फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Technology: When machines do all the work, what will humans do

तकनीक: 20 साल बाद हम कहां होंगे? जब मशीनें ही सारा काम करेंगी, तो इन्सान क्या करेगा?

Wed, 24 Dec 2025 06:51 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Wed, 24 Dec 2025 06:51 AM IST
विज्ञापन
सार
एलन मस्क कहते हैं कि बीस साल बाद लोगों के लिए काम नहीं रहेगा। सवाल यह है कि जब मशीनें ही सारा काम करेंगी, तो इन्सान क्या करेगा?
 
loader
Technology: When machines do all the work, what will humans do
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

पिछले दिनों स्पेस एक्स और टेस्ला के मालिक खरबपति एलन मस्क ने कहा कि बीस साल बाद कृत्रिम मेधा के कारण लोगों को काम की जरूरत नहीं रह जाएगी। वे काम शौकिया ही करेंगे। मस्क से पहले एआई के पितामह और गॉडफादर कहे जाने वाले ज्योफ्री हिंटन बार-बार इसके बारे में चेता रहे हैं कि भविष्य में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म हो जाएंगी। और अफसोस है कि बेरोजगारों की इस फौज के लिए किसी भी सरकार के पास कोई योजना नहीं है।


ज्योफ्री बेरोजगारी को जिस चेतावनी की तरह कह रहे हैं, मस्क इसे कुछ इस तरह बता रहे हैं कि जैसे मनुष्य के स्वर्णिम दिन आने वाले हैं। बस खाओ, पियो, मौज करो और कुछ मत करो। मनुष्य को अब काम करने की जरूरत नहीं।


 मशीनें जो अब तक सोच नहीं सकती थीं, वे मनुष्य से आगे सोचेंगी और हर तरह के कामों को अंजाम देंगी। बहुत-से लोग इस बात पर भी चिंता प्रकट कर चुके हैं कि कभी ऐसा भी हो सकता है कि मशीनें मनुष्यों से बदला लेने लगें और मानव सभ्यता का अंत हो जाए। हॉलीवुड की कई फिल्में ऐसी बन चुकी हैं, जहां मशीनें मनुष्यों को खत्म करने पर उतारू हो जाती हैं। कुछ साल पहले दो कंप्यूटरों ने अपनी कोड भाषा विकसित कर ली थी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने उन्हें तत्काल नष्ट कर दिया था। लेकिन ज्योफ्री कह चुके हैं कि एआई के बारे में तो कुछ जान भी नहीं पाएंगे कि वे क्या सोच रहे हैं।

खैर एलन मस्क की बात यदि बीस साल में सच हुई, तो भविष्य की तस्वीर का आकलन बहुत डरावना लगता है। मनुष्य के पास यदि किसी भी तरह का काम नहीं होगा, तो वह आखिर करेगा क्या? किसान खेती नहीं करेंगे। दुकानदार दुकानें नहीं चलाएंगे। फैक्टरियों में कर्मचारियों के रूप में मनुष्य नहीं होंगे। बस, कार, और रेल, इन्हें भी कोई मनुष्य नहीं चलाएगा। अस्पतालों में डॉक्टर भी मनुष्य नहीं होंगे। यदि कोई काम ही न करना हो, तो आखिर पढ़ने-लिखने, कुछ सीखने की जरूरत भी क्या रह जाएगी। फिर ऐसे में इस दुनिया की आठ अरब से ज्यादा की आबादी का क्या होगा?

यदि मानव के विकास के इतिहास को हम याद कर सकें, तो पहले मनुष्य के पास पूंछ और सींग होते थे। लेकिन मनुष्य को जब दैनंदिन जीवन में इन अंगों की जरूरत नहीं रही, तो ये अपने आप खत्म हो गए। अब भी कभी-कभी कोई बच्चा सींग या पूंछ के साथ पैदा होता है, तो वह खबर बन जाता है। कहा जाता है कि गर्भ के शुरुआती कुछ माह में बच्चे की पूंछ होती है, लेकिन समय के साथ वह अपने आप ही खत्म भी हो जाती है, यानी कि जिन अंगों की जरूरत नहीं होती, प्रकृति उन्हें खुद ही खत्म कर देती है। तो क्या हमारे मस्तिष्क के साथ भी ऐसा ही होगा? वैसे भी यदि हम किसी काम को वर्षों तक न करें, तो उन्हें करना भूल जाते हैं। तो क्या हजारों साल में मनुष्य ने जो तरह-तरह की विद्याएं सीखी हैं, वे सब नष्ट हो जाएंगी? मनुष्य फिर उस युग में पहुंच जाएगा, जहां उसे आग तक के बारे में मालूम नहीं था।

इसके अलावा, यदि मनुष्य के पास कोई काम न हो, बस वह खाए, बैठे, सोए, तो वह कितने दिन जीवित रह सकता है। वह तरह-तरह के रोगों से घिर जाएगा। तमाम डॉक्टर तथा चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाले लोग सलाह देते हैं कि जब तक जागते हो, तब तक कुछ न कुछ करते रहो। जितना खाया है, उसे तरह-तरह के काम करके खर्च करना जरूरी है। फिर जब कुछ करना ही नहीं है, तो क्यों मनुष्य आगे की सोचेगा? क्यों परिवार बसाएगा? क्यों ही अपने बच्चों की चिंता करेगा?

इसके अलावा, जब दुनिया का हर मनुष्य खाली बैठा होगा, तो वह लड़ाई-झगड़े लिए भी तरह-तरह के बहाने ढूंढता रहेगा, क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है।

कृत्रिम मेधा के बारे में एक और बात समझ में आती है। जो लोग मनुष्य के बदले एआई का चुनाव कर रहे हैं, न जाने क्यों, उन्हें एक बात समझ में नहीं आती। पैसे बचाने के लिए आप मनुष्य के मुकाबले एआई कर्मचारियों को ला रहे हैं। मनुष्य की तरह न तो इन्हें छुट्टियां चाहिए, न तनख्वाह, न कोई इक्विपमेंट, न बोनस, और न ही कोई शिकायत। आपको सिर्फ अपने उत्पाद का अधिक से अधिक उत्पादन करना है। लेकिन जब अधिसंख्य मनुष्य बेरोजगार होंगे, उनकी जेब में पैसा नहीं होगा, क्रय शक्ति नहीं होगी, तो उन उत्पादों को भला खरीदेगा कौन? मशीनों को तो न आटा चाहिए, न साबुन, न ही कोई और चीज। जिस मुनाफे का सपना देख रहे हैं, उसे धूल धूसरित होने में कितना समय लगेगा। edit@amarujala.com    
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed