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चिंताजनक: एपस्टीन फाइलें और आशंकाओं की धुंध, क्योंकि बहुत कुछ नहीं है भरोसेमंद और पुष्ट
Fri, 27 Feb 2026 07:55 AM IST
Pavan
डैनियल रिचमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
डैनियल रिचमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: Pavan
Updated Fri, 27 Feb 2026 07:55 AM IST
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एपस्टीन फाइलें और आशंकाओं की धुंध
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
एपस्टीन की रिपोर्ट न हुई, जी का जंजाल हो गई। तकरीबन हर रोज इस रिपोर्ट में किसी फाइनेंसर, शिक्षाविद, राजनेता और शाही घराने के लोगों के नाम आ रहे हैं। ये वे लोग हैं, जो यौन शोषक सजायाफ्ता जेफ्री एपस्टीन के करीबी थे। सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही कम होने से, एपस्टीन और उनके साथियों से जुड़े दस्तावेज के इतने बड़े ढेर में सच को ढूंढना मुश्किल हो सकता है। लेकिन एपस्टीन फाइलों के लाखों पन्नों के जारी होने को हमें संस्थागत विफलता का संकेत और चिंता की बात, दोनों मानना चाहिए। अगर हमारी न्याय प्रणाली ठीक से काम कर रही होती, तो शायद यह नौबत ही न आती।पहले के समय में लोग कम-से-कम अनिच्छा से ही सही, इस व्यवस्था को स्वीकार करते थे कि अभियोजक और कानून-प्रवर्तन एजेंसियां विस्तृत जांच सामग्री को छांटकर केवल वही हिस्सा सार्वजनिक करें, जो किसी मामले को सही ढंग से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हो। जो अतिरिक्त जानकारी उपयोगी साबित हो सकती हो, लेकिन समाज उसके लिए अभी तैयार न हो, वह गोपनीय ही बनी रहती थी। संघीय अभियोजक पर आम तौर पर भरोसा किया जा सकता था कि वे अपराध के खिलाफ अपने छोटे अभियान पर ध्यान केंद्रित करेंगे और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल नहीं करेंगे, पर अब ऐसा नहीं है। एपस्टीन फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग ट्रंप प्रशासन से पहले की है, पर वे आज ऑनलाइन और आसानी से सुलभ इसलिए हैं, क्योंकि ज्यादातर अमेरिकियों को न्याय विभाग के नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा कि वह उन पर नियंत्रण रख सकता है।
अतीत में, विभाग के प्रमुख अपने मकसद के बारे में संदेह को कम कर सकते थे, क्योंकि वे ऐसे मामलों को राजनीतिक नियुक्ति वाले व्यक्ति के बजाय अपने अधीनस्थों पर छोड़ देते थे। कई लोगों के मुताबिक, अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी में भरोसे की कमी थी, क्योंकि उन्होंने उन वकीलों और एजेंटों को नौकरी से निकाल दिया था, जिन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की मर्जी के आगे झुकने से मना कर दिया था। वह जनता से यह कहकर बच नहीं सकीं कि वे बचे हुए लोगों के गैर-राजनीतिक और स्वतंत्र फैसले पर भरोसा करें। इन फाइलों का सार्वजनिक होना इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि इनमें कच्ची जांच सामग्री की भरमार है (सुनी-सुनाई बातें, अप्रमाणित आरोप और संदिग्ध परिस्थितिजन्य संबंध), जिन्हें सार्वजनिक छानबीन के लिए जारी नहीं किया जाना चाहिए था। हमें नहीं पता कि न्याय विभाग ने दस्तावेजों को कितना सही या गलत तरीके से रोका या हटाया है। हम जानते हैं कि पीड़ितों को बचाने की कोई भी कोशिश अपर्याप्त थी, क्योंकि फाइलों में कई महिलाओं और लड़कियों की साफ तस्वीरें और पहचान की जानकारी मिली है। लोगों को दोबारा पीड़ित न करना नीति नियंताओं की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक होनी चाहिए, लेकिन यहां असफल हो गए।
संघीय अभियोजक और कानून प्रवर्तक एजेंटों को जानकारी इकट्ठा करने के लिए कई साधन उपलब्ध होते हैं, जिन्हें किसी व्यक्ति और ज्यादातर सरकारी एजेंसियों को भी इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। इनमें निजता में दखल देने की शक्ति भी शामिल है। कानूनी तौर पर मौजूद साधनों में सर्च वारंट, वायरटैप, ग्रैंड जूरी समन और एडमिनिस्ट्रेटिव समन शामिल हैं। इसी तरह जांच अधिकारी ई-मेल, निजी बातचीत, फोन, बैंक और मेडिकल रिकॉर्ड तक पहुंच पाते हैं। इसके अलावा, अभियोजक और कानून प्रवर्तकों को गवाहों का सहयोग पाने के लिए मुकदमा चलाने की धमकी का इस्तेमाल करने दिया जाता है।
इन जबर्दस्ती वाले जांच साधनों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है और किया भी गया है। इन साधनों पर ज्यादा सख्त कानूनी रोक लगाने और जानकारी के सरकारी इस्तेमाल के लिए ठोस तर्क भी दिए गए हैं। फिर भी, यदि हमें लगता है कि संघीय आपराधिक कानूनों को लागू करना आवश्यक है, तो प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसी व्यवस्था देना अनिवार्य है, जिससे वे उन आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा सकें, जो स्वभावतः छिपाकर रखी जाती हैं। इसके लिए कभी-कभी निजता की उन परतों को भी भेदना पड़ता है, जो सामान्यतः हमारी रोजमर्रा की गतिविधियों को ताक-झांक करने वाली आंखों या कानों से बचाते हैं। सरकार को मिले साधन अपराध प्रवर्तन मिशन के महत्व के कारण सही हैं, लेकिन उन साधनों से मिली जानकारी के साथ अभियोजक और एजेंट को सावधानी और पेशेवर विवेक भी दिखाना होता है। अभियोक्ताओं द्वारा एकत्र सामग्री का उपयोग आम तौर पर उनके मिशन से घिरा होता है-व्यक्तियों पर आरोप लगाना (या उन पर आरोप न लगाना), मामला लाए जाने के बाद प्रकटीकरण दायित्वों को पूरा करना और, यदि संभव हो, तो जूरी को समझाना या दोषी की स्वीकारोक्ति प्राप्त करना।
जब किसी आपराधिक जांच की सामग्री बड़ी मात्रा में सार्वजनिक उपभोग के लिए जारी कर दी जाती है, तो जांच एजेंसियों को दिए गए कठोर और निजता-भेदी अधिकारों का औचित्य कमजोर पड़ने लगता है। गवाहों और उस मामले से जुड़े संवेदनशील लोगों की गोपनीयता की रक्षा का दावा करने वाली संस्थाएं वैध जांच प्रक्रियाओं का विरोध करने लग सकती हैं। संवेदनशील मामलों में सहयोग करने वाले गवाह भी यह सोचने लगेंगे कि उनकी जानकारी कहीं इंटरनेट पर खोज का हिस्सा न बन जाए। हमें यह समझना होगा कि जब कोई बड़ी जांच रिपोर्ट (जिसमें गॉसिप, सामान्य मेलजोल और संभावित आपराधिक कदाचार का मिश्रण हो) जनता के सामने आती है, तो उसके क्या परिणाम होते हैं। न्याय व्यवस्था कभी भी लोगों को जिम्मेदार ठहराने का अकेला तरीका नहीं होना चाहिए। सामाजिक शर्मिंदगी भी कभी-कभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह कुछ लोगों को बदनाम कर सकती है। पर अनौपचारिक जवाबदेही प्रक्रियाएं आसानी से बिना फिल्टर किए स्रोत सामग्री के गलत इस्तेमाल की दिशा में जा सकती हैं।
ऐसे समय में, जब न्याय विभाग अपने कथित दुश्मनों पर बेबुनियाद मामला चलाकर आपराधिक दस्तावेज भरने पर तुला हुआ है, तो कई लोग शायद ऐसे तमाशे पर दुख न जताएं, जो विभाग में जनता के भरोसे की कमी को दिखाता है। लेकिन हमें ऐसे भविष्य के बारे में सोचना होगा, जब ऐसे मामलों में, जिनमें जानकारी इकट्ठा करने की अनियंत्रित शक्ति अधिकारियों को मिली हो, पुख्ता सबूत वाले मामले ही अपराध के रूप में दर्ज किए गए। हम में से जो लोग आशंकाओं की इस धुंध में सत्य की खोज करना चाहते हैं, उन्हें एपस्टीन फाइलों के ढेर पर अफसोस होना चाहिए, भले ही हम खुद उनमें से कोई नया नाम ढूंढ रहे हों। -©The New York Times 2026