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सबसे बड़ा रहस्य तो समय ही है: मानवता की सीमा निर्धारित करने के लिए अंतरिक्ष में दौड़, कैलेंडर का आविष्कार...

Sun, 18 May 2025 05:45 AM IST
ज्योति भास्कर एलिजाबेथ डायस, द न्यूयॉर्क टाइम्स
एलिजाबेथ डायस, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 18 May 2025 05:45 AM IST
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सार
समय एक विरोधाभासी रहस्य है। वर्तमान क्षण एक ही समय में असीम रूप से छोटा और लंबा, दोनों हो सकता है। मानवता की सीमा निर्धारित करने के लिए हम अंतरिक्ष में दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन मुमकिन है कि वह सीमा यहीं हो, हमारे बिल्कुल नजदीक। कहीं सभी रहस्य इस वर्तमान क्षण में ही तो नहीं छिपे हुए हैं? मनुष्य ने समय के रहस्य को विभिन्न संस्कृतियों और सदियों में सुलझाने की कोशिश की है। कैलेंडर का आविष्कार समय के रहस्य को खोजने की कोशिश ही तो थी। लेकिन कैलेंडर की सीमा इसे बनाने वालों की समझ से परे नहीं हो सकती, जबकि समय को समझने के लिए समय से परे भी जाना पड़ सकता है।
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time is biggest mystery race into space to determine limits of humanity calendar invention also mystry probe
एआई आधारित घड़ी - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

कुछ साल पहले मैंने सुना था कि एलेक्जेंडर रोज नामक एक शख्स पश्चिमी टेक्सास के एक पहाड़ पर एक विशाल पेंडुलम वाली घड़ी बनाने की परियोजना पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह घड़ी दस हजार साल तक चलेगी। सैकड़ों फुट ऊंची यह घड़ी दिन और रात के तापमान के अंतर से संचालित होगी और सूर्य की दिशा के आधार पर काम करेगी। जो फाउंडेशन इस परियोजना को संचालित कर रहा है, रोज उसके एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वह बताते हैं कि उनका उद्देश्य है कि जब लोग अपनी व्यस्ततम जिंदगियों से इस घड़ी को देखें, तो समझें कि समय प्रकृति की कितनी अद्भुत ताकत है। यह एक रहस्य भी है, जिसे पूरी तरह से जानना अभी बाकी है।



मनुष्य ने समय के रहस्य को विभिन्न संस्कृतियों और सदियों में सुलझाने की कोशिश की है। समय को समझने में अक्सर अनुष्ठानों को हमारा मार्गदर्शक समझा जाता है। जनवरी का महीना रोमन देवता जेनस से जुड़ा है, जो द्वारों और शुरुआतों का देवता है। प्राचीन बेबीलोन के लोगों ने राजाओं के राजवंशों की तिथि के आधार पर शुक्र ग्रह की दिशा निर्धारित की थी। यूनानियों के पास समय के देवता क्रोनोस थे। हिंदू धर्म के कुछ ग्रंथों में समय का संबंध मां काली से है, जो काल की देवी भी मानी जाती हैं।


अगर आप समझते हैं कि कैलेंडर से समय का रहस्य जान सकते हैं, तो यह अज्ञानता ही है। कैलेंडर लचीले होते हैं, और उनका आकार उन्हें बनाने वालों द्वारा या उनके लिए निर्धारित होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर एक सौर कैलेंडर है, जिसका उपयोग दुनिया के अधिकांश देशों में समय की गणना के लिए किया जाता है। यह दरअसल, 1582 में पोप ग्रेगरी तेरहवें द्वारा निर्मित जूलियन कैलेंडर का ही एक संशोधित रूप है। यहूदियों का नया साल रोश हशनाह कहलाता है, जो दो-दिवसीय त्योहार है। यह यहूदी कैलेंडर के अनुसार तिशरी महीने के पहले और दूसरे दिन मनाया जाता है, जो अमूमन सितंबर या अक्तूबर में पड़ता है। रोश हशनाह, उस समय को दर्शाता है, जब परंपरा के अनुसार ईश्वर ने दुनिया का निर्माण किया था। इसी तरह, लूनर नया साल, जिसे चंद्र नव वर्ष भी कहा जाता है, एक चंद्र-सौर कैलेंडर वर्ष के पहले महीने का उत्सव है, जो पूर्वी एशियाई देशों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। यह वसंत महोत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

हालांकि, इन सभी संस्कृतियों से परे जो समय का रहस्य जानना चाहते हैं, उनके लिए अमेरिका के प्रख्यात कवि जॉय हार्जो का यह कथन महत्वपूर्ण है, ‘नया साल हर पल संभव है, क्योंकि हर क्षण अज्ञात की ओर खुलने वाला एक नया द्वार है।’ अगर इसे संगीत में देखें, तो संगीत में समय लयबद्ध चक्रों से पैदा होता है। एक सांस तीन या दस सेकेंड की भी हो सकती है, एक नाड़ी उससे एक-तिहाई, बोले गए शब्द, भावनाओं की हार्मोनल सक्रियता और अल्पकालिक व दीर्घकालिक स्मृति, ये सभी मिलकर भी एक समय चक्र की रचना करते हैं। जब हम संगीत का अनुभव ले रहे होते हैं, तो भी हम पूरे धैर्य के साथ समय के बदलाव की राह पर ही चल रहे होते हैं। कभी-कभी आप इसमें खो भी जाते हैं, तब आपको समझ नहीं आता कि आप कहां हैं, लेकिन आप हरदम समय के भीतर ही होते हैं।

क्वांटम भौतिकी में समय की अवधारणा अपने आप में बहुत जटिल है, ऐसा कहना है जून ये का, जो एक भौतिक विज्ञानी हैं और जिन्होंने दुनिया की सबसे सटीक परमाणु घड़ी बनाई है। यह राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान और कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय की एक परियोजना है। घड़ी भौतिक रूप से मापती है कि समय कितना सापेक्ष है और दिखाती है कि जब परमाणुओं को सूक्ष्म दूरी पर ले जाया जाता है, तो समय कैसे बदलता है। यह एक निर्वात कक्ष में एक एकल परमाणु को पकड़ता है, और परमाणु के नाभिक के चारों ओर घूमने वाले इलेक्ट्रॉन एक तरह के पेंडुलम के रूप में ऐसी गति से कार्य करते हैं, जिसे समझना असंभव है-एक सेकंड के एक अरबवें हिस्से का दस लाखवां हिस्सा, जिसे फेम्टोसेकंड कहा जाता है। यह घड़ी इतनी सटीक है कि 15 अरब वर्षों में एक सेकंड भी नहीं खोएगी। डॉ. ये कहते हैं, ‘बिग बैंग से पहले भौतिकी के नियमों के स्वरूप को जाने बिना, हमारी दुनिया की उत्पत्ति से पहले के समय का वर्णन करने का कोई तरीका नहीं है। यदि आप ब्रह्मांड के संपूर्ण विकास के बारे में सोचते हैं, तो समय की अवधारणा थोड़ी उलझन भरी है।’ येल विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान की प्रोफेसर प्रियंवदा नटराजन ने कहा कि समय और स्थान हमारी दुनिया को बनाने के लिए एक-दूसरे के साथ मिश्रित होते हैं, और ये हमें एक ही समय में महत्वपूर्ण और महत्वहीन, दोनों महसूस करा सकते हैं। वर्जीनिया के हॉरोलॉजिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जोसेफ जब्बोर कहते हैं, समय-पालन की प्रक्रिया में बदलाव हो रहा है। लोग अब अपने स्मार्टफोन देखकर अपने जीवन को व्यवस्थित करते हैं, और घड़ी एवं घड़ी की मरम्मत की कला लुप्त होती जा रही है। उन्होंने 125 डॉलर में एक लंबा केस क्लॉक खरीदा था, जिसकी कीमत मूल रूप से कुछ हजार डॉलर होती। उन्होंने कहा, ‘आजकल दुनिया को चलाने के लिए आपको समय की प्रकृति को समझना होगा।’ हर नए साल में-रात में, जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक और परिक्रमा शुरू करेगी, अज्ञात भविष्य की ओर लगभग 67,000 मील प्रति घंटे की गति से दौड़ेगी, जो दर्शाता है कि समय कितना अनिश्चित है और उससे जुड़ी हमारी जिंदगियां भी।

दरअसल, समय एक विरोधाभासी रहस्य है। वर्तमान क्षण एक ही समय में असीम रूप से छोटा और अनंत लंबाई वाला दोनों है। इस रहस्य को सुलझाने के लिए डच दार्शनिक बर्नाडो कास्ट्रुप तर्क देते हैं कि देश और काल बाहरी दुनिया के ढांचे नहीं हैं, ये आंतरिक चीजें हैं, जिनका उपयोग हम अनंत ब्रह्मांड को समझने के लिए करते हैं। वह कहते हैं कि मानवता की अंतिम सीमा की खोज के लिए हम अंतरिक्ष में भागे जा रहे हैं, लेकिन यह सीमा हमारे बहुत करीब भी हो सकती है। इसे खोजने के लिए मुमकिन है कि हमें कहीं और जाने की जरूरत ही न हो। यह इसी क्षण में निहित हो। लेकिन हम इस वर्तमान क्षण को इतने हल्के में लेते हैं, कि देख ही नहीं पाते कि यह कितना रहस्यपूर्ण हो सकता है। हम स्पष्ट रूप से अनुभव करते हैं कि हम समय में मौजूद हैं, हम अपने अतीत को याद करते हैं, वर्तमान को देखते हैं और भविष्य में पहुंचते हैं। लेकिन अगर आपसे अपना अतीत दिखाने को कहा जाए, तो आप कुछ तस्वीरें दिखा देंगे, जो वर्तमान का हिस्सा है। यहां चीजें अधिक उलझन भरी हो सकती हैं, क्योंकि वर्तमान क्षण में ही अतीत और भविष्य मौजूद है, सिर्फ आपका ही नहीं, पूरे ब्रह्मांड का। इस तरह से देखें, तो यह वर्तमान क्षण अनंत लंबाई का हो सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, जब हम इस वर्तमान क्षण को पकड़ने की कोशिश करते हैं, तो यह फिसलता जाता है। यही तो समय का रहस्य है।

©The New York Times 2025

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