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मानुषी होने का मतलब
इंदिरा मितल
Updated Wed, 22 Nov 2017 06:55 PM IST
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इंदिरा मितल
शशि थरूर ने हाल ही में जिन्हें महज रेजगारी समझा, वह रूप ही नहीं, आत्मविश्वास की मूर्ति निकलीं। अतिरंजित व्यक्तित्व वाले राजनेताओं की ऐसी टिप्पणियां वापस उन्हीं पर भारी पड़ती हैं, जो भूल जाते हैं कि आज की रूपसियां अक्ल और हाजिरजवाबी में भी किसी से कम नहीं।
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रूपसी ही नहीं, शिक्षित, बहुपठित, सुजान और कार्डिऐक सर्जन (ह्रदय रोग शल्य चिकित्सक) बनने की आकांक्षिणी विश्व सुंदरी मानुषी छिल्लर जाटनी हैं, वह भी हरियाणा की, और उन्होंने एक वरिष्ठ जननेता की ‘छिछली’ टिप्पणी नाक पर बैठी मक्खी की तरह झल दी! यह वरिष्ठ जननेता अपने युवा जीवन में ईव्ज वीकली जैसी पत्रिका के लिए भी लिखा करते थे।
वह शायद भूल गए कि भारत के समस्त राज्यों में सबसे शोचनीय लिंग अनुपात के लिए आलोचित होने के बावजूद हरियाणा में युवतियां पिछले कुछ वर्षों से खेल कूद, विज्ञान और सौंदर्य के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धाक जमा रही हैं।
बहुआयामी अभिरुचियों वाली मानुषी निजी जीवन में बहुत संयमित ढंग से रहती हैं, चाहे स्वास्थ्य हो या खानपान, अध्ययन अथवा कलात्मक क्रियाकलाप। वैज्ञानिक पिता और डॉक्टर माता की प्रतिभा संपन्न और लक्ष्य केंद्रित पुत्री मानुषी छिल्लर में रूप, कौशल और बुद्धि का अद्भुत संगम है।
मानसी दिल्ली में डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के परिसर में बड़ी हुईं, जिसका बोधवाक्य है बलस्य मूलं विज्ञानम। चीन में रईसाना माहौल में अन्य विश्व सुंदरी प्रतियोगिनियों की तरह अटके या झिझके बिना मानुषी छिल्लर ने प्रारंभ में ही निर्णायकों को यह कहकर अत्यंत प्रभावित किया था कि उनकी जन्मस्थली में विज्ञान और आध्यात्मिकता का असाधारण योग है। उनका प्रदेश कृषकों और योद्धाओं की जन्मभूमि है।
वर्ष 1966 में भारत की प्रथम विश्व सुंदरी और डॉक्टर रीता फारिया की तरह लक्ष्यबद्ध ‘ब्यूटी विद अ पर्पज’ और ‘प्रॉजेक्ट शक्ति’ अभियान की प्रणेत्री मानुषी छिल्लर जैसी युवा नारियों में देश की बेटियों को बचाने का ही नहीं, उन्हें शिखरासीन करने का भी दमखम है, ब्यूटी सिंहासन हो या नारी शक्ति आंदोलन। मायावी चमक-दमक से अभिभूत हुए बिना मानुषी का फोकस आम जन जीवन में परिवर्तन लाने पर है, जिसके लिए वह ग्रामीण क्षेत्रों में गैर लाभकारी अस्पतालों की शृंखला शुरू करने का स्वप्न देखती हैं।
सौंदर्य और आकर्षण से ओतप्रोत तथा अपनी समस्त उपलब्धियों पर गर्व करने वाली यह आधुनिक युवती मातृत्व को ही सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, जिसका मोल पैसों में कदापि नहीं आंका जा सकता। केवल मातृप्रेम और मातृसम्मान ही एक मां की असली पूंजी है। मानसी की मां डॉक्टर नीलम छिल्लर उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। उद्यम और व्यापक दृष्टिकोण उन्हें विरासत में मिले हैं।
मानुषी छिल्लर आज लाखों लड़कियों की प्रेरणा हैं, और जरूरी नहीं कि वे सारी लड़कियां विश्व सुंदरी जैसी स्पर्धा की ही आकांक्षी हों। ऐसी लड़कियां भी, जिनका क्षेत्र अलग हो सकता है, रुचियां अलग हो सकती हैं और आकांक्षाएं भी अलग हो सकती हैं, लेकिन वे कुछ अलग करना चाहती हैं और अपनी प्रतिभा के दम पर पहचान कायम करना चाहती हैं।
-लेखिका अमेरिका स्थित वरिष्ठ स्तंभकार हैं