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व्यवस्था: जेलों में बढ़ रही हैं गैंगवार और हिंसक घटनाएं, सुधार के लिए जरूरी है ठोस नीति

Sat, 13 May 2023 07:19 AM IST
Rohit Kaushik रोहित कौशिक
Updated Sat, 13 May 2023 07:19 AM IST
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सार
आंतरिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार न हो पाने के कारण जेलों के अंदर हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।
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need of concrete policy for Prison Reforms to tackle Gangwar and violent incidents
तिहाड़ जेल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाल ही में कड़ी सुरक्षा वाली तिहाड़ जेल में बंद सुनील उर्फ टिल्लू ताजपुरिया की जितेंद्र गोगी गिरोह के चार सदस्यों ने हत्या कर दी। टिल्लू की हत्या की जिम्मेदारी उसके विरोधी गैंगस्टर सतविंदर जीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ने ली है। गौरतलब है कि ताजपुरिया पर हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध वसूली सहित गंभीर धाराओं में 11 मामले दर्ज थे। पुलिस द्वारा 2016 में गिरफ्तार किए जाने के बाद से वह तिहाड़ में बंद था। इससे पहले 14 अप्रैल को जेल में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य प्रिंस तेवतिया की एक कैदी से कहा-सुनी के बाद दूसरे गिरोह के सदस्यों ने हत्या कर दी थी।  



पिछले दिनों तिहाड़ जेल में हुई छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन, चाकू, मादक पदार्थ और तार बरामद हुए थे। इसी तरह दिल्ली स्थित मंडोली और रोहिणी जेल से भी कई मोबाइल फोन बरामद हुए थे।


दरअसल देश की विभिन्न जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल और कैदियों को चोरी-छिपे मिलने वाली सुख-सुविधाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। जेलों की आंतरिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार न हो पाने के कारण जेलों के अंदर हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही है। कुछ समय पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जेल सुधार को समय की जरूरत बताते हुए इस दिशा में ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया था।

अपनी एक टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि तिहाड़ की हालत दयनीय है, जो अपराधियों का अड्डा बन गई है और वहां हत्याएं हो रही हैं। जेलों में कैदियों को विभिन्न तरह ही सुविधाएं मिलना दर्शाता है कि जेलों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। दुखद है कि ऐसे अपराधों को बढ़ाने में जेलकर्मी ही सहायक होते हैं।

जेलों में सीसीटीवी लगाई गई है, लेकिन हैरानी की बात है कि सीसीटीवी और जैमर के बावजूद व्यवस्था में चूक हो जाती है। केंद्रीय गृहमंत्री ने भी यह माना है कि कई ऐसे राज्य हैं, जिनमें आज भी अंग्रेजों द्वारा बनाई गई जेल जस की तस हैं। इनका आधुनिकीकरण करने के साथ ही तकनीक से लैस करना, सुरक्षा की दृष्टि से उसे चुस्त-दुरुस्त बनाना और कैदियों के रहने की उचित व्यवस्था करना बहुत जरूरी है। देश की अधिकतर जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। जेलों में अधिक भीड़ होने के कारण जहां कैदियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पातीं, वहीं सुरक्षा व्यवस्था भी चुस्त-दुरुस्त नहीं हो पाती है। पर जब जेलों में विशेष कैदियों को वीआईपी सुविधाएं मिलने लगें, तो केवल जेलों की संरचना और व्यवस्था को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जेलों से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों में भी अपने कर्तव्यों के निर्वहन की समझ होनी चाहिए। केवल व्यवस्था को दोष देकर कर्मचारी और अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकते।

विभिन्न अध्ययनों में अक्सर क्षमता से अधिक कैदियों का होना, कैदियों की मौत, स्टाफ की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ का न होना, वीआईपी कैदियों को मिलने वाली सुविधाएं, जेलों के वातावरण तथा जेलों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। लेकिन व्यावहारिक रूप से इन अध्ययनों का फायदा नहीं दिखाई देता है। तिहाड़ जेल परिसर की कुछ जेलों में हाई सिक्योरिटी वार्ड हैं, जिनमें संगीन और गंभीर मामलों में शामिल अपराधी रखे जाते हैं। पर हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखे जाने के बाद भी गैंगस्टर वारदात की साजिश रचने में सफल हो जाते हैं।

कुछ समय पहले तिहाड़ जेल में कैदियों को गांजा मुहैया कराते हुए कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए एक डॉक्टर को पकड़ा गया था। जेलों की व्यवस्था सुधारने के लिए सरकारी नीतियां अपनी जगह हैं, लेकिन जब तक सरकार जेल कर्मचारियों और अधिकारियों का आचरण सुधारने पर ध्यान नहीं देगी, तब तक कोई लाभ नहीं होगा। कई प्रयासों के बावजूद अभी तक हम शातिर कैदियों को सख्त संदेश नहीं दे पाए हैं। इसके लिए सख्त कार्ययोजना बनानी जरूरी है।

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