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जंग: पश्चिम एशिया में शांति व समृद्धि के लिए ईरान को रोकना जरूरी, यहूदियों ने सात अक्तूबर को देखी सबसे बुरी त
Tue, 08 Oct 2024 04:35 AM IST
राहुल कुमार
बेनी गैंट्ज, द न्यूयॉर्क टाइम्स
बेनी गैंट्ज, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 08 Oct 2024 04:35 AM IST
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इस्राइल के पीएम नेतन्याहू और ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई (फाइल)
- फोटो :
ANI
विस्तार
सात अक्तूबर, 2023 को इस्राइल और यहूदी लोगों ने नरसंहार के बाद अब तक की सबसे बुरी त्रासदी देखी। एक ही दिन में इस्राइल में करीब 1,200 लोगों की हत्या कर दी गई और करीब 250 लोगों को बंधक बना लिया गया, जिनमें से 101 लोग अब भी गाजा में बंदी हैं। लेबनान में हिजबुल्ला ने अगले ही दिन उत्तरी इस्राइल पर हमला शुरू कर दिया, जिससे करीब 70,000 इस्राइलियों को अपने घरों को छोड़ना पड़ा। ईरान ने पहले इस वर्ष 13 अप्रैल और फिर एक अक्तूबर को हमले करके लाखों इस्राइलियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर कर दिया है। इस युद्ध के एक वर्ष बाद यह जानना आवश्यक है कि हमास के नेता सात अक्तूबर के हमले से आखिर क्या उम्मीद कर रहे थे, और ईरान के नेता क्या हासिल करना चाहते हैं?इस्राइली सेना और राजनीतिक प्रतिष्ठान यह समझने में विफल रहे कि हमास किस हद तक धार्मिक युद्ध छेड़ने के लिए उतावला था। युद्ध की शुरुआत में इस्राइली रक्षा बलों के एक वरिष्ठ खुफिया कमांडर ने हमास के नेता याह्या सिनवार का जिक्र करते हुए मुझसे कहा, खुफिया जानकारी तो थी, लेकिन मैंने हमास और सिनवार के गणित के जेहादी पहलू को कमतर आंका था। हम इस चेतावनी पर भी अमल करने में विफल रहे कि हमास ने इस्राइल की घरेलू अस्थिरता को किस हद तक कमजोरी माना, जो इस्राइल के संकल्प और हमले का जवाब देने की क्षमता को बाधित करेगी।
खुफिया जानकारी से पता चला है कि हमास के प्रमुखों का मानना था कि इस्राइली एकजुट होने में सक्षम नहीं होंगे। हमास की योजना के अनुसार, इस्राइल पर हमले के बाद ईरान की शैतानी धुरी के शेष घटक-हमास, हिजबुल्ला, हूती, शिया लड़ाके-एकमात्र यहूदी राज्य को नष्ट करने के अंतिम लक्ष्य के साथ एक क्षेत्रीय युद्ध में शामिल हो जाएंगे। गाजा में कथित तौर पर उजागर हुए हमास के एक गुप्त दस्तावेज ने ऐसे दावे की पुष्टि की-आठ जनवरी, 2023 को हमास नेता द्वारा लिखे गए इस दस्तावेज में उन्होंने दावा किया कि उन्हें ईरान से संदेश मिला कि जब इस्राइल पर आक्रमण के लिए हमास की योजना सक्रिय हो जाएगी, तो धुरी राष्ट्र इस्राइल के खिलाफ हमले में शामिल हो जाएंगे।
जाहिर है, हमास के हमले के पीछे तीन कारण थे-जिहादी कट्टरता, इस्राइल के कमजोर होने का आकलन और ईरान व उसकी शैतानी धुरी के प्रति वफादारी। इन्हीं कारणों से सात अक्तूबर और उसके बाद ईरान द्वारा इस्राइल पर किए गए हमले, इस क्षेत्र और दुनिया के लिए इस्लामी गणराज्य के अडिग इरादों और पश्चिम के प्रति उसके नजरिये के बारे में एक सख्त चेतावनी देते हैं। ईरान का धार्मिक नेतृत्व अपनी कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार के लिए समर्पित है, जो वर्चस्व के साथ अपने विरोधियों का हिंसक दमन करना चाहता है। अन्य देशों को वही गलती नहीं करनी चाहिए, जो इस्राइल ने की और वे अयातुल्ला अली खामनेई के इस घटक को कम न आंकें।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर ने इस्राइल, उसके पड़ोसी देशों और क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय बलों के इर्द-गिर्द आतंकी लड़ाकों का एक घेरा स्थापित कर दिया है, जिनकी क्षमताएं कई राष्ट्रों के बराबर हैं। उनके पास हमले के लिए हजारों रॉकेट, ड्रोन और कमांडो बल तैयार हैं। ईरान जिस क्षमता से इस्राइल को निशाना बनाता है, वही क्षमताएं उसने और उसके सहयोगियों ने पहले सऊदी अरब और यमन में संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ इस्तेमाल की थीं। इसके अलावा, यह लगातार क्षेत्रीय आक्रामकता दिखाता है, और परमाणु क्षमता हासिल करने की होड़ में लगा रहता है।
हमास नेता और अयातुल्ला खामनेई की एक ही महत्वाकांक्षा है-इस्राइल को खत्म करना। लेकिन अयातुल्ला खामनेई के पास रणनीतिक धैर्य अधिक है, जिसके कारण उन्होंने इस्राइल पर पूर्ण हमला करने के लिए सही समय का इंतजार किया। ईरान ने लेबनान, सीरिया, यमन में भी अपना आधार मजबूत करने के लिए ऐसा ही किया, और वर्तमान में अफ्रीका के साहेल क्षेत्र की अस्थिरता का फायदा उठाकर अपनी पहुंच का विस्तार कर रहा है। सात अक्तूबर के बाद की वास्तविकता में, इस्राइल को और दुनिया को भी ईरानी शासन द्वारा इस्राइल के अस्तित्व और क्षेत्र के भविष्य के लिए उत्पन्न खतरे के प्रति सक्रिय और दृढ़ निश्चयी होना चाहिए। लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता का गला घोंटने और वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाने में ईरान की भूमिका या यूक्रेन में रूस को तकनीकी और सैन्य सहायता देने की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। ईरानी शासन और उसकी धुरी को एक मजबूत और एकजुट पश्चिम एशिया का सामना करना होगा, जिसका नेतृत्व और समर्थन अमेरिका द्वारा किया जाएगा, जो ईरान को रोकने की पहल के लिए तैयार है।
अब क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और ईरान का सामना करने के लिए व्यापक प्रयास करने का समय है। सैन्य मोर्चे पर सरकारों को ईरानी आक्रामकता के साथ मजबूती और सक्रियता से निपटना होगा तथा व्यवस्थित रूप से उसकी प्रॉक्सी क्षमताओं को कम करना होगा। क्षेत्रीय मोर्चे पर इस्राइल को पश्चिम एशियाई वायु रक्षा तंत्र और क्षेत्रीय संरचना को मजबूत करना होगा। आर्थिक मोर्चे पर राष्ट्रों को प्रतिबंधों को मजबूत करके, प्रमुख ईरानी उद्योगों को लक्षित करके तथा विदेश में उसकी परिसंपत्तियों पर कब्जा करके आतंकवाद की फंडिंग को बंद करना होगा। कानूनी मोर्चे पर जिन सरकारों ने अभी तक ऐसा नहीं किया है, उन्हें इस्लामिक गणराज्य और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स समेत उसकी शाखाओं को अपनी आतंकवादी सूची में डालना चाहिए। राजनीतिक मोर्चे पर उन्हें ईरानी विपक्ष को मजबूत करने के साथ विश्व मंच पर ईरान को अलग-थलग करना चाहिए। इस तरह के संगठित अभियान के लिए समय और संसाधनों तथा गंभीर, स्थायी, एकजुट प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी। यूक्रेन और ताइवान के साथ-साथ इस्राइल भी शैतानी धुरी के खतरे में है।
सात अक्तूबर को इस्राइल ने सबसे दर्दनाक त्रासदी का अनुभव किया। इस्राइली रक्षा मंत्री के रूप में अपने अनुभव के नाते मेरा मानना कि इस्राइल पश्चिम एशिया में सबसे मजबूत राष्ट्र है, जो देश के भविष्य और अपने नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण युद्ध लड़ रहा है, और इसीलिए वह विजयी होगा। ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने का समय आ गया है। यह न केवल इस्राइल के लिए जरूरी है, बल्कि इस क्षेत्र के लिए रणनीतिक अनिवार्यता और पश्चिम एशिया में शांति व समृद्धि के लिए भी जरूरी है।