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धर्म की आड़ में बच्चों से खिलवाड़

Wed, 25 Feb 2015 06:01 PM IST
मरिआना बाबर
मरिआना बाबर Updated Wed, 25 Feb 2015 06:01 PM IST
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Messing with children under the guise of religion

इतिहास के गलियारे में धर्म हमेशा संवेदनशील और विवादित मुद्दा रहा है, लेकिन हर धर्म हमेशा प्रेम और शांति की वकालत करता है। इन दिनों इस्लामी आतंकवाद की चर्चा चरम पर है, हालांकि वास्तव में यह इस्लाम के लिए लड़ाई नहीं है, बल्कि असहिष्णुता से जुड़ी है, जो कमजोरों पर सत्ता हासिल करने के लिए लड़ी जा रही है। सवाल उठता है कि दशकों से बेहद खतरनाक होने के बावजूद धार्मिक उपदेश देने वाले, चाहे वे इस्लाम, ईसाइयत या हिंदुत्व से जुड़े हों, कैसे समाज द्वारा उन पर किए जा रहे विश्वास का दुरुपयोग करते हैं। यह अब एक वैश्विक प्रवृत्ति बन गई है।

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बीते दिनों एक मामला सुर्खियों में रहा। ऐसा मामला सभी धर्मों में यदा-कदा सुनने को मिलता है, जिसमें कोई धार्मिक नेता बच्चों के यौन शोषण के लिए गिरफ्तार किया जाता है। यह मामला 75 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल्ला सलीम से संबंधित है, जो शिकागो में इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक एजुकेशन का प्रमुख है। उसी इंस्टीट्यूट में काम करने वाली एक युवती ने जब उनके खिलाफ यौन शोषण की शिकायत की, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। संयोग से कुछ अन्य लड़कियां भी सामने आईं और मामला उजागर होने के बाद बिना डरे उन्होंने बताया कि सलीम अपने साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ अक्सर यौन दुर्व्यवहार करता था।
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इससे पहले एक अन्य मुस्लिम धार्मिक नेता 40 वर्षीय सुलेमान मकनोजिओआ को ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था, जब उसके खिलाफ शिकायत आई कि उसने 11 वर्ष की बच्ची के साथ कुरान पढ़ाते वक्त कई बार छेड़छाड़ की।
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कैथोलिक पादरी भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। वैटिकन में ऐसी ढेरों शिकायतें आई हैं कि कैथोलिक पादरियों ने बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया। धार्मिक हस्तियों द्वारा इस तरह के यौन दुर्व्यवहार, जिसमें बलात्कार भी शामिल है, से बच्चों का मनोबल टूट जाता है।

भारत में भी धार्मिक बाबाओं पर यौन दुर्व्यवहार के आरोपों को भारतीय मीडिया ने उजागर किया है। आसाराम बापू पर आरोप है कि उन्होंने अपने अहमदाबाद आश्रम में एक सोलह वर्षीय युवती के साथ यौन दुर्व्यवहार किया था। पाकिस्तान में तो हालत यह हो गई है कि आज माता-पिता पड़ोस के मौलवी को भी संदेह की नजरों से देखते हैं, जो घरों में बच्चों को कुरान की शिक्षा देने आते हैं। यह एक पुरानी परंपरा है कि स्कूल के बाद बच्चों को अरबी में कुरान पढ़ने की शिक्षा दी जाती है।

इसलिए अतीत के विपरीत ऐसे वक्त में घर के किसी बड़े को करीब बैठे देखना कोई असामान्य बात नहीं है, क्योंकि घरों के भीतर भी ये मौलवी यौन दुर्व्यवहार करना चाहते हैं। संभव है कि ऐसा अतीत में भी होता होगा, लेकिन इसके प्रति जागरूकता का अभाव है और बच्चों को खुलकर अपनी बात कहने के लिए नहीं सिखाया गया। यहां तक कि मदरसों में भी मौलानाओं द्वारा लड़कों एवं लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार रोजमर्रा की घटना है। अगर कोई बच्चा शिकायत करता है, तो बड़े-बुजुर्ग उन्हें परिवार की सम्मान की रक्षा के लिए चुप करा देते हैं। इस काले रहस्य के हजारों मामले देश भर में आलमारियों में बंद रहते हैं। इसलिए समाज अब इस बात के प्रति सचेत हो रहा है कि इन श्रद्धेय माने जाने वाले धार्मिक नेताओं में कुछ भी 'पवित्र' नहीं है और हमारे बच्चे खतरे में हैं।

इसका एक उदाहरण कुछ वर्ष पहले पाकिस्तान में देखने को मिला, जब धर्म, उस्र और जकात मामलों के राज्य मंत्री डॉ. लियाकत हुसैन ने एड्स बढ़ाने में मदरसों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि यह रोग इसलिए फैला, क्योंकि मौलानाओं ने बच्चों के साथ यौन संबंध बनाए। उन्होंने मीडिया को बताया कि एक बार जब उन्होंने बच्चों के यौन शोषण के बारे में सुना, तो कराची में एक मदरसा पर छापा मारा। उसने मीडिया से कहा था, 'कराची में एक मदरसा पर छापे के दौरान मैंने एक मौलवी को अपने छात्र का यौन शोषण करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। इसके बाद एक जांच बिठाई गई।'

पाकिस्तान में हर वर्ष इस तरह के हजारों मामले दर्ज होते हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था की कमजोरी के चलते शायद ही किसी को सजा मिल पाती है। हजारों मामलों की तो रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हो पाती है। कई माता-पिताओं को, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, पुलिस द्वारा मामले को खत्म करने के लिए मजबूर किया जाता है।

इस समय पाकिस्तान में राष्ट्रीय कार्य योजना के जरिये आतंकवाद के उन्मूलन का अभियान चलाया जा रहा है, इसी के साथ मौजूदा मदरसा की संरचना में भी सुधार हो रहा है। मदरसों के भीतर छात्रों की सुरक्षा पर गौर करने और अपनी सुरक्षा के प्रति उनमें जागरूकता लाने के लिए यह अच्छा वक्त है। मदरसों को विदेशी वित्तीय सहायता, पाठ्यक्रम, विदेशी छात्र आदि के बारे में तो बहुत बातें हो रही हैं, लेकिन कोई भी इन शैतानों के बारे में नहीं सोचता, जो निरंतर इन धार्मिक शिक्षण संस्थानों में बने हुए हैं।

अब जब भारत और पाकिस्तान आतंकवाद, जल संकट, पोलियो उन्मूलन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने जैसे साझा मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से दोनों देशों को अपनी भावी पीढ़ियों से संबंधित अनुभवों और उन्हें सुरक्षित करने के उपायों पर हाथ मिलाना चाहिए। इनमें से कई मुद्दों पर दोनों पक्षों की तरफ से गैर-सरकारी स्तर पर बात हो रही है।


माता-पिता या अभिभावकों का अपने बच्चों के प्रति चिंताओं में कोई अंतर नहीं होता, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। विशेष रूप से इस मामले में धर्म को भारत और पाकिस्तान को जोड़ने का काम करना चाहिए।

-लेखिका पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार हैं

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