फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Plantation through wind, will get relief from global warming

Plantation: हवा से होता पौधरोपण, ग्लोबल वार्मिंग से मिलेगी राहत

Mon, 19 Sep 2022 08:19 AM IST
O P Joshi ओपी जोशी
Updated Mon, 19 Sep 2022 08:19 AM IST
विज्ञापन
सार
कम समय में सघन पौधरोपण के लिए इसे शहरी एवं सीमित क्षेत्रों के लिए उपयोगी बताया गया है। इस पद्धति में एक सीमित क्षेत्र को भरपूर खाद देकर तैयार किया जाता है एवं फिर बहुत नजदीक पौधे रोपे जाते हैं।
loader
Plantation through wind, will get relief from global warming
plantation - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश-विदेश में सामान्यतः वर्षा के मौसम में पौधरोपण किया जाता है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में इसे पवित्र एवं पुण्य का कार्य बताया गया है। पारंपरिक पौधरोपण में गड्ढा खोदकर, खाद डालकर मनचाहे पौधे लगाए जाते थे। पौधरोपण में गड्ढा खोदने के कठिन कार्य को इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रितुराज टोंग्या ने काफी आसान बना दिया है। उनकी बनाई मशीन से दो लोग एक गड्ढा एक-दो मिनिट में खोद देते हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में इससे 20 हजार गड्ढे खोदे जा चुके हैं। लेकिन गड्ढे खोदने एवं फिर पौधा लगाने के झंझट से बचने के लिए ‘बीज-गेंद’ (सीड-बॉल) विधि भी अपनाई जाने लगी है। यह विधि शहरों के बजाय पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ज्यादा उपयोगी बताई गई है। गेंद में रखे बीज अनुकूल मौसम में अंकुरित हो नए पौधे को जन्म देते हैं। पेड़ कटने के बाद उसकी जगह पर नए पौधे लगाकर उसे बड़ा करने में काफी समय लग जाता है। इसी बात को ध्यान में रखकर जापान के वनस्पति-शास्त्री प्रो. अकीस मिसावाकी ने पौधरोपण की एक नई विधि प्रस्तुत की, जिसे ‘मियाता की पद्धति’कहा गया। 



कम समय में सघन पौधरोपण के लिए इसे शहरी एवं सीमित क्षेत्रों के लिए उपयोगी बताया गया है। इस पद्धति में एक सीमित क्षेत्र को भरपूर खाद देकर तैयार किया जाता है एवं फिर बहुत नजदीक पौधे रोपे जाते हैं। खाद की प्रचुरता होने से पौधों की वृद्धि 10 गुना तेज होती है एवं तीन वर्षो बाद उसके देखभाल की ज्यादा जरूरत नहीं रहती। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने बताया है कि पृथ्वी से लगभग 70 हजार वर्ग किलोमीटर जंगल प्रतिवर्ष समाप्त हो जाते हैं। वनों के खात्मे के साथ बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण एवं कई अन्य विकास कार्यो के चलते ‘ग्लोबल वार्मिंग’ और अन्य जलवायु संकट की समस्या गहराने लगी है। पर आजकल विज्ञान एवं सूचना-प्रौद्योगिकी के विकास के चलते पौधरोपण के कार्य में भी परिवर्तन हुए हैं। वर्ष 1990 के आसपास अमेरिकी ‘मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (एमआईटी) के प्रो. मोशे अलमाटो ने हवाई जहाज से जमीन पर पौधों की बमबारी की योजना बनाई। इसके पीछे विचार यही था कि इससे पौधरोपण तेज गति से होगा, पेड़ जल्दी विकसित होंगे एवं ‘ग्लोबल वार्मिंग’ से कुछ राहत मिलेगी।


पौधों की बमबारी हेतु 9-10 इंच लंबे बायोडिग्रेडेबल पदार्थ के कोन या कनस्तर तैयार कर उसमें मिट्टी, खाद एवं पौधे रखे गए। नमी के कारण इन कनस्तरों का नुकीला भाग जमीन में धंस जाता है। एक बार की उड़ान से एक लाख पौधों के रोपण की संभावना बताई गई। इस्राइल के रेगिस्तान एवं यूरोप की कुछ पहाड़ियों पर इस विधि से पौधे रोपे गए। बाद में इस काम के लिए लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टरों और अब ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। ड्रोन का कार्य एवं नियंत्रण हवाई-जहाज एवं हेलिकॉप्टर की तुलना में काफी सरल होता है। जिन क्षेत्रों में इंसान की पहुंच आसान नहीं है, वहां यह काफी उपयोगी है। हमारे देश में तेलंगाना स्थित ‘मारुति ड्रोन्स टेक लिमिटेड’ ने हरा-भरा अभियान शुरू किया है। इसके तहत ‘स्पीड कॉप्टर ड्रोन’ से पौधरोपण किया जाएगा। वहां स्थित ‘केबीआर पार्क’ में यह कार्य सफलता-पूर्वक किया गया है। इस अभियान को वहां के 33 जिलों में चलाए जाने की तैयारी है। इसके अलावा, जबलपुर (मध्य प्रदेश) स्थित ‘ज्ञान गंगा निजी इंजीनियरिंग कॉलेज’ के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं कंप्यूटर विज्ञान के विद्यार्थियों ने मिलकर ‘ग्रीन रोबोट’ तैयार किया है। बैटरी एवं मोबाइल ऐप से संचालित यह रोबोट एक बार में 2,000 पौधे लगा सकता है। यह इंटरनेट से कमांड देने पर बताई जगह पर जाकर पौधरोपण करता है।

‘जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय’ के तहत संचालित ‘राष्ट्रीय विकास योजना’ में देश भर से आए 30 प्रोजेक्ट में इसका चयन पिछले वर्ष किया गया है। विज्ञान की विकसित तकनीकों का उपयोग कर हम तेजी से पौधरोपण करके  ‘ग्लोबल वार्मिंग’ एवं अन्य जलवायु समस्याओं से थोड़ी निजात प्राप्त कर लें, परंतु ऐसे में पेड़ों से हमारा भावनात्मक लगाव शायद कम हो जाएगा। (सप्रेस)
 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed