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जुगलबंदी चालू आहे

Tue, 30 Apr 2013 09:47 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Tue, 30 Apr 2013 09:47 PM IST
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lok sabha election 2014 and strategies of political parties

साधो, मेरे हाथ में कमल का फूल देखकर आपको ईर्ष्या हो रही है। क्या मैं कमल को प्यार नहीं कर सकता। आप एक साइकिल सवार को इतना गया-गुजरा क्यों मानते हैं कि कमल को लेकर उसके मन में प्यार न पनपे। फूल किसे प्रिय नहीं होते! फिर कमल का तो कहना ही क्या। पुराणों में इस फूल की महिमा गाई गई है।

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यह कितनी बड़ी बात है कि कमल कीचड़ में खिलता है। कमल और कीचड़ का सनातन संग-साथ है। जहां कमल है, वहां कीचड़ होगा ही। इसलिए मैंने कीचड़ से कभी नफरत नहीं की। थोड़ा-बहुत कीचड़ आसपास हो, तो कमल के पैदा होने की संभावना बनी रहती है। कितना अच्छा हो कि हमारे चारों तरफ कमल ही कमल हों। पर इसके लिए हमें बड़ी मात्रा में कीचड़ जमा करना होगा, जिसकी हमारे पास कोई कमी नहीं।
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एक दूसरा दृश्य है कि हमारे पीएम इन वेटिंग को साइकिल भा गई है। लोग कह रहे हैं कि यह बड़ा अटपटा और बेमेल प्यार है। हमारे देश के लोगों के जेहन में सामंतवाद जाने कब से जड़ें जमाए बैठा है। वे साइकिल की सवारी को हेय दृष्टि से देखते हैं।
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पीएम के स्तर का आदमी अगर साइकिल के प्रति हमदर्दी जताने लगे, तो देश कैसे चलेगा। फिर वह रहे आजीवन रथयात्री। पर इस मुल्क के नासमझ नहीं जानते कि आगे सत्ता का गलियारा इतना संकरा है कि उसमें रथ प्रवेश नहीं कर सकता। वहां साइकिल पर चढ़कर ही जाया जा सकता है। इसलिए आगे साइकिल का संग-साथ जरूरी है।

हम अभी साइकिल को दुरुस्त कर रहे हैं। हो सकता है कि यह साइकिल हमें वहां तक पहुंचाने में मदद कर दे। साइकिल वाला भी कह रहा है कि हमें भी साइकिल के हैंडिल को सजाने के लिए फूल की जरूरत पड़ सकती है और वह फूल सिर्फ कमल ही हो सकता है।

उधर लोग चिल्ला रहे हैं कि कमल-नाल इतनी कमजोर हो गई जो वह साइकिल का सहारा ढूंढने लगी है। साइकिल की ओर उसका झुकाव, वे उसकी गरिमा के प्रतिकूल मान रहे हैं। पर ऐसे लोग कमल को कीचड़ में ही धंसा देखते रहना चाहते हैं।


वे नहीं चाहते कि साइकिल का सहारा लेकर सत्ता के मंदिर तक यह पुष्प अपना सफरनामा तय करे। आज कमल का लक्ष्य कुर्सी-देवता के सिर पर चढ़ कर अपने जीवन को धन्य बनाना है। साइकिल भी कमल के सहारे सत्ता की देवी के दरवाजे पर शरण लेने को अपना मकसद मान बैठी है।

आप इस जुगलबंदी से परेशान हैं, तो इसमें कोई क्या कर सकता है।

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