{"_id":"fb6305ce-dcb1-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"love-should-aim-of-life","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेम जीवन का ध्येय बनना चाहिए","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
प्रेम जीवन का ध्येय बनना चाहिए
शिवकुमार गोयल
Updated Mon, 24 Jun 2013 03:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान महावीर उद्यान में अशोक वृक्ष के नीचे विराजमान थे। उनके सत्संग और दर्शन के लिए आए अनेक राजा बैठे हुए थे। साधारण परिवारों के श्रद्धालुजन भी उनका दिव्य उपदेश सुनने के लिए लालायित थे।
विज्ञापन
भगवान महावीर ने कहा, पृथ्वी प्रेम का मंदिर है। इसे हिंसा, राग, द्वेष जैसे दुर्गुणों से अपवित्र नहीं करना चाहिए। यह जान लो कि कामनाओं का कभी अंत नहीं होता। एक जन्म में तमाम कामनाओं की पूर्ति असंभव है। अतः कामनाओं पर नियंत्रण अति आवश्यक है।
विज्ञापन
कुछ क्षण रुककर महावीर ने पुनः कहा, यदि सच्चा सुख और शांति चाहते हो, तो निर्बलों और असहायों की सेवा-सहायता करो, इससे बढ़कर श्रेष्ठ कर्म दूसरा नहीं है। प्राणी मात्र का दुख देखकर दुखी होने वाला ही सच्चा मानव है। हिंसक कर्म एवं कूटवाणी से सुख की जगह दुख व अशांति बढ़ती है। प्रेम व अहिंसा से ही संसार को वश में किया जा सकता है। उदार और प्रेमी बनो।
विज्ञापन
प्रेम हमारे जीवन का ध्येय बनना चाहिए। अहिंसा, अपरिग्रह और संयम-इन्हें अपनाने से ही सबका कल्याण होगा। अपरिग्रह, सुख-साधन, संपत्ति और वैभव को मर्यादित करने का सशक्त साधन है। सारे जगत के वैभवों से भी मनुष्य की तृप्ति नहीं हो सकती, यह जान लो। सभी महावीर के अमृत तुल्य उपदेश सुनकर गदगद थे। अनेक लोगों ने उसी समय उनके उपदेशों का पालन करने का संकल्प ले लिया।