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प्रौद्योगिकी: क्वांटम तकनीक से बढ़ेगी भारत की ताकत, डाटा सुरक्षा होगी मजबूत

Tue, 02 May 2023 07:33 AM IST
Nirankar Singh निरंकार सिंह
Updated Tue, 02 May 2023 07:33 AM IST
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सार
नेशनल क्वांटम मिशन को मंजूरी देने के साथ भारत दुनिया का सातवां ऐसा देश बन गया है, जो क्वांटम तकनीक में अनुसंधान व विकास कर रहा है।
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national quantum mission Quantum Technology Quantum Computing research and development in india
Quantum Computing - फोटो : Istock

विस्तार

भारत सहित कई देशों के वैज्ञानिक क्वांटम तकनीक का विकास करने के लिए प्रयासरत हैं। डिजिटल युग में जिसके पास डाटा है, वही शक्तिशाली है। क्वांटम कंप्यूटर डाटा प्रोसेस करने की रफ्तार बहुत अधिक बढ़ा देगा। यह कम जगह में ज्यादा डाटा स्टोर कर सकता है और डाटा प्रोसेस व गणना की तकनीक को अधिक दक्ष बना देगा, जिससे ऊर्जा की खपत भी कम होगी। आज क्वांटम कंप्यूटर को बनाने के लिए अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियां और विभिन्न देशों की सरकारें राष्ट्रीय रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा इसके ऊपर खर्च कर रही हैं। दो हफ्ते पहले भारत सरकार ने भी नेशनल क्वांटम मिशन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारत दुनिया का सातवां ऐसा देश बन गया है, जो क्वांटम तकनीक में अनुसंधान और विकास का कार्य कर रहा है।



केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में 19 अप्रैल, 2023 को 6,003.65 करोड़ रुपये की कुल लागत से 2023-24 से 2030-31 तक के लिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार के अनुसार, इससे वैज्ञानिक और औद्योगिक शोध एवं विकास कार्यों को मदद पहुंचाई जाएगी। फिलहाल, दुनिया में छह देशों के पास इससे जुड़ी तकनीक है, लेकिन ये सभी देश अनुसंधान एवं विकास चरण में हैं। उनमें से किसी ने भी क्वांटम तकनीक पर कोई अनुप्रयोग शुरू नहीं किया है। ऐसे में अब भारत भी इन देशों की बराबरी करने जा रहा है। क्वांटम तकनीक से जानकारी को तेज व सुरक्षित ढंग से उपयोग में लाया जा सकेगा।


क्वांटम टेक्नोलॉजी मिशन का उद्देश्य सुपरकंडक्टिंग और फोटोनिक टेक्नोलॉजी जैसी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके आठ वर्षों में 50-1,000 फिजिकल क्यूबिट्स के साथ इंटरमीडिएट-स्केल क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है। यह मिशन 2,000 किलोमीटर तक इंटर-सिटी क्वांटम के वितरण और मल्टी-नोड क्वांटम नेटवर्क स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। यह मिशन एटॉमिक सिस्टम में उच्च संवेदनशील मैग्नीटोमीटर और अत्यंत सटीक टाइमिंग, संचार और नेविगेशन के लिए एटॉमिक क्लॉक विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

अभी बहुत अधिक आंकड़ों के समूह में से कम समय में कुछ आवश्यक सूचनाएं प्राप्त करना एक बड़ी समस्या है, जिसे पारंपरिक कंप्यूटर की तुलना में क्वांटम कंप्यूटर बहुत ही आसानी से और जल्दी कर सकता है। बैंकिंग तथा सुरक्षा अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाने हेतु कई एनक्रिप्शन सिस्टम का उपयोग पारंपरिक कंप्यूटरों में किया जाता है, जो गणितीय समस्याओं को सुलझाने में एक सीमा के बाद असमर्थ हैं। क्वांटम कंप्यूटर इन कमियों को दूर कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ये वैज्ञानिक अनुसंधानों, खगोलीय अंतरिक्ष मिशनों, डाटा संरक्षण, आदि के लिए उपयोगी हो सकते हैं।    

क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों के अनुसार, क्वांटम तकनीक सूचनाओं की प्रोसेसिंग में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है। सभी सूचनाएं बाइनरी सिस्टम में एनकोड (लिखी जाती) होती है। कुछ साल पहले तक क्वांटम कंप्यूटिंग वैज्ञानिकों के लिए भी एक सैद्धांतिक कल्पना जैसी ही थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में पूरा परिदृश्य ही बदल गया है। इस दिशा में हो रही प्रगति के रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरा क्वांटम कंप्यूटर तो नहीं, पर उसके प्रोसेसर या सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) को बाजार में लॉन्च किया जा चुका है।

क्वांटम तकनीक भविष्य में क्रांति ला सकती है। स्वास्थ्य एवं विज्ञान, सुरक्षा, औषधि निर्माण और औद्योगिक निर्माण जैसे क्षेत्रों में हजारों नई संभावनाएं पैदा होंगी। आने वाले दिनों में इस दिशा में तीव्र प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल सकती है। सरकारों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी रक्षा क्षेत्र में इनका इस्तेमाल करने में है, जैसे कि बेहद सुरक्षित संवाद स्थापित करना या दुश्मन के विमानों का पता लगाना। लेकिन क्वांटम कंप्यूटर को लेकर बड़ी चिंता इसके एनक्रिप्शन कोड को हल करने को लेकर है। अभी तक एनक्रिप्शन कोड को डाटा सुरक्षा के लिहाज से विश्वसनीय माना जाता था, जो कि क्वांटम कंप्यूटर द्वारा आसान हो जाएगा।

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