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ताजमहल और भैंस
कल्लोल चक्रवर्ती
Updated Thu, 23 Apr 2015 08:19 PM IST
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आगरा प्रशासन ने ताजमहल के सामने से भैंसों के गुजरने और यमुना में उनके नहाने पर रोक लगाकर अन्याय किया है। हद है कि इस फैसले के खिलाफ कहीं कोई प्रदर्शन नहीं, कोई जुलूस नहीं। जबकि यह सीधे-सीधे भैंसाधिकार का उल्लंघन है। क्या भैंसें इस देश की निवासी नहीं? जब उन्हें यहां-वहां चरने, चारा खाने और दूध देने का अधिकार है, मालिकों को उनका दूध बेचकर कोठियां खड़ी कर लेने का अधिकार है, तो बेचारी भैंसों को ताजमहल के आगे से गुजरने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए!
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इन भैंसों ने आखिर ऐसा क्या गुनाह किया है कि उन्हें यह सजा दी जा रही है? कभी यह नहीं सुना कि ताजमहल के सामने से गुजरते हुए अचानक कोई भैंस सौंदर्य के इस अनुपम नमूने को देखने के लिए ठिठक गई हो, जिससे यातायात पर असर पड़ा हो। न ही भैंसों ने ताजमहल के सामने बेंच पर बैठकर कभी फोटो खिंचवाने की जिद की होगी। फिर भी उनके साथ ऐसा सुलूक!
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भैंसों को इसलिए नहीं रोका जा रहा कि उनके गुजरने के कारण ही ताजमहल का रंग काला पड़ा है। वे तो बेहद सीधी-साधी जानवर हैं, कभी-कभार मौका देखकर किसी को सींग मार देती हैं। वे भला ताजमहल का क्या बिगाड़ सकती हैं? प्रशासन के मुताबिक, वे ताजमहल के सामने गोबर करती हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों के सामने देश की छवि खराब होती है। पर भैंसों को बाड़े में बांधकर, उनके चलने-फिरने और नहाने पर प्रतिबंध लगाकर भैंस समुदाय के सामने हम अपनी कौन-सी छवि पेश करेंगे?
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क्या भैंसों को यमुना में नहाने से रोक देने पर यमुना साफ हो जाएगी? ठीक है, हम अतिथि को देवता मानते हैं। पर विदेशियों की खुशी के लिए अपनी भैंसों के साथ ऐसा सुलूक करें, यह न्याय नहीं। अब किस्मत-किस्मत की बात है। इसी सूबे में आजम खान की चोरी हुई वीआईपी भैंसें कुछ दिनों बाद बरामद हो जाती हैं, लेकिन आगरा के ताजगंज की बेचारी भैंसों के चलने-फिरने और यमुना में नहाने पर पाबंदी के खिलाफ कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है।