रूप है, जो आज सबसे अधिक स्वीकृत और प्रचलित है। कुछ पुनर्पालन रणनीतियों को स्वतंत्र रूप से निपटाया जा सकता है, लेकिन डॉ. बेट ने कहा कि किसी चिकित्सक से मदद लेना सबसे अच्छा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पुनर्पालन एक तकनीक है, न कि चिकित्सा। वेल्स के लिए अपने भीतर के बच्चे की पुनः परवरिश मददगार साबित हुई है।