फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Time Machine: Listen heartbeat of present from the past every fortnight Hitler's secret

टाइम मशीन: हिटलर का वह रहस्य, अतीत से सुनें वर्तमान की धड़कन हर पखवाड़े

Sun, 14 Apr 2024 05:21 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 14 Apr 2024 05:21 AM IST
विज्ञापन
सार
अमेरिका और रूस के बीच टकराव तेजी से बढ़ रहा है। चुनाव की तरफ बढ़ रहे राष्ट्रपति जो बाइडन का दफ्तर इस खबर से सकते में है कि रूस एग्जॉटिक न्यूक्लियर हथियार बना रहा है, जो अंतरिक्ष में उपग्रहों को तबाह कर देगा।
loader
Time Machine: Listen heartbeat of present from the past every fortnight Hitler's secret
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई/रॉयटर्स

विस्तार

रूस के जासूस पूरी दुनिया में कुख्यात रहे हैं। अमेरिका के मैनहट्टन प्रोजेक्ट में इन्हीं रूसी जासूसों की मौजूदगी पर नई चर्चाएं हैं। मगर इससे ज्यादा सनसनीखेज किस्सा है, हिटलर के न्यूक्लियर बम का। कहते हैं कि इस बम की तैयारी से अमेरिका के मैनहट्टन प्रोजेक्ट को बड़ी मदद मिली थी।



22 फरवरी, 2023 को यूक्रेन पर रूस के हमले की पहली बरसी थी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान किया कि रूस अमेरिका के साथ स्टार्ट संधि में भागीदारी को निलंबित कर रहा है। जनसंहारक हथियारों की होड़ रोकने को लेकर अमेरिका और रूस के बीच संधियों में यह आखिरी सक्रिय संधि थी, पुतिन ने जिसे लागू करने से मना कर दिया।


इसके ठीक पांच माह बाद अमेरिका ने अपनी अगली पीढ़ी के मिसाइल कार्यक्रम को रफ्तार दी और इसी जनवरी में अत्याधुनिक सेंटिनल मिसाइल के लिए मोटर का परीक्षण सफल हो गया।

चुनाव की तरफ बढ़ रहे राष्ट्रपति जो बाइडन का दफ्तर इस खबर से सकते में है कि रूस एग्जॉटिक न्यूक्लियर हथियार बना रहा है, जो अंतरिक्ष में उपग्रहों को तबाह कर देगा।

1960 और 1980 के दशक में अमेरिका की राजनीति को चलाने वाले सोवियत हॉक्स यानी रूस से आर-पार करने वाले नेताओं की नई पीढ़ी बाइडन को घेर रही है। संयोग ही है कि विनाशक हथियारों की नई होड़ की खबरें उस वक्त आईं, जब क्रिस्टोफर नोलन की ऑस्कर विजेता भव्य फिल्म ओपनहाइमर के जरिये नई पीढ़ी नाभिकीय हथियारों की सियासत और बहस से नया राब्ता कायम कर रही है।

अमेरिका के मैनहट्टन प्रोजेक्ट में रूस के जासूसों की मौजूदगी पर नई चर्चाएं हैं। मगर इससे ज्यादा सनसनीखेज किस्सा है, हिटलर के न्यूक्लियर बम का। कहते हैं कि इस बम की तैयारी से अमेरिका के मैनहट्टन प्रोजेक्ट को बड़ी मदद मिली थी।

तो संभालिए अपनी सीट टाइम मशीन में, वक्त है बीसवीं सदी का। दूसरे विश्वयुद्ध की मार-काट मची है। आइए चलते हैं, जर्मनी के ऐतिहासिक शहर लिपजिग। बमों की बात शुरू करें, उससे पहले आप लिपजिग में संगीत सुन लीजिए। महान संगीतकार रिचर्ड वैगनर, जोहान सेबेस्टियन बाख, मेंडेलसोहन बार्थोल्डी, शुमान और महलर की अमर धुनें इस शहर की पहचान हैं।

लिपजिग से बर्लिन, जर्मन इतिहास के गढ़ हैम्बर्ग से होते हुए हम कुमेसडर्फ आ गए हैं। बर्लिन के करीब इस कस्बे में नात्जी सेना का एक हथियार डिपो है, जिसमें नात्जी एटम बम की तैयारी चल रही है।

अब आप 1939 के बर्लिन में हैं। नीचे वह बड़ी इमारत है, बर्लिन का कैसर विल्हेम इंस्टीट्यूट ऑफ केमिस्ट्री। यहां जर्मन वैज्ञानिक ऑटो हान और फ्रिट्ज स्ट्रैसमैन यूरेनियम के एटॉमिक न्यूक्लियस पर न्यूट्रॉन बरसा रहे हैं। उन्हें पता चला कि यूआई 235 यानी यूरेनियम का न्यूक्लियस फटता है, तो जबर्दस्त ऊर्जा निकलती है। इन वैज्ञानिकों को न्यूक्लियर फिजन यानी बम का फॉर्मूला मिल गया है।

गौर से देखिए, क्या आप पहचान पा रहे हैं इस शख्सियत को? ये हैं दुनिया के प्रख्यात भौतिकविद वर्नर हाइजेनबर्ग। वही क्वांटम मैकेनिक्स में अनसर्टेनिटी सिद्धांत वाले वर्नर हाइजेनबर्ग, जिन्हें 1932 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

हाइजेनबर्ग कैसर विल्हेम इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के प्रमुख हैं और न्यूक्लियर फिजन की तकनीक को प्रयोग में लाने का प्रोजेक्ट शुरू कर चुके हैं। प्रोजेक्ट का नाम है यूरेनियम क्लब। लिपजिग की टेक्सटाइल केमिकल रिसर्च में यूरेनियम अयस्क से यूरेनियम निकाला गया।

ओरियनबर्ग में हैवी वाटर पर शोध हुआ। कुमेसडर्फ गोटो में यूरेनियम इनरिचमेंट की कोशिश हुई। सही समझे आप, हाइजेनबर्ग की टीम हथियार स्तर के यूरेनियम को तैयार करने की कोशिश कर रही है। उनके पास बम बनाने के साधन नहीं हैं, मगर शोध काफी आगे तक हो गया था।

नात्जी एटम बम पर लिखने वाले कहते हैं कि हाइजेनबर्ग इस परियोजना को गुप्त रूप से चला रहे थे। यूरेनियम क्लब को हिटलर का समर्थन नहीं था। इसी बीच टाइम मशीन में आपको खबर मिलने लगी है कि हिटलर की हार शुरू हो गई है। यूरोप में हिटलर के खिलाफ मित्र सेनाओं की अगुआई करते हुए अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों को हाइजेनबर्ग के यूरेनियम क्लब का पता चल गया है।

अब शुरू होता है, रोमांच का सफर।

हिटलर से जंग के बीच अमेरिका ने एल्सॉस मिशन बनाकर अपने सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों को नात्जी एटम बम की जासूसी पर लगा दिया। अमेरिकी सेना में काउंटर इंटेलिजेंस के मुखिया कर्नल बोरिस पाश इस मिशन के मुखिया बनाए गए।

अब हम दक्षिण-पश्चिम जर्मनी के कस्बे हाइगरलोश में हैं। हिटलर की हार तय देखकर वैज्ञानिक हाइजेनबर्ग अपनी गोपनीय नाभिकीय प्रयोगशाला को यहां ले आए हैं। वे न्यूक्लियर रिएक्शन का अपना आठवां प्रयोग करना चाहते थे।

यह क्या...अमेरिकी कर्नल बोरिस पाश ने प्रयोगशाला पर छापा मार दिया है। जर्मन न्यूक्लियर रिएक्टर का शुरुआती मॉडल अमेरिका के हाथ लग गया। वैज्ञानिक हाइजेनबर्ग गिरफ्तार हो गए हैं।

अमेरिका का एटम बम तब तक लगभग बन गया था। अलबत्ता एल्सॉस मिशन से मिली सूचनाओं ने युद्ध के बाद अमेरिका के मैनहट्टन प्रोजेक्ट और बाद के नाभिकीय प्रयोगों को समृद्ध किया। हाइजेनबर्ग को जनवरी, 1946 में ब्रिटिश अधिकारियों ने रिहा कर दिया।

टाइम मशीन के सफर का एक और रोमांचक पड़ाव अभी बाकी है। इसके लिए हम चलते हैं 2013 में। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद वैज्ञानिक समुदाय हाइजेनबर्ग के प्रयोग में इस्तेमाल हुए यूरेनियम की तलाश में था। बताते हैं कि वर्नर हाइजेनबर्ग यूरेनियम ने 664 क्यूब्स का इस्तेमाल किया था। इनमें एक क्यूब 2013 में यूनिवर्सिटी मैरीलैंड के वैज्ञानिक टिमोथी कोएथ के पास पहुंचा। कॉसमॉस मैगजीन में प्रकाशित एक लेख में बताया गया कि कोएथ को एक पैकेट मिला, जिस पर लिखा था, “Taken from the reactor that Hitler tried to build. Gift of Ninninger.”

कोएथ को पता चला कि रॉबर्ट जे निनजिंगर को 1945 में मैनहट्टन प्रोजेक्ट के मरे हिल एरिया का प्रॉपर्टी मैनेजर बनाया गया था। क्या इन्हीं निनजिंगर ने पैकेट भेजा था? यह रहस्य आज तक नहीं खुला। हमारी टाइम मशीन अब वाशिंगटन की तरफ बढ़ रही है। आपकी सीट के सामने की स्क्रीन पर दिसंबर, 2022 की एक सुर्खी तैर रही है। जो बाइडन की सरकार ने रॉबर्ट जो ओपनहाइमर पर चल रही जांच को वापस ले लिया। जासूसी के शक में एटॉमिक एनर्जी कमीशन 1954 से उनकी जांच कर रहा था। 1967 में ओपनहाइमर नहीं रहे। मगर शक की जांच जारी थी। खुफिया दस्तावेजों ने यह तो सिद्ध किया कि अमेरिकी एटम बम के रहस्य रूस को पहुंचाए गए थे। मगर ओपनहाइमर जासूस नहीं थे, जासूसी तो ओपनहाइमर के सहयोगी वैज्ञानिक कार्ल फुक्स ने की थी। कहते हैं, इन्हीं सूचनाओं की मदद से सोवियत रूस ने 29 अगस्त, 1949 के कजाकिस्तान के सेमपलाटिंस्क न्यूक्लियर हथियार का परीक्षण किया था।

इसके बाद शुरू हुई न्यूक्लियर हथियारों की होड़।

आज का सफर यहीं तक, फिर मिलते हैं जल्द...

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed