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न मैं दोषी, न प्रधानमंत्री
Updated Fri, 10 May 2013 11:18 PM IST
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कोल ब्लॉक आवंटन मामले की सीबीआई जांच की स्टेटस रिपोर्ट बदलने को लेकर कानून मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। इस पूरे मुद्दे पर कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल से हिमांशु मिश्र ने बातचीत की-
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सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट से छेड़छाड़ मामले में आपके मंत्रालय की भूमिका पर भी शीर्ष अदालत ने प्रतिकूल टिप्पणी की है, इस पर क्या कहेंगे?
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जहां तक सर्वोच्च अदालत के ऑब्जर्वेशन की बात है, तो उसका पूरा सम्मान किया जाएगा। मगर अदालत ने जिस संयुक्त सचिव की भूमिका की बात कही है, वह हमारे चीफ विजिलेंस ऑफिसर हैं। सीबीआई जांच के आदेश के बाद इस अधिकारी पर सारे दस्तावेज उपलब्ध कराने के अलावा सवालों का जवाब देने का भी जिम्मा था। उसने हर दस्तावेज उपलब्ध कराए और सीबीआई के हर सवाल का जवाब भी दिया।
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आरोप है कि घोटाले में शामिल हस्तियों को बचाने के लिए रिपोर्ट में बदलाव किए गए?
ऐसा कुछ नहीं है, और न ही इस पूरे विवाद में मेरे मंत्रालय की कोई भूमिका है। मेरे मंत्रालय ने तो सीबीआई को तमाम दस्तावेज उपलब्ध कराए। जो दस्तावेज मंत्रालय के पास नहीं थे, उसे विधि, भारी उद्योग जैसे मंत्रालयों से मंगाकर उपलब्ध कराया गया।
क्या मंत्रालय प्रधानमंत्री पर उठ रहे सवालों से उनको बचाने का प्रयास नहीं कर रहा?
प्रधानमंत्री पर आक्षेप का तो सवाल ही नहीं उठता। आवंटन के लिए जो व्यवस्था बनाई गई, उसे लागू करना संबंधित अधिकारी का काम है, न कि प्रधानमंत्री का। इसमें प्रधानमंत्री की भूमिका कहां से आ गई?
लेकिन संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में कोल ब्लॉक आवंटन में गंभीर मनमानी की बात कही है?
मैं जानना चाहूंगा कि संसदीय समिति ने किस जांच के आधार पर ऐसा कहा है। अभी तो सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है। पूरे प्रकरण में इस आशंका से इनकार नहीं कि जिन अधिकारियों को कोल ब्लॉक पाने वाली कंपनियों के स्टेटस की जांच का जिम्मा सौंपा गया था, उसने सही तरीके से जांच नहीं की। इसी की पड़ताल सीबीआई कर रही है। फिर मामला यूपीए के कार्यकाल का नहीं, बल्कि 1993 से हुए सभी आवंटनों का है। राजग सरकार के कार्यकाल में छब्बीस कोल ब्लॉक आवंटित किए गए। उस समय तो आवंटन की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। यूपीए सरकार की पहली पारी में स्क्रीनिंग कमेटी बनी और इसी की सिफारिश के आधार पर आवंटन की नीति बनी।
मगर यूपीए सरकार में आवंटन में आई तेजी को लेकर आप पर भी सवाल उठे हैं?
मुझ पर सवाल उठ नहीं रहे, बल्कि उठ रहे थे। मगर जैसे-जैसे विपक्ष को पता लगा कि मेरी या मेरे मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है, सवाल उठने बंद हो गए। जहां तक आवंटन का सवाल है, तो ऊर्जा जरूरत पाटने के लिए ऐसा करना जरूरी था। केंद्र और राज्य सरकारों की पीएसयू ऊर्जा और इसके लिए जरूरी कोयले की मांग पूरी नहीं कर सकते थे। ऐसे में निजी कंपनियों को भी कोल ब्लॉक दिए गए।
घोटाला सामने आने के बाद आईएमजी ने कुछ आवंटन रद्द किए थे। अब ताजा स्थिति क्या है?
आईएमजी ने उन 50 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया, जहां खनन शुरू नहीं हो पाया था। आईएमजी की दूसरी बैठक में कुछ और आवंटन रद्द करने और कंपनियों को चेतावनी देने का फैसला हुआ। इसके अलावा कोल रेगुलेटरी कमेटी का प्रारूप भी पूरा हो चुका है। एक पखवाड़े के अंदर कमेटी संबंधी प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा। मुझे विश्वास है कि कमेटी बन जाने के बाद कोयला क्षेत्र में व्यापक सुधार आएगा।