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मानवाधिकार पर घिरता पाकिस्तान

Tue, 14 Nov 2017 10:37 AM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Tue, 14 Nov 2017 10:37 AM IST
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Pakistan suffers human rights
कुलदीप तलवार
मेरिका के प्रभावशाली सांसद ब्रैंड शर्मन ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन पर अपनी चिंता जाहिर की है। पिछले एक साल में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यमून राइट वाच और विदेश विभाग की रिपोर्ट में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर पाकिस्तान और उसमें भी सिंध में लोगों के लापता होने पर गंभीर चिंता जताई गई है। शर्मन ने कहा है कि इस तरह से मानवाधिकारों के उल्लंघन को अनुत्तरित नहीं किया जा सकता। ऐसे ही पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हजारों बलूच नागरिकों के लापता होने की समस्या गंभीर बनी हुई है। पिछले कई वर्षों से उनका कुछ अता-पता नहीं लग रहा। इसके पीछे पाक सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया जा रहा है। 

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सिंध की राजधानी कराची की सड़कों पर हाल ही में एक ऐसा जूलूस निकला, जिसमें हजारों लोग सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे और सरकार से अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश कर उन्हें सामने लाने की मांग कर रहे थे। उस जूलूस में बूढ़े मां-बाप अपने बेटों की तस्वीरें उठाए हुए थे, जिन्हें खुफिया एजेंसियों ने गिरफ्तार किया और जिनका आज तक कोई पता नहीं चला। सिंध में कुछ अरसा पहले ही यह सिलसिला शुरू हुआ कि मुखबिरों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर युवाओं को खुफिया एजेंसियों के लोग पूछताछ करने के नाम पर उठा कर ले गए,  फिर उनका कुछ पता न चला। उन लापता युवकों का अपराध केवल इतना था कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे। लापता होने वालों में कई ब्लॉगर भी शामिल हैं। पाक मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष असमा जहांगीर के मुताबिक, उदार सोच रखने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। गायब होने वालों में कुछ छात्र थे, जिन्हें यूनिवर्सिटी के गेट से ही उठा लिया गया और कुछ ऐसे डॉक्टर थे, जिनको उनके क्लिनिक से बुलाकर ले जाया गया ओर फिर उनकी कोई खबर नहीं मिली। काबिले गौर है कि सबसे पहले कबाइली क्षेत्र से पठानों, मुहाजिरों की संस्था एमक्यूएम के सक्रिय कार्यकर्ताओं और कादियान को उठाया गया और अब शिया और सूफी संप्रदाय के लोगों व अल्पसंख्यक ईसाइयों व हिंदुओं को उठाया जा रहा है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में तो लापता लोगों की समस्या पिछले कई वर्षों से चिंताजनक बनी हुई है। वहां लगभग 35,000 लापता लोगों का अता-पता नहीं चल रहा। ये वे लोग थे, जो बलूचिस्तान की आजादी की मांग कर रहे थे। पाक सरकार ऐसे लोगों को राष्ट्रवादी न मानकर विद्रोही मानती है। इस्लामाबाद ने पिछले दिनों ऐसे 90 बलूचियों को जिंदा या मुर्दा लाने वालों को इनाम देने की घोषणा की थी। सरकार को आशंका है कि अगर उनको न पकड़ा गया, तो वे आर्थिक गलियारे को, जिसे चीन बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ना चाहता है,  अमल में लाने में बाधक बनेंगे। सिंध और बलूचिस्तान के लापता लोगों के रिश्तेदारों की पीड़ा सरहद पार कर अमेरिका व विदेश के कई शहरों में पहुंच गई है। 

बलूची-सिंधी और बुद्धिजीवी प्रदर्शन कर व पोस्टरों के जरिये विश्व समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर दखलअंदाजी की अपेक्षा कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं और प्रभावशाली देशों को इसका सख्ती से नोटिस लेकर पाकिस्तान में लापता लोगों को सामने लाने के लिए इस्लामाबाद पर जबर्दस्त दबाव बनाना चाहिए। यह एक गंभीर मानवीय समस्या है, जिसका निवारण जरूरी है।
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