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Pakistan: नवाज शरीफ की वापसी के लिए इमरान को 'वनवास' भेजने की तैयारी
Sat, 01 Jul 2023 07:37 AM IST
शिव शरण शुक्ला
के एस तोमर
के एस तोमर
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 01 Jul 2023 07:37 AM IST
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इमरान खान, नवाज शरीफ
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
उथल-पुथल से जूझ रहे पाकिस्तान में हाल ही नेशनल एसेंबली ने एक विधेयक पारित किया है, जिसमें किसी भी सांसद की अयोग्यता की अवधि को आजीवन से घटाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की राष्ट्रीय राजनीति में वापसी का रास्ता साफ हो गया है, जिन्हें वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जीवन भर के लिए अयोग्य ठहरा दिया था।
उधर अपनी श्रेष्ठता स्थापित करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया, जो कथित तौर पर नौ मई को दंगाइयों को सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ करने से नहीं रोक पाने के लिए जिम्मेदार थे। सैन्य अधिकारियों ने इमरान खान और उनके समर्थकों के खिलाफ सैन्य अधिनियम के तहत मुकदमा भी चलाया है, जिसका पाकिस्तान में राजनीतिक असर हो सकता है।
खबरों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इमरान खान को चुनावी मैदान से बाहर रखने पर तुले हुए हैं, इसलिए उन्हें या तो जेल भेजा जा सकता है या चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इमरान समर्थक प्रधान न्यायाधीश उमर अता बांदियाल 16 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगे, और नए प्रधान न्यायाधीश काजी फैज इशा 17 सितंबर को कार्यभार संभालेंगे, जिससे शरीफ सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच जारी मौजूदा टकराव खत्म हो जाएगा, क्योंकि नए प्रधान न्यायाधीश को निष्पक्ष माना जाता है। यह इमरान खान के लिए बुरी खबर हो सकती है, जिन्हें बांदियाल का काफी समर्थन मिला।
प्रधानमंत्री शरीफ इमरान खान के खिलाफ 'भारतीय कार्ड' का खूब इस्तेमाल करते हैं, जो नवाज शरीफ की वापसी के बाद और तेज हो सकता है। और यह इमरान के लिए घातक हो सकता है, क्योंकि इसका उद्देश्य इमरान की पीटीआई को खत्म करना है। इमरान खान ने जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना से भी सीधे टकराव मोल लिया है। भारतीय कार्ड आम लोगों को इमरान खान से दूर कर सकता है। शरीफ बंधु और पाकिस्तान की सरकार इमरान को सबक सिखाना चाहते हैं, इसलिए वे भारतीय मीडिया में छपी उनकी तारीफों का उदाहरण दे रहे हैं। प्रधानमंत्री शरीफ ने नौ मई की हिंसा की तुलना आतंकवादी कार्रवाई से की है, जो इमरान के सियासी करियर के अंत की शुरुआत हो सकती है, और उनका जीवन भी खतरे में पड़ सकता है। शरीफ सरकार इमरान की पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। भारतीय कार्ड का विश्लेषण करते हुए पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर कहते हैं, इससे पहले भी कई नेताओं को भारत का एजेंट बताया गया था। उन्होंने कहा, अयूब खान ने कभी मोहम्मद अली जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना को और याहया खान ने शेख मुजीबुर रहमान को भारतीय एजेंट बताया था।
अब एक नए प्रचार ने पीटीआई के कई नेताओं की कमर तोड़ दी है, जिनमें से कुछ नेता पार्टी ही नहीं, राजनीति भी छोड़ रहे हैं। भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त मेजर गौरव आर्य के ट्वीट के आधार पर कहा जा रहा है कि इमरान खान भारत को खुश करने के लिए काम कर रहे हैं। सैन्य अदालतों ने इमरान खान एवं उनके समर्थकों के खिलाफ ऑफिसियल सेक्रेट एक्ट, 1952 के तहत मुकदमा शुरू किया है, जिसमें मृत्युदंड एवं आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। 'लोगों के रक्षक' के रूप में सेना की प्रतिष्ठा दांव पर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य प्रमुख की सख्त कार्रवाई का उद्देश्य यह संकेत देना हो सकता है कि अब भी सेना की शक्ति में कोई गिरावट नहीं आई है, और वही पाकिस्तान के मामलों में सर्वोच्च है। पाकिस्तानी सेना ने तीन बार तख्तापलट करके मुल्क का शासन अपने हाथों में लिया है। सेना ने घरेलू राजनीति और विदेशी मामलों में अपना दबदबा कायम किया और खुद को आम लोगों के 'उद्धारकर्ता' के रूप में पेश किया। लेकिन इमरान खान ने सेना को चुनौती दी और जब वह प्रधानमंत्री थे, तो जनरलों के तबादलों और पोस्टिंग में हस्तक्षेप किया, जिससे शीर्ष जनरलों के साथ उनका टकराव हुआ। इमरान खान ने वर्तमान सेना प्रमुख मुनीर को आईएसआई प्रमुख के पद से हटाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी और जनरल कमर बाजवा के साथ भी उनके गंभीर मतभेद हो गए थे। इमरान और उनके समर्थकों के खिलाफ सैन्य अदालत में मुकदमा चलाने का फैसला इसलिए लिया गया, ताकि सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य अदालत उन लोगों को राहत न दे सके, जिन्हें सैन्य अदालतों द्वारा सजा सुनाई जाएगी। लेकिन पाकिस्तान में उथल-पुथल भारत के हित में नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि सेना का नागरिक प्रशासन में अपना वर्चस्व फिर से स्थापित करना निश्चित है। और सैन्य नियंत्रण का मतलब होगा कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों में वृद्धि, क्योंकि आईएसआई अपने फायदे के लिए प्रतिशोध की भावना से ऐसा कर सकती है।
शरीफ सरकार का सुप्रीम कोर्ट एवं राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से सीधा टकराव है, जो इमरान समर्थक और पीटीआई के पूर्व कार्यकर्ता रहे हैं, इससे पाकिस्तान में लोकतंत्र के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है। शरीफ सरकार ने प्रधान न्यायाधीश पर सीधे हमला किया और संसद में कानून पारित कर उनसे शक्तियां छीन लीं। शरीफ सरकार ने उन्हें इमरान समर्थक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने से इन्कार कर दिया। राष्ट्रपति अल्वी ने संसद द्वारा पारित विधेयक को रोक दिया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पाकिस्तान में मौजूदा उथल-पुथल निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था के पतन की प्रक्रिया को तेज कर सकती है, खासकर तब, जब विश्व बैंक 1.1 अरब डॉलर के 'बेल आउट पैकेज' में देरी कर रहा है, जो मुख्यतः सख्त पूर्व शर्तों के कारण है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 4.3 अरब डॉलर तक गिर गया है, जो फरवरी, 2014 के बाद सबसे निचला स्तर है। शरीफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर बताया कि उसके पास पंजाब चुनाव कराने के लिए धन नहीं है, जो उसके दिवालिएपन को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में मुख्य भूमिका में सेना की वापसी लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए खतरनाक हो सकती है और मौजूदा उथल-पुथल देश को मार्शल लॉ या गृहयुद्ध की ओर धकेल सकती है, जिसका श्रेय मुल्क के राजनेताओं की अदूरदर्शिता और आत्म-केंद्रित दृष्टिकोण को दिया जा सकता है।