फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Relations: beginning of new era in relations, profound implications of British Prime Minister's visit to India

द्विपक्षीय रिश्ते: संबंधों के एक नए युग की शुरुआत, ब्रिटिश प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के गहरे निहितार्थ

Thu, 09 Oct 2025 12:16 AM IST
K S Tomar केएस तोमर
Updated Thu, 09 Oct 2025 12:16 AM IST
विज्ञापन
सार
भारत आर्थिक महाशक्ति बन रहा है, तो ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन नई भूमिका की तलाश में है। ऐसे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के गहरे निहितार्थ हैं।
 
loader
Relations: beginning of new era in relations, profound implications of British Prime Minister's visit to India
पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर - फोटो : @narendramodi

विस्तार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर आज अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत आ रहे हैं। उनकी यह दो-दिवसीय यात्रा भारत-ब्रिटेन संबंधों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इस यात्रा को लेकर पहले ही काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करना चाहते हैं। ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन द्वारा नई वैश्विक साझेदारियों की तलाश की पृष्ठभूमि में भारत एक रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकता का प्रतिनिधित्व करता है।



उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने, कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्र-विशिष्ट अवसरों की पहचान करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करेगी। व्यापार के अलावा, स्टार्मर की मौजूदगी जलवायु परिवर्तन, एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता और शासन के बहुपक्षीय ढांचे जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत के साथ बातचीत करने की ब्रिटेन की इच्छा का संकेत देती है।


इस वर्ष 24 जुलाई को भारत-ब्रिटेन एफटीए पर हस्ताक्षर हुए थे, जो इस यात्रा के केंद्र में होगा। तीन वर्ष से ज्यादा समय की बातचीत के बाद हुए इस समझौते से टेक्सटाइल्स, लेदर, फुटवियर, खेल सामान, खिलौने, समुद्री उत्पाद, नग और ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो उपकरण और ऑर्गेनिक केमिकल जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर टैरिफ हटने या कम होने की उम्मीद है। इससे द्विपक्षीय व्यापार में 25.5 अरब पाउंड वार्षिक वृद्धि का अनुमान है और दोनों देशों ने 2030 तक 120 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा है। एफटीए को भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौते और ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन के सबसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते के तौर पर वर्णित किया गया है। यद्यपि, इसकी सफलता के लिए निरंतर ध्यान देना पड़ेगा। प्रमुख चुनौतियों में नियामकीय दिशा सुनिश्चित करना, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना और दोनों पक्षों के लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बाजार पहुंच को सुगम बनाना शामिल है। स्टार्मर की यात्रा इन परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर स्पष्टता प्रदान करने और हितधारकों के बीच विश्वास पैदा करने का अवसर प्रदान करती है।

इसके अलावा, ब्रिटेन और भारत द्वारा एफटीए को केवल टैरिफ-कटौती तंत्र से आगे ले जाने के लिए पूरक पहलों की खोज किए जाने की उम्मीद है। इनमें अनुसंधान एवं विकास, नवाचार समूहों, वित्तीय प्रौद्योगिकी और हरित प्रौद्योगिकी में संयुक्त निवेश शामिल हैं। प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग को शामिल करके दोनों राष्ट्र एक लचीली, भविष्य-सुरक्षित आर्थिक साझेदारी बनाने का लक्ष्य रखते हैं। स्टार्मर की यात्रा केवल व्यापार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने को लेकर भी है, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु, शिक्षा और लोगों से लोगों के संबंध निहित हैं। भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भारत-ब्रिटेन के बीच घनिष्ठ सहयोग एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव का प्रतिकार कर सकता है।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री स्टार्मर मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके अलावा, दोनों नेता ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के छठे संस्करण को संबोधित करेंगे, जहां उद्योग विशेषज्ञों, नवप्रवर्तकों और नीति निर्माताओं के साथ बातचीत करेंगे। इस मंच से भारत-ब्रिटेन साझेदारी में तकनीक, फिनटेक और नवाचार की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाले जाने की उम्मीद है। नौ अक्तूबर को, दोनों प्रधानमंत्री भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत प्रगति की समीक्षा करेंगे, जो विजन 2035 के अनुरूप है। यह एक दस वर्षीय रोडमैप है, जिसमें व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, जलवायु, स्वास्थ्य, शिक्षा व लोगों के बीच संबंधों से जुड़ी पहलों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। एजेंडे में व्यवसायों व उद्योग जगत के नेताओं से बातचीत भी शामिल है, जिसमें विशेष रूप से हाल ही में हस्ताक्षरित एफटीए से उत्पन्न अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में कार्य करता है।

स्टार्मर की यात्रा भारत-ब्रिटेन संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है। अपनी शक्ति का लाभ उठाकर भारत और ब्रिटेन एक ऐसी दूरदर्शी साझेदारी की नींव रख सकते हैं, जो वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। अर्थशास्त्र से परे इस यात्रा के संकेत गहरे हैं। भारत एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो ब्रिटेन ब्रेक्जिट के बाद अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है। इसलिए, यह यात्रा भारत-ब्रिटिश संबंधों के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक हो सकती है, जिसके निहितार्थ द्विपक्षीय गलियारों से कहीं आगे बढ़कर व्यापक एशियाई और वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed