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भारत-कनाडा तनाव: जस्टिन हैं कि मानते ही नहीं, वोट बैंक की राजनीति से ग्रस्त हैं जूनियर ट्रूडो

Wed, 16 Oct 2024 07:12 AM IST
Deepak Vohra दीपक वोहरा
Updated Wed, 16 Oct 2024 07:12 AM IST
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सार
ट्रूडो हर मंच पर चिल्लाते हैं कि उनका मुल्क कानून के राज पर विश्वास करता है, लेकिन उन्होंने अपने मुल्क को अपराधियों के हाथों में सौंप दिया है। कनाडा ने भारत पर जो बेतुके आरोप लगाए हैं, उन्हें उचित ही हमने दृढ़ता से खारिज किया है, क्योंकि ट्रूडो सरकार वोट बैंक की राजनीति के तहत झूठे आरोप लगा रही है।
 
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Trudeau government making false allegations against India as part of vote bank politics
कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो - फोटो : एएनआई

विस्तार

पैरों और मुंह का रोग एक संक्रामक वायरल संक्रमण है, जो छोटे पशुओं में आम है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को अपना पैर मुंह में रखने की बीमारी है और हम देखते हैं कि वह जब भी अपना मुंह खोलते हैं, उनका पैर बाहर निकल आता है।



हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कनाडाई विदूषक के साथ पूर्वी एशियाई देशों के सम्मेलन में वियनतियाने में संक्षिप्त मुलाकात की थी। ट्रूडो हर मंच पर चिल्लाते हैं कि उनका मुल्क कानून के राज पर विश्वास करता है, लेकिन उन्होंने अपने मुल्क को अपराधियों के हाथों में सौंप दिया है। पिछले एक साल से वह निज्जर  की हत्या के मामले के बारे में सभी को विभिन्न जानकारी दे रहे हैं, जिसमें वेटर, कैब ड्राइवर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा गार्ड भी शामिल हैं।


बीते सितंबर में उन्हें तब एक बड़ा झटका लगा, जब न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह ने यह कहते हुए अपना समर्थन वापस ले लिया कि वह 2022 में जस्टिन ट्रूडो के साथ किया गया करार तोड़ रहे हैं, क्योंकि ट्रूडो कमजोर, स्वार्थी और भ्रष्ट नेता हैं। ट्रूडो की सभी हरकतें (हर छोटे गुरुद्वारे के कार्यक्रम में भाग लेना और सरोपा प्राप्त करना) विफल हो गई हैं। लेकिन क्यों?

मध्य अक्तूबर में भारत ने कहा कि कनाडा ने हरदीप सिंह निज्जर की पिछले वर्ष हुई हत्या मामले में अब तक एक भी सुबूत नहीं दिया है, जिसके बारे में वह भारत सरकार पर आरोप लगाते हैं।

ट्रूडो ने जगमीत सिंह की पार्टी से वादा किया था कि कनाडा निज्जर के हत्यारों का पता लगाएगा, लेकिन ऐसा करने में वह विफल रहे। अपनी विफलता को छिपाने के लिए ट्रूडो सरकार ने एक संदेश भेजा, जिसमें कहा गया कि भारतीय उच्चायुक्त और अन्य राजनयिक इस मामले में संदेह के घेरे में हैं, जिसका अर्थ है कि उनसे पूछताछ की जा सकती है। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि ट्रूडो एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनमें किसी को दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए।

जाहिर है, ओटावा (कनाडा की राजधानी) ने अमेरिकी डीप स्टेट के अपने आका की अनुमति के बिना ऐसा नहीं किया होगा, जिसने एक अन्य अमेरिकी-कनाडाई नागरिक और घोषित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू को सितंबर, 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी जिला न्यायालय में एक याचिका दायर करने के लिए उकसाया था, जिसमें उसे खत्म करने के कथित प्रयास के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित भारत सरकार को सम्मन जारी करने की मांग की गई थी। हमने इसका मजाक उड़ाया। ताजा मामले में, हमने ओटावा के बेतुके आरोपों को दृढ़ता से खारिज कर दिया है और ट्रूडो सरकार के राजनीतिक एजेंडे को जिम्मेदार ठहराया है, जो वोट बैंक की राजनीति पर केंद्रित है।

यदि कनाडा में आज चुनाव होते हैं, तो ट्रूडो की पार्टी संसद में एक भी सीट नहीं जीत पाएगी। हमने भारत के सबसे वरिष्ठ सेवारत राजनयिक के खिलाफ आरोपों को अवमानना के साथ खारिज कर दिया। हमें लगता कि त्रूदो सनकी हैं।

लेकिन इससे पहले कि ट्रूडो कुछ और बेतुका काम कर पाते, हमने घोषणा कर दी कि हम अपने उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों को कनाडा से वापस बुला रहे हैं, क्योंकि हमें उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की कनाडाई सरकार की प्रतिबद्धता पर भरोसा नहीं रहा। ट्रूडो की सरकार ने भारत सरकार के कथित ‘हिंसा अभियान’ का हिस्सा होने का आरोप लगाकर छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। बदले में हमने भी कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त और उनके डिप्टी सहित छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है।

मैं 51 वर्षों से कूटनीति में हूं और यह मंत्रालय द्वारा किसी भी आरोप का सबसे तीखा खंडन है। कुछ महीने पहले ट्रूडो ने अपनी संसद को अपने प्रिय सिख प्लंबर निज्जर की याद में एक मिनट का मौन रखने के लिए कहा था, जिसे उनकी अपनी सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था और ठंडे बस्ते में डाल दिया।

दिलचस्प बात यह है कि इस साल जून में कनाडाई पुलिस ने दावा किया था कि 1985 के एयर इंडिया कनिष्क विमान बम विस्फोट, जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए थे, की 34 साल पुरानी जांच अब भी जारी है। ये लोग इतने अक्षम हैं कि जांच कम से कम 2085 तक जारी रहेगी।

ट्रूडो ने अब भारत की जेल में बंद एक भारतीय गैंगस्टर पर अपने प्रिय आतंकवादी को खत्म करवाने का आरोप लगाया है। अब उन्हें कौन समझाए कि यह सब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का किया-धरा है, क्योंकि ऐसी ‘विश्वसनीय रिपोर्टें’ हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने भारत के साथ कनाडा के संबंधों को खराब करने के लिए उनके प्रिय आतंकवादी को खत्म करवा दिया है।

इससे पहले भी कनाडा में पाकिस्तानियों द्वारा हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया गया है। वर्ष 2020 में कनाडा में एक बलूच महिला कार्यकर्ता करीमा बलूच की हत्या कर दी गई थी, और उनकी मौत डूबने से हुई बताई गई थी। उसी वर्ष एक बलूच पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता स्वीडन में डूब गया। उनके हत्यारों को पकड़ा नहीं जा सका, जबकि उनके बारे में विश्वसनीय आरोप हैं कि वे पाकिस्तानी थे, और फाइलें जल्दबाजी में बंद कर दी गईं।

वाशिंगटन पोस्ट ने गुरुद्वारे के सुरक्षा कैमरों के आधार पर एक कहानी प्रकाशित की है, जिसके बाहर निज्जर को गोली मारी गई थी, जिसमें गवाहों ने आरोप लगाया है कि कनाडाई पुलिस ने प्लंबर की मौत की एक औपचारिक जांच की, कि यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसमें दो कारों में कम से कम छह लोग शामिल थे। साल भर के भीतर ही पाकिस्तानियों ने भारत-कनाडा संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया, जिसे फिर से बनाने में कई साल लगेंगे। कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदायों को सावधान रहना चाहिए।
                                  

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