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अब दिखने लगी है बदलते भारत की तस्वीर
राजीव चंद्रशेखर
Updated Sun, 24 May 2015 03:28 PM IST
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यह रिपोर्ट कार्ड का मौसम है! माता-पिता जहां घबराहट के साथ अपने बच्चों के रिपोर्ट्स कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं दिल्ली में भी कुछ ऐसा ही माहौल है। विशेषज्ञों, और विश्लेषकों ने अपने-अपने रिपोर्ट्स कार्ड जारी किए हैं। पिछले एक दशक में कुछ भी सार्थक न कर सकने वाले एक राजनीतिक ने तो आश्चर्यजनक तरीके से दस में से शून्य अंक तक दे दिए हैं!
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दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में लोगों ने परिवर्तन और विकास के लिए निर्णायक जनादेश दिया था। इसका यह मतलब भी है कि लोगों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी अपेक्षाएं रहीं। नुक्ताचीनी के बीच, कह सकते हैं कि सरकार और राजनीति को बदल डालने वाले विचार पर निवेश करने वाले लाखों भारतीयों के लिए खुश होने की कई वजहें हैं। जिन लोगों ने निवेश और अर्थव्यवस्था पर अपना ध्यान केंद्रित कर रखा है, वे देख सकते हैं कि इस दिशा में काफी कुछ हुआ है। जो लोग अत्यंत तेजी से बदलाव की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें कुछ निराशा हो सकती है, क्योंकि उनकी उम्मीदें आसमान छूने जैसी थीं।
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सबसे बड़ा बदलाव सरकार के कामकाज की गति और इरादे में दिखता है। कई क्षेत्रों में यह कहीं अधिक क्षमतावान और पारदर्शी हुई है। मोदी सरकार ने अपना ध्यान प्रशासनिक क्षमता और पारदर्शिता पर केंद्रित किया है, जिसे महसूस किया जा सकता है। भारी उम्मीदों के बोझ और यूपीए से एक वर्ष पूर्व विरासत में मिली जर्जर अर्थव्यवस्था, भ्रष्ट प्रशासनिक ढांचे, और निवेशकों के अविश्वास के बीच मोदी ने पूरी ऊर्जा के साथ चुनौतियों का सामना किया है। अपने बजट के जरिये सरकार ने अर्थव्यवस्था और वित्तीय परिस्थितियों की कमजोरियों को नियंत्रित किया है। भारतीयों को आतंकित और परेशान कर देने वाले घोटाले और भ्रष्टाचार सुनाई नहीं पड़ रहे हैं। स्पेक्ट्रम और कोयला जैसी सार्वजनिक संपदा को नीलामी के लिए प्रस्तुत किया गया है। सरकार की नीतियों के स्तर पर बुनियादी बदलाव दिखता है। सरकार की नीतियों का लाभ कॉरपोरेट या निहित स्वार्थी तत्वों के बजाय सीधे जनता तक पहुंच रहा है। और पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि यूपीए सरकार के समय फले-फूले मिलीभगत वाले पूंजीवाद को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है। वैश्विक निवेशक धीरे-धीरे ही सही, आ रहे हैं। इससे साफ-सुथरा कारोबारी ढांचा बनाने में मदद मिली है, जिसमें हर किसी के लिए कारोबार करना आसान होता जा रहा है। जबकि पिछले कुछ वर्षों में सिर्फ राजनीतिक वर्ग से संपर्क रखने वाले लोगों को ही यह सुविधा हासिल थी।
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हालांकि अब भी कुछ ऐसे लोग हैं जो बदलाव की गति को लेकर संतुष्ट नहीं हैं, जिनमें कारोबारी समुदाय से जुड़े लोग भी हैं। दरअसल इसके पीछे गहरी भावनाएं हैं। मोदी सरकार का समर्थन करने वाले अनेक लोग चाहते हैं कि पिछले दस वर्ष की जड़ता से एकदम छुटकारा मिल जाए। उन्हें लगता है कि पिछले एक वर्ष में पर्याप्त बदलाव नहीं हुए हैं। इससे यही पता चलता है कि 2014 के जनादेश में लोगों की नरेंद्र मोदी सरकार से किस तरह की अपेक्षाएं थीं। व्यक्तिगत तौर पर मैं मानता हूं कि सरकार, अर्थव्यवस्था और देश में बदलाव की दिशा में काफी कुछ काम हुआ है। इन 12 महीनों के दौरान लिए गए कई फैसलों का आने वाले महीनों और वर्षों में लोगों के जीवन पर प्रभाव दिखेगा। हालांकि मैं यह भी कहना चाहता हूं कि अभी बहुत किया जाना बाकी है। यह भी सच है कि इन 12 महीनों में और भी बहुत कुछ किया जा सकता था। इसके पीछे कुछ मंत्रियों के अहंकारी व्यवहार को जिम्मेदार माना जा सकता है।
लोगों ने 2014 में जिस परिवर्तन के लिए वोट दिया था, उसे इस वर्ष दिखना चाहिए। असल में इस एक वर्ष में मोदी सरकार ने बदलाव के लिए परिस्थितियां बनाईं। अब जरूरी है कि अगले 12 महीनों में सरकार अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखे और निवेश और नौकरियों के लिए जरूरी सुधारों को आगे बढ़ाए। इसके लिए न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के दृष्टिकोण पर अमल की जरूरत होगी। शासन को बदलने में डिजिटल इंडिया कारगर साबित हो सकता है। असल में बहुत कुछ योजनाओं और नीतियों पर अमल पर निर्भर करेगा। गरीबों तक सब्सिडी सीधे पहुंचने से भ्रष्टाचार और लीकेज पर लगाम कसेगी। वृहत ढांचागत सुधारों की जरूरत है, जिसमें निजी पूंजी के साथ ही सार्वजनिक पूंजी और संपत्ति का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल शामिल है। सरकार को लोगों की सहभागिता भी बढ़ाने की जरूरत है।
पिछले छह दशकों में सरकार और अर्थव्यवस्था में जिस तरह की जड़ता आ गई थी, उस यथास्थिति से उबरना बड़ी चुनौती है। इसके लिए दृढ़ निश्चय, धैर्य और मजबूत सरकार की जरूरत है। जॉन एफ कैनेडी ने कहा था कि इस विश्व की समस्याओं का समाधान संशयवादियों और कुटिलतावादियों के पास नहीं हो सकता, जिनका नजरिया बहुत संकीर्ण होता है। हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता है, जो असंभव लगने वाले सपने देख सकें और उन्हें हकीकत में बदल सकें।