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संयमित जीवन जीने वाला अजेय

Fri, 13 Sep 2013 08:21 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Fri, 13 Sep 2013 08:21 PM IST
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living a regular life is Invincible

भगवान श्रीराम ने राक्षसराज रावण, उसके पुत्रों और सेना का समूल संहार कर दिया। विजय के बाद रावण के भाई विभीषण ने श्रीराम से कहा, रावण अपने अहंकार के सामने किसी को कुछ नहीं समझता था। आपने उसे पराजित कर दुर्लभ विजय प्राप्त की है।

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भगवान श्रीराम ने इस विजय को साधारण बताते हुए कहा, हे सखे विभीषण, रावण पर विजय पाना कोई बड़ी विजय नहीं है। वास्तव में असली विजेता वह है, जो इस संसार रूपी शत्रु को जीत सके। विजय तो उन्हीं की होती है, जो धर्ममय रथ पर सवार होकर दुर्गुणों और दुर्व्यसनों पर विजय प्राप्त करते हैं। संसार के क्लेशों पर विजय प्राप्त करने वाला ही सच्चा विजेता माना जाता है। रावण अपने दुर्गुणों के कारण पराजित हुआ।
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भगवान श्रीराम पूर्व में भी विभीषण से कहा करते थे, केवल काठ के रथ पर आरूढ़ होकर अस्त्र-शस्त्रों के बल पर विजय प्राप्त नहीं की जा सकती। असली विजय के लिए धर्ममय रथ चाहिए। शौर्य और धीरज इस रथ के पहिये होते हैं। विजय के लिए सबसे बड़ी शक्ति सत्य की चाहिए। शूरवीरता सत्याचरण से ही प्राप्त होती है। सत्य, दया, संयम, विवेक ऐसे सद्गुण हैं, जिन्हें धारण करनेवाला सदैव अजेय रहा है।
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भगवान के मुख से धर्म और सत्याचरण का महत्व सुनकर विभीषण कृतकृत्य हो उठे।

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