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जड़ों से जुड़े चीन में नया साल

Tue, 04 Feb 2014 06:32 PM IST
अनिल आजाद पांडेय
अनिल आजाद पांडेय Updated Tue, 04 Feb 2014 06:32 PM IST
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New year fest of china

पड़ोसी देश चीन में इन दिनों उत्सव का माहौल है। पश्चिमी देशों में क्रिसमस को लेकर जो उत्साह होता है, उससे कहीं अधिक उमंग और जोश चीनी लोगों में नए साल यानी वसंत त्योहार में दिखता है। चीनियों के लिए यह अवसर इतना खास है कि दफ्तरों में सप्ताह से पंद्रह दिन की छुट्टियां हो जाती हैं। बीजिंग और शंघाई जैसे शहरों में भीड़ नहीं दिखती है, क्योंकि अधिकांश लोग छुट्टियां मनाने अपने पैतृक शहर या गांव चले जाते हैं।

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तीन-चार दिन में ही ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की तादाद लगभग 26 करोड़ पहुंच चुकी है, जबकि हवाई मार्ग और सड़क से यात्रा करने वालों की संख्या भी करोड़ों में है। आजकल यहां टिकट खरीदना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी से जुड़ा एक चुटकुला भी बड़ा लोकप्रिय हो रहा है। जो कुछ इस तरह है, ‘एक व्यक्ति ने देवता के बहुत काम किए। देवता ने उसे धन्यवाद देने के लिए कहा, तुम्हें जो कुछ भी चाहिए, मैं तुम्हें दूंगा। तो उस व्यक्ति ने कहा कि आप मुझे घर जाने का टिकट दिला दीजिए। इस पर देवता बोले, मैं तुम्हें टिकट तो नहीं दिला सकता, लेकिन अपनी पीठ पर बैठाकर जरूर घर पहुंचा सकता हूं!’
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भारत में लगभग हर महीने कोई न कोई त्योहार होता है, इसके उलट चीन में त्योहारों की संख्या काफी कम है। यही वजह है, नए साल को मनाने के लिए लोग उत्साह में डूबे हैं। इस बार वसंत का प्रमुख दिन 31 जनवरी था। यह खुशियां मनाने और पारिवारिक मिलन का बेहतरीन अवसर होता है। इस मौके पर दोस्तों और परिचितों को शुभकामनाएं दी जाती हैं, जिसे चीनी में 'बाय न्यान' कहा जाता है।
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आधुनिक होने के बावजूद चीनियों में परंपरागत तरीके से त्योहारों को मनाने के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। पिछले कुछ वर्षों में देश में तेजी से मध्यवर्ग का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही ऐसे मौकों पर खूब खर्च करने वालों की तादाद भी तेजी से बढ़ी है। इस दौरान मंदिर और पार्कों में मेले लगते हैं, जिसमें ड्रैगन, लॉयन डांस और अन्य लोक-नृत्य सहित कई अन्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन कार्यक्रमों में लाखों लोग जुटते हैं। नव वर्ष के स्वागत पर पिछले कुछ समय तक खूब पटाखे जलते थे, लेकिन अब प्रदूषण से बचने के लिए आतिशबाजी थोड़ी कम हुई है। सरकारी और गैरसरकारी संगठनों की जागरूकता के कारण ऐसा संभव हुआ। इसके अलावा घर के गेट या खिड़कियों पर रंगीन चित्र चिपकाना, सजावट करना और दरवाजे पर लालटेन जलाना भी प्रमुख परंपरा में शामिल है।

चीन एक बड़ा देश है, इसलिए देश के उत्तरी हिस्से से और दक्षिण हिस्से में रिवाज बदल जाते हैं। यह फर्क खानपान में भी दिखता है। इतिहास पर नजर डालें, तो चीनी पंचांग के अनुसार, वसंत त्योहार को नया साल कहा जाता है। बताते हैं कि इस उत्सव को मनाने का सिलसिला करीब चार हजार वर्षों से चला आ रहा है। हालांकि पहले वसंत त्योहार का कोई नाम नहीं था, और इसे मनाने की कोई निश्चित तारीख भी नहीं थी। 2100 ईसवी पूर्व लोगों ने उपग्रह के एक चक्र पूरा करने को ‘स्वेई ’कहा था। जबकि 1000 ईसवी पूर्व इसे ‘नियन ’कहते थे। नियन का अर्थ भरपूर फसल वाला साल होता है। किंवदंती यह भी है कि नियन नामक एक खूंखार राक्षस अक्सर फसलें चौपट कर जाता था, बाद में लोग उसे भगाने के लिए दरवाजे पर लाल रंग की लालटेन आदि का इस्तेमाल करने लगे। यह परंपरा अब तक जारी है।


चीनी पंचांग के अनुसार, वसंत त्योहार जनवरी के अंत से शुरू होकर लगभग तीन सप्ताह तक चलता है। वहीं 15वां दिन नववर्ष में पूर्णिमा का पहला दिन होता है, इसलिए इसका भी बड़ा महत्व होता है। यह त्योहार चीन के अलावा सिंगापुर, मलयेशिया, थाइलैंड सहित दुनिया के अन्य देशों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। चीन में बारह वर्षों का एक चक्र होता है, हर वर्ष एक जानवर के नाम पर निर्धारित होता है। जिसमें चूहा, कुत्ता, मुर्गा, सूअर, ड्रैगन, खरगोश आदि 12 जानवर होते हैं। यह साल घोड़ा वर्ष है, जिसे सुखद माना जा रहा है। हालांकि पिछला साल सांप वर्ष था।

(लेखक बीजिंग रेडियो से जुड़े हैं)

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