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जिसने चीन के संकट को पहचाना

Tue, 25 Aug 2015 08:04 PM IST
जॉय नोसेरा
जॉय नोसेरा Updated Tue, 25 Aug 2015 08:04 PM IST
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the man, who recognized the crisis of China

वर्ष 2009 की मंदी के दौर में जिम कैनोस ने चीन की अर्थव्यवस्था के बारे में सवाल पूछना शुरू कर दिया था। उनकी जिज्ञासा को जिस चीज ने बढ़ाया, वह यह एहसास था कि उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादक काफी हद तक वित्तीय संकट से अप्रभावित थे। असल में उन्होंने काफी मुनाफा कमाया था, जबकि अन्य क्षेत्रों ने खुद को इस वित्तीय संकट की चपेट में पाया। जब उन्होंने इसके कारणों का पता लगाया, तो पाया कि इसका महत्वपूर्ण कारक उपभोक्ता वस्तुओं के प्रति चीन की दीवानगी है। चीन के लोगों ने, जो काफी हद तक वित्तीय संकट से बचे रहे, कुल तांबे के निर्यात का 40 फीसदी, उपलब्ध लौह अयस्क का 50 फीसदी और लगभग हर वस्तु की भारी मात्रा में खरीदारी की। इस जानकारी ने कैनोस को यह दुस्साहसिक बात कहने के लिए प्रेरित किया कि चीन के कर्ज का बुलबुला फूटने के करीब है।

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जिम कैनोस वही शख्स हैं, जिन्होंने तीन अरब डॉलर के विदेशी निवेश कोष (हेज फंड) वाले और दूसरों से उधार लिए सिक्योरिटीज को बेचने में माहिर काइनिकोस एसोसिएट्स की स्थापना की। कैनोस वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने पंद्रह वर्ष पूर्व बता दिया था कि एनरॉन ताश के पत्तों का घर है, जो एक दिन ढह जाएगा।
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उन्होंने एनरॉन के शेयरों को बेचा (यानी शेयर के मूल्य में बढ़ोतरी की तुलना में उसके गिरने पर उन्हें फायदा हुआ) और अपने संदेहों को दूसरों के साथ साझा किया। इसमें मेरे मित्र बेथनी मैकलीन भी शामिल थे, जिन्होंने फॉर्चून के लिए एक लेख लिखा, जिसने एनरॉन के अंत की शुरुआत की। इस घटना ने न केवल कैनोस की कुछ हद तक तकदीर बना दी, बल्कि इसने उन्हें प्रसिद्धि भी दिलाई।
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कैनोस एवं उनके सहयोगी अर्थव्यवस्था पर कोई बहुत बड़ा दांव नहीं खेलते हैं, बल्कि उनकी शैली सूक्ष्म दांव लगाने की है। वे किसी खास कंपनी या क्षेत्र के बुनियादी तत्वों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। और यही उन्होंने चीन के साथ किया।

कैनोस ने एक दिन मुझे बताया, 'मैं वर्ष 2009 के उस दिन को कभी नहीं भूल सकता, जब रियल एस्टेट का काम देखने वाले मेरे एक सहयोगी ने मेरे सामने एक प्रजेंटेशन दिया और बताया कि चीन में 5.6 अरब वर्ग मीटर भवन-परिसंपत्ति निर्माणाधीन है, जिसमें से आधी आवासीय है और आधी व्यावसायिक। मैंने कहा, तुम्हारा मतलब 5.6 अरब वर्ग फीट से है। उसने जवाब दिया, नहीं, उसने गलत नहीं कहा, बल्कि वास्तव में उसने 5.6 अरब वर्ग मीटर ही कहा था, जो साठ अरब वर्ग फीट से ज्यादा था।'

कैनोस के लिए तभी से खतरे की घंटी बज गई। तेजी से बढ़ती चीन की अर्थव्यवस्था न केवल अपने निर्यात कौशल पर लगातार आगे बढ़ रही थी, बल्कि कर्ज के पहाड़ पर खड़े संपत्ति के बुलबुले के कारण भी, जिसे सरकार से भी प्रोत्साहन मिल रहा था, क्योंकि चीन की सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च की रणनीति बनाई थी। मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट के मुताबिक, इस समय चीन पर 28 ट्रिलियन (280 खरब) का विशाल कर्ज का बोझ है।

कैनोस ने शीघ्र ही अपने शोध को सार्वजनिक किया। उन्होंने सीएनबीसी व चार्ली रोज को इंटरव्यू दिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में व्याख्यान दिया। उन्होंने रोज को बताया कि चीन में संपत्ति को लेकर अटकलें तेजी से बढ़ रही थीं और यही कारण था कि अर्थव्यवस्था निर्माण कार्यों पर इतनी ज्यादा निर्भर थी। ज्यादार मामलों में भवन-परिसंपत्तियों में मुनाफा कमाने की इतनी ज्यादा संभावना नहीं होती कि कर्ज चुकाया जा सके। इस तरह से चीन की अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने की राह पर बढ़ रही थी। उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर निर्माणाधीन अपार्टमेंट या ऑफिस बहुत महंगे थे, जिनकी लागत एक लाख डॉलर से भी ज्यादा थी, जबकि औसत चीनी परिवार सालाना दस हजार डॉलर से भी कम कमा पाता है।

क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि कैनोस के विचार के विपरीत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीन का वित्तीय तंत्र कैसे आश्वस्त था कि उसके विकास का रथ रुकने वाला नहीं है। कैनोस का मजाक उड़ाया गया! जाने-माने निवेशक जिम रोजर्स ने कहा था, 'यह दिलचस्प है कि दस वर्ष पहले जो लोग चीन के बारे में कुछ नहीं जानते थे, वे अब चीन के विशेषज्ञ बन गए हैं। चीन संकट में नहीं है।' परंपरागत दृष्टिकोण यही था कि चीन की अर्थव्यवस्था लगातार तेजी से विकास करती रहेगी और अगर अर्थव्यवस्था में गिरावट आई, तो चीन के अधिकारी उसे तुरंत थाम लेंगे। लेकिन कैनोस अपनी बात पर अडिग थे।

चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की शुरुआत तब शुरू हुई, जब कैनोस ने पहली बार अपनी आशंका जाहिर की। पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। ज्यादातर विशेषज्ञ आशावान बने रहे। इस बीच कैनोस ने कई कंपनियों के शेयर बेचे, जो चीन के बाजार पर निर्भर थे। और जब उन्होंने अपने विचार की पुष्टि करता हुआ एक लेख पढ़ा, तो वह लगातार लोगों को ई-मेल भेजने लगे। वह लेख चीन के नवनिर्मित खाली भूतहे शहरों, संकटग्रस्त बैंक और कर्ज में दबे राज्य के अपने उद्यमों के बारे में था।


और सोमवार को जब बाजार में भारी गिरावट देखी गई, तो यह निश्चित रूप से लग रहा था कि कैनोस के विचारों की पुष्टि हुई है। शेयर बाजार को इतना अस्थिर करने का चीन एकमात्र कारण नहीं, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण कारण है। चीन की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, उसका शेयर बाजार ध्वस्त हो रहा है और इन दोनों को सहारा देने के सरकारी अधिकारियों के लचर प्रयास वैसे लोगों के भ्रम को दूर करने के लिए काफी हैं, जो अब भी सोचते हैं कि वे सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हैं। ऐसा ही कैनोस ने कहा था। चीन और उसके नेताओं में आत्मविश्वास के इस नुकसान ने दुनिया भर के शेयर बाजारों को डरा दिया है।

इस कहानी का एक सामान्य सबक है कि शंकालुओं और विरोधियों को सुनें जरूर, भले ही अपने जोखिम पर आप उन्हें खारिज कर दें।

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