{"_id":"ad2f4827bce8f2fc661c369cf283453f","slug":"prevent-means-do-that-work","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोकने का मतलब है...करते रहो ","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
रोकने का मतलब है...करते रहो
प्रकाश पुरोहित
Updated Thu, 17 Jul 2014 07:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोई भी दल सत्ता में इसीलिए आना चाहता है न...कि विपक्ष में रहते हुए उसके कार्यकर्ता कुछ करने लायक नहीं रह जाते। पांच साल की गारंटी हो, तो फिर भी कोई बात नहीं, मगर हमारे यहां तो वर्षों बाद सत्ता पलटी है। इस पर भी हाई कमान कह रहा है कि ट्रैफिक नियम का पालन करो, पुलिस थाने मत जाओ, विधायक की चिट्ठी का उपयोग मत करो, न सिफारिश करो, न सिफारिश करवाओ, तो क्या करें...! वैसे ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें, जैसे अब तक बैठे हुए थे? यदि कुछ नहीं करने देना है, तो हमारी सरकार होने का क्या मतलब है?
विज्ञापन
समाज में, शहर में और प्रदेश में साख इसी से बनती है कि आप कितने गलत काम, सही-सही दस्तखत से करवा लेते हैं। यदि सारी हिदायतें मान लीं, तो दंड-कमंडल लेकर जंगल में निकल जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। यदि मोहल्ले का कोई व्यक्ति थाने में बंद है, तो अच्छा लगता है कि मंत्री के कद का कोई नेता थाने पर आए और उसे छुड़वाए।
विज्ञापन
अब मुख्यमंत्री के ही भाई-भतीजे का मामला लें! कितनी भद्द पिटी कि उन्हें खुद थाने जाना पड़ा! यह काम तो उस इलाके का कोई भी नेता करवा सकता था। लेकिन सीएम खुद ही पहुंच गए और चारों ओर खबर फैल गई।
विज्ञापन
ऐसे-कैसे काम कर सकेंगे हम लोग...? हाथ-पैर बांध दिए हैं हमारे तो? कार्यकर्ता ने नेता से पूछा।
कुछ नहीं! आप लोग सत्ता में नए आए हो, इसलिए आपको पता नहीं कि आप क्या-क्या कर सकते हैं। इसे यों भी ले सकते हैं कि हाई कमान ने रोकने के बहाने यह बताने का प्रयास किया है कि आप ये... ये...काम भी कर सकते हैं। जब मुख्यमंत्री को खुद हर जगह पहुंचना पड़ रहा है, तो समझने वाली बात है कि कार्यकर्ताओं ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं समझी है। जब पार्टी सीख देती है, तो मतलब यही होता है कि ये सारे काम आप कर सकते हैं।
जाओ...अपना काम करो, घाघ नेता ने बताया, तो कार्यकर्ता एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। ‘हुर्रेऽऽऽ’ भी नहीं निकला उनके मुंह से!