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चुनौतियों के बरक्स: भारतीय अर्थव्यवस्था में बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले से मजबूत; RBI की रिपोर्ट

Thu, 26 Mar 2026 05:29 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Thu, 26 Mar 2026 05:29 AM IST
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सार
वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद आरबीआई की रिपोर्ट का यह कहना आश्वस्तकारी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले से बढ़ी है। जरूरत चुनौतियों के बरक्स इन क्षमताओं को बढ़ाने की है, ताकि हमारी अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर व आत्मनिर्भर बन सके।
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RBI Report: Face of Challenges: Indian Economy's Resilience to External Shocks Stronger Than Before
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अपनी ताजा रिपोर्ट में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं को रेखांकित करते हुए यह संकेत देना कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले की अपेक्षया मजबूत हुई है, एक जटिल, किंतु आश्वस्तकारी आर्थिक वातावरण की ओर इशारा है। रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम एशिया में तनाव ने वैश्विक ऊर्जा व वित्तीय बाजारों में स्वाभाविक ही अस्थिरता बढ़ा दी है।


कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की आपूर्ति में आई रुकावटों की गंभीरता इससे ही समझी जा सकती है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी वैश्विक तेल बाजार की तारीख में इसे सबसे बड़ा आपूर्ति-व्यवधान बता रही है। जाहिर है कि इन स्थितियों में शेयर बाजार कमजोर हो गए हैं और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर अवमूल्यन का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है। भारत कच्चे तेल की अपनी कुल जरूरत का 85 फीसदी से अधिक और प्राकृतिक गैस की जरूरत का 40 फीसदी से अधिक आयात करता है। लिहाजा, इन स्थितियों का हम पर असर होना लाजिमी है।


लेकिन, इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। घरेलू मांग में मजबूती के चलते 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है। केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि शहरी व ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में उच्च खपत, रिकॉर्ड कृषि उत्पादन और मजबूत ऑटोमोबाइल बिक्री को देखते हुए आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के संकेत ही मिल रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कुछ चिंताएं जरूर जताई गई हैं, जो जनवरी की तुलना में फरवरी में बढ़ी तो है ही, ईंधन आपूर्ति में व्यवधान के चलते इसमें और बढ़ोतरी की आशंका भी पैदा हो गई है।

गनीमत है कि सरकारी खर्च पर नियंत्रण और केंद्रीय बैंक के उपायों की वजह से अर्थव्यवस्था फिलहाल पर्याप्त तरल बनी हुई है, लेकिन इस सच से भी आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं कि वित्तीय बाजार वैश्विक झटकों से अछूते नहीं रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो के बहिर्वाह के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा है, तो व्यापार घाटे में बढ़ोतरी से देश का चालू खाता घाटा भी कुछ बढ़ा है। अच्छी बात यह है कि इन हालात में भी भारतीय रिजर्व बैंक साफ तौर पर कह रहा है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से बचाव के लिए पर्याप्त है, जो एक हद तक व्यापक आर्थिक स्थिरता का ही प्रमाण है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट का संकेत यही है कि खतरे मौजूद हैं, लेकिन देश में उनसे निपटने की क्षमता भी विकसित हुई है। जरूरत इसकी है कि इस क्षमता को और मजबूत बनाया जाए, तभी भविष्य में हम एक अधिक स्थिर व आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाने जा सकेंगे।
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