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सुरक्षा: थिएटर कमांड क्यों जरूरी है, नई पद्धति का विरोध किसलिए
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विस्तार
आज के समय में किसी भी स्थान की सुरक्षा के लिए थल और वायु सेना, दोनों की आवश्यकता है, और दोनों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। लेकिन, यह तभी संभव है, जब दोनों सेनाओं की टुकड़ियों को एकसाथ नियुक्त किया जाए और इनका एक ही कमांडर हो। उनके बीच अच्छे समन्वय के लिए उसे एक थिएटर कमांड के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, जिसका कमांडर एक सैनिक अधिकारी होना चाहिए, जिसे थिएटर कमांडर के नाम से जाना जाए।
स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर आज तक भारत के लिए खतरा मुख्यरूप से पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर चीन से ही रहा है। साथ ही, हमारे अंडमान निकोबार द्वीप समूह की रक्षा भी उतनी जरूरी है। इसको देखते हुए सीमाओं की सामरिक और भौगोलिक स्थिति के अनुसार थिएटर कमांडो की आवश्यकता है। इस समय सेना के तीनों अंगों की तैनाती कमांड प्रणाली से चल रही है, जिसमें तीनों अंगों को उत्तरी, दक्षिणी, पश्चिमी तथा सेंट्रल कमांड द्वारा तैनात किया गया है, और उसके साथ ही थल सेना के सिविल प्रशासन से समन्वय के लिए उसके क्षेत्रीय मुख्यालय भी हैं। दरअसल, इस प्रणाली द्वारा अंग्रेज भारत पर अपने शासन और कब्जे को सुनिश्चित करना चाहते थे। परंतु, अब भारत स्वतंत्र है और उसे देश के आंतरिक हिस्सों में अंग्रेजों जैसी चुनौतियां नहीं हैं। ऐसे में, बदलती चुनौतियों के अनुसार सीमाओं की सुरक्षा प्रणाली में खतरों को देखते हुए परिवर्तन की आवश्यकता है।
भारत को नई कमांड प्रणाली की सबसे बड़ी कमी कारगिल युद्ध के समय महसूस हुई, जब कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की सूचना अलग-अलग खुफिया तंत्रों से आ रही थी, परंतु ये सूचनाएं सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थल सेना तक नहीं पहुंच रही थीं। पहलगाम हमले में भी यह देखा गया था कि इस क्षेत्र में आतंकवादियों की गतिविधि की पूर्व सूचना नहीं थी और इसी कारण से पहलगाम जैसे स्थान पर जहां देश के हर हिस्से से सैलानी आते हैं, वहां पर सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। ऐसे में, अब यह आवश्यक हो गया है कि थल तथा वायु सेना की यूनिटों को पश्चिमी तथा उत्तरी सीमाओं पर एक संयुक्त सैनिक संगठन के रूप में नियुक्त किया जाए, जिनकी कमान एक सैनिक कमांडर के पास हो, जो क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली सैनिक चुनौतियों से शीघ्र निपट सके। इसके साथ उस क्षेत्र के बारे में सारी गुप्त सूचनाएं संबंधित क्षेत्र के सेक्टर कमांडर के पास पहुंचाई जानी चाहिए।
आजकल के युद्धों से यह सामने आया है कि हमलावर देश हर प्रकार की सैनिक शक्ति वायु, थल तथा जल सेना का प्रयोग एकसाथ करके अपने दुश्मन को शीघ्र हराना चाहता है। इसको देखते हुए विश्व की महाशक्तियों अमेरिका, चीन और रूस ने अपनी सेनाओं का पुनर्गठन थिएटर कमांडो के रूप में काफी पहले कर दिया है। इस पुनर्गठन में देखने में आया है कि सेनाओं के प्रमुख अपनी सेना से नियंत्रण खोने के डर से इस नई पद्धति का विरोध करते हैं। अमेरिका में भी इस प्रकार की स्थिति आई थी, जिसको ठीक करने के लिए वहां पर गोल्डस्टार-निकोलस नाम का एक कानून 1986 में पारित किया गया, जिसके द्वारा थिएटर कमांडो के अनुसार, वहां की सेना का पुनर्गठन किया गया। भारत में भी वायु सेना प्रमुख ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर सीडीएस की अध्यक्षता में तीनों सेना प्रमुखों द्वारा सेना के विभिन्न ऑपरेशनों के लिए योजना बनाई जानी चाहिए और उसके बाद उस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी अलग-अलग सेना को उसकी सुविधा के अनुसार दी जानी चाहिए।