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मुद्दा: बच्चों की निजता की कीमत पर शेअरेंटिंग...रिश्तों पर प्रभाव के साथ-साथ सुरक्षा के लिए भी खतरा

Mon, 02 Dec 2024 07:49 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Mon, 02 Dec 2024 07:49 AM IST
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सार
सोशल मीडिया पर बच्चों के चित्रों व वीडियो को माता-पिता द्वारा शेयर करने की बाढ़-सी आ गई है, जो बड़े होने पर बच्चों को असहज करते हैं।
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Sharing on social media at cost of privacy effect on children parent relationship and threat to safety
सोशल मीडिया पर बच्चों के चित्रों और वीडियो की बाढ़... (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी

विस्तार

इन दिनों सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बच्चों के तरह-तरह के चित्र नजर आते हैं। हंसते-गाते, रोते, खेलते, खाते-पीते, शैतानी करते, सजे-संवरे हर तरह के चित्र और वीडियो फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब आदि तमाम प्लेटफार्म पर देखे जा सकते हैं। ये चित्र अक्सर माता-पिता द्वारा शेयर किए जाते हैं। दुनिया भर से हर रोज ऐसे लाखों चित्र और वीडियो शेयर किए जाते हैं। इसे शेअरेंटिंग का नाम दिया गया है। यह शब्द शेयर और पेरेंटिंग को मिलाकर गढ़ा गया है।



जब से सोशल मीडिया आया है, तब से ऐसे चित्रों, वीडियो की बाढ़-सी आ गई है। इन्हें शेयर करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, फ्रांस, भारत समेत बहुत से एशियाई देश शामिल हैं। इन्हें शेयर करने वाले बहुत से माता-पिता खूब पैसे भी कमा रहे हैं। लाइक्स और व्यूज के आधार पर उन्हें विज्ञापन भी मिलते हैं। तमाम बड़े ब्रांड्स की नजर इन पर रहती है और वे लोकप्रिय वीडियो आदि को देखकर बच्चों और माता-पिता से जुड़े उत्पादों के लिए एक तरह से बड़ा बाजार पा जाते हैं। लोग बच्चों के बारे में ज्यादा से ज्यादा देखना चाहते हैं। इसलिए यह एक बहुत सफल व्यवसाय भी बन चुका है।


लेकिन बहुत से वे बच्चे, जो अब बड़े हो गए हैं, इस तरह की चीजों का विरोध कर रहे हैं। पश्चिम में ये लोग अपनी आवाज उठाकर कह रहे हैं कि बच्चों के साथ माता-पिता को ऐसा नहीं करना चाहिए। उनसे जुड़ी छोटी से छोटी बात सोशल मीडिया पर शेयर कर दी जाती है और उनकी निजता तथा अधिकारों का हनन होता है। जब तक ये बच्चे किशोर होते हैं, तब तक उनके हजारों फोटो और वीडियो देखे जा चुके होते हैं। बच्चों के लाखों फालोअर्स होते हैं। वे बच्चों के बारे में ज्यादा से ज्यादा देखना चाहते हैं।

बच्चों की खुशी के लिए, उनकी सुरक्षा के लिए फोटो, वीडियो शेयर करने से बचना चाहिए। कानून भी इसकी इजाजत नहीं देता कि बच्चों की निजता भंग की जाए। तीन-तीन साल के बच्चों को बंदूक चलाते दिखाया जा रहा है। कई बार तो ऐसे फोटो और वीडियो गर्भावस्था के शुरू होते ही शेयर किए जाने लगते हैं। बच्चा कैसे पैदा हुआ, कैसे रोया, कब दूध पिया, कब नहाया, कब सोया आदि छोटी-छोटी बातें तक बताई जा रही हैं। बच्चों के जरिये माता-पिता अपने लिए भी प्रसिद्धि और अटेंशन चाहते हैं। अपनी इच्छाओं को नन्हे बच्चों पर इस तरह से थोप दिया गया है कि उनका पल-पल दूसरों की नजरों में है।

सोशल मीडिया पर बच्चों को इस तरह दिखाना बहुत से देशों में बाल श्रम के अंतर्गत अपराध माना जाता है। बाल श्रम गैर कानूनी है। इसलिए सरकारें नियम बना रही हैं कि अगर बच्चों का इस्तेमाल इस तरह से किया गया, तो ऐसा करने वालों को सजा मिलेगी। एक माता-पिता से तो इस अपराध में उनके बच्चे भी छीन लिए गए। कई माताएं भी इस तरह की बातों के खिलाफ हैं। एक मां ने कहा कि वह अपने बच्चों को नुमाइश की चीज नहीं बनाना चाहती। बच्चों की कीमत पर माता-पिता बड़े-बड़े घर बना रहे हैं। बहुत-सी महंगी चीजें खरीद रहे हैं। दुनिया के लाखों बच्चे करोड़ों लोगों की नजर में हैं।

शेअरेंटिंग के खिलाफ अभियानों को समर्थन भी मिल रहा है। एक लड़की ने कहा कि कल अगर मैं किसी नौकरी पर जाऊं, तो  नियोक्ताओं को मेरे बारे में सब कुछ मालूम होगा। सिर्फ नियोक्ताओं को ही नहीं, दुनिया में बहुत से लोगों को मालूम है। अनजान लोग हमें घूरते हैं, पीछा करते हैं। जब मैं नौ साल की थी, तो मेरे पीरियड्स शुरू हो गए। माता-पिता ने यह सूचना भी शेयर कर दी। और मात्र नौ साल की उम्र में लोग कहने लगे कि औरत बनने के लिए बधाई। यह एक तरह से मेरे बचपन को छीनना था। एक लड़की को तंग करना था।

अपने यहां भी टॉक अबाउट पीरियड्स जैसे अभियान के तहत बच्चियों के बारे में इस तरह की बातें शेयर की जा रही हैं कि कब उनके पीरियड शुरू हुए। उनके खून से सने कपड़े तक सोशल मीडिया पर डाले जा रहे हैं। तमाम जांच एजेंसियां कहती हैं कि किसी अपरिचित से बच्चों के डिटेल्स शेयर न करें। उनके फोटो न दें। मगर सोशल मीडिया के जरिये तो करोड़ों लोग इन बच्चों की हर हरकत को देख रहे हैं। बहुत से विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता का ऐसा करना बच्चों के साथ उनके रिश्तों को प्रभावित करता है, उनकी सुरक्षा के लिए तो खतरा है ही।

विभिन्न देशों में शेअरेंटिंग पर शोध हो रहे हैं। इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों का भी अध्ययन हो रहा है। अमेरिका में इस तरह के कानून बनाने की भी तैयारी चल रही है, जो बच्चों को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स से बचा सकें।  

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