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आधी आबादी: मन की बात में स्त्री शक्ति, प्रेरित करती हैं सफलता की कहानियां

Sat, 29 Apr 2023 07:10 AM IST
archna singh अर्चना सिंह
Updated Sat, 29 Apr 2023 07:10 AM IST
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सार
प्रधानमंत्री मन की बात  में अक्सर नारी शक्ति व महिला विकास की बात करते हैं और सुदूर गांव की संघर्षशील महिलाओं को प्रेरित करते हैं।
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pm modi mann ki baat Nari Shakti inspiring success stories social issues
पीएम मोदी-मन की बात - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात सौ एपिसोड पूरे करने जा रहा है। तीन अक्तूबर, 2014 से यह कार्यक्रम लगातार हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है। विशेष परिघटनाओं के साथ सामाजिक मुद्दों व दैनंदिन जीवन की छोटी-छोटी घटनाएं, सफलता की कहानियां भी इसका हिस्सा बनती हैं।



प्रधानमंत्री मोदी मन की बात को जनता से द्विपक्षीय संवाद का एक माध्यम मानते हैं, जिसमें वह जनता से अपनी योजनाओं, विचार व कार्यक्रम के बारे में ही बात न करके, जनता की बातें और विचार भी साझा करते हैं। मोदी मन की बात में अक्सर नारी शक्ति व महिला विकास की बात करते हैं। वह भारतीय संस्कृति में स्त्री के सम्मान की लंबी परंपरा की बार-बार याद दिलाते हैं। बीते 26 मार्च को 99वें एपिसोड में उन्होंने कहा था कि भारत का जो सामर्थ्य नए सिरे से निखर कर सामने आ रहा है, उसमें बहुत बड़ी भूमिका नारी शक्ति की है।


हैरानी होती है, जब किसी सुदूर गांव की अदृश्य महिला के छोटे-छोटे प्रयास की सराहना प्रधानमंत्री मन की बात में करते हैं, जिससे आस-पास के लोग भी अनजान रहते हैं। उस महिला को भी यकीन नहीं होता है कि प्रधानमंत्री ने उनका नाम लिया। यह संवाद, महिलाओं को जानकारी देता है, प्रभाव डालता है, उन्हें लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है, जोड़ता है और सशक्त करता है। यह सशक्तीकरण उन्हें उपलब्ध रास्तों को देखने और चुनने की क्षमता देता है। यह संवाद कमजोर तबकों, स्त्रियों के लिए शक्तिवर्धक औषधि के रूप में काम करता है।

महिलाओं का मानना है कि सफलता की कहानियां, उनके प्रयासों व सफलताओं को दृश्य बनाती हैं। इससे बाह्य जगत में उनके लिए एक सम्मान जनक अस्मिता का निर्माण होता है। यह संवाद महिलाओं के कार्यों को नए संदर्भ से देखता है, नए अर्थ खोजता है। इसी प्रक्रिया में महिलाएं भी संगठित होकर अपने अर्थ खोजती है, अधिकार व संसाधनों पर दावा जताती हैं और उन्हें अपनी महिला साथियों तक प्रसारित करती हैं। फूलपुर, प्रयागराज की पल्लवी परमार की चर्चा प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में की, जो एनआरएलएम की सहायता से चप्पल बनाने का कार्य कर रही है। वह आसपास की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मोदी जी कहते हैं कि ये महिलाएं चप्पल बनाने के व्यवसाय के साथ ही पांव से असहायता के भाव के कांटे को निकाल फेंक रही हैं।

पल्लवी बताती है कि मन की बात में उसकी चर्चा के बाद से लोग अपने घरों की महिलाओं को उसके साथ काम करने के लिए भेजने लगे हैं। पहले महिलाओं को इकट्ठा करना बहुत कठिन होता था। प्रधानमंत्री मन की बात में लगातार बेटियों के प्रति सजगता और संवेदनशीलता की बात करते रहते हैं। कार्यक्रम में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात होती है और अलग-अलग रास्तों से, अलग-अलग क्षेत्रों से इस कार्यक्रम को सुदृढ़ करने के प्रयास की चर्चा होती है।

मातृशक्ति की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पद्मश्री बसन्ती देवी की चर्चा करते हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सराहनीय कार्य किया है। मोदी कहते हैं कि एक ओर लखीमपुर खीरी में महिलाएं केले के तने से फाइबर बना रही हैं, दूसरी ओर कर्नाटक के उत्तर और दक्षिण कन्नड़ जिले में महिलाएं केले के आटे से डोसा, गुलाब जामुन बना रही हैं। मन की बात में चर्चा होने से इन प्रयासों को पंख मिले हैं, प्रतिष्ठा मिली है। प्रतिदिन जीवन में संघर्ष कर रही महिलाओं के साथ ही वह लोपमुद्रा, गार्गी व मैत्रेयी की चर्चा भी करते रहते हैं। साथ ही, कल्पना चावला, मिताली राज, कैप्टन शालिनी धामी, कैप्टेन शिवा चैहान, लोको पायलट सुरेखा यादव जैसे व्यक्तित्व की चर्चा महिलाओं को प्रेरित करती है।

महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं और देश को आगे ले जाने के साथ इसे अधिक समावेशी बना रही है। इस तरह के संवाद विभिन्न कमजोर समुदाय में आकांक्षाएं जगाते हैं, नेतृत्वकामी परिर्वतन की ओर ले जाते हैं और राज्य व समाज के संबंधों में पारदर्शिता लाने का काम करते हैं।

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