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ताकि भरोसा बना रहे: नियमों में बदलाव से यात्रियों को राहत... जवाबदेही के लिए डीजीसीए को लेने होंगे और फैसले

Wed, 05 Nov 2025 05:34 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 05 Nov 2025 05:34 AM IST
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सार
डीजीसीए ने हवाई यात्रा की टिकट वापसी प्रक्रिया को अधिक यात्री-अनुकूल बनाने के लिए नियमों में बदलाव का जो प्रस्ताव दिया है, वह लागू होने पर यात्रियों को निस्संदेह राहत देगा। विमानन कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाने तथा यात्रियों का भरोसा जीतने के लिए ऐसे और कदमों की दरकार है।
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maintain trust DGCA regulations Change to provide passengers relief need further decisions for accountability
विमान यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया डीजीसीए (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

भारत के विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई यात्रा की टिकट वापसी की प्रक्रिया को यात्रियों के अधिक अनुकूल, पारदर्शी व कुशल बनाने के लिए नियमों में बदलाव लाने का जो प्रस्ताव दिया है, वह उन यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो विमानन कंपनियों की मनमानी से पहले ही त्रस्त हैं। एक वक्त था, जब हवाई यात्रा को विलासिता से जोड़ा जाता था, लेकिन आर्थिक विकास के साथ ही अब यह आम लोगों का भी पसंदीदा परिवहन बन गया है।



गौरतलब है कि देश में पिछले एक दशक में वाणिज्यिक विमानों की संख्या तकरीबन दोगुनी हुई है, और इसके साथ ही भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2024 में भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर रिकॉर्ड तकरीबन 20 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी। लेकिन, चिंता की बात यह रही है कि जिस तेजी से हवाई यात्रा करने वालों की तादाद बढ़ी है, उसी अनुपात में विमानन कंपनियों की तरफ से मनमानी वसूली भी बढ़ती दिखी है।


एक और बात, फिलहाल देश के हवाई यात्रा बाजार में इंडिगो और एयर इंडिया एयरलाइंस का ही प्रभुत्व दिखता है। विकल्पों का यह अभाव भी कहीं न कहीं विमानन कंपनियों को अपनी मर्जी से किराया वसूलने के लिए प्रोत्साहित करता है। बात यह है कि हवाई किराया सरकार तय नहीं करती, और इसे पूरी तरह से कंपनियों के विवेक पर छोड़ा गया है। डायनामिक फेयर के नाम पर विमानन कंपनियां इसका पूरा फायदा भी उठाती हैं। दरअसल, यह पूरा एल्गोरिदम मांग एवं पूर्ति के फॉर्मूले पर काम करता है। इसमें दिक्कत यह छिपी है कि यात्रा एजेंट एक ही रूट पर बार-बार सर्च करके मांग को कृत्रिम तौर पर बढ़ा भी सकते हैं।

डीजीसीए ने नए नियमों का जो प्रारूप पेश किया है, उसके अनुसार, यात्री द्वारा उड़ान बुक करने के बाद 48 घंटों तक बगैर किसी अतिरिक्त शुल्क के टिकट रद्द या संशोधित कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त 21 कार्यदिवसों के भीतर रिफंड मिलने और ट्रैवल एजेंटों द्वारा बुक किए गए टिकटों के रद्दीकरण के संदर्भ में जो राहतें यात्रियों को दी गई हैं, वे स्वागतयोग्य हैं, लेकिन कुछ और मामले भी हैं।

दिल्ली, मुंबई सरीखे महानगरों को छोड़ दें, तो उड़ानों का विलंबित या रद्द होना बढ़ रहा है। संचालक एयरलाइंस द्वारा मुआवजे का प्रावधान होने के बावजूद उन्हीं की आड़ लेते हुए ये कंपनियां यात्रियों को सुविधाएं देने में जिस तरह से आनाकानी करती हैं, उस पर भी ध्यान देना होगा। फिलहाल डीजीसीए से यही अपेक्षा है कि वह जल्द से जल्द इन नियमों को लागू करे और इनका सख्त अनुपालन भी सुनिश्चित कराए, क्योंकि हवाई यात्रियों को निजी कंपनियों के विवेक पर नहीं छोड़ा जा सकता।

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