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दूसरा पहलू: प्रकाश तकनीक ने बदल दी रोग निदान की तस्वीर, लेजर और एलईडी के आविष्कार आसन हुआ रास्ता

Mon, 18 Nov 2024 06:44 AM IST
शुभम कुमार मैथ्यू ग्रिफिथ
मैथ्यू ग्रिफिथ Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 18 Nov 2024 06:44 AM IST
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सार
लेजर और एलईडी के आविष्कार ने लघु प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला के बजाय हमारे बिस्तर के पास या क्लिनिक में संभव बना दिया है। जैसे कि पल्स ऑक्सीमेट्री से ऑक्सीजन का पता लगाया जा सकता है।
 
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Light technology has changed the picture of disease diagnosis, invention of laser and LED has made the way eas
एंडोस्कोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जब आप नजदीकी डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वह आपकी आंखों में रोशनी डालते हैं, रक्त परीक्षण करने और एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसी मेडिकल इमेजिंग करने को कहते हैं। दरअसल, डॉक्टर ने जो सलाह दी हैं, वे प्रकाश पर निर्भर करती हैं। ये कुछ ऑप्टिकल तकनीकें हैं, जिन्होंने हमारे रोग निदान को काफी प्रभावित किया है। पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स द्वारा डॉक्टर मरीजों को प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे बगैर तुरंत बीमारियों के बारे में बताते हैं। 


आपकी आंख के अंदर देखने के लिए डॉक्टर द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली फ्लैशलाइट (जिसे ऑप्थाल्मोस्कोप कहते हैं) की मदद से वह असामान्य रक्त प्रवाह, कॉर्निया की विकृति या ऑप्टिकल डिस्क (आंख के पीछे एक गोल भाग, जहां मस्तिष्क से तंत्रिका का संपर्क शुरू होता है) यानी पुतली के बारे में पता लगा सकते हैं। सूजी हुई पुतली सिर के भीतर बढ़े हुए दबाव का संकेत है, जो सिरदर्द का कारण बनता है। लेजर और एलईडी के आविष्कार ने 


बढ़ते तकनीक से आसन इलाज
लघु प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला के बजाय हमारे बिस्तर के पास या क्लिनिक में संभव बना दिया है। जैसा कि उंगलियों में लगाकर पल्स ऑक्सीमेट्री से पता लगाया जा सकता है कि हमारे रक्त में कितना ऑक्सीजन है। पल्स ऑक्सीमेट्री का उपयोग अस्पतालों और यहां तक कि घरों पर भी हमारे श्वसन और हृदय स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिए किया जाता है।

रक्त की थोड़ी-सी मात्रा की जांच से कई बीमारियों का निदान किया जा सकता है। स्वचालित 'पूर्ण रक्त गणना विश्लेषक' मशीन स्वास्थ्य के सामान्य संकेतकों की जांच करती है। यह मशीन कांच की नली में रखे रक्त नमूनों के माध्यम से प्रकाश की केंद्रित किरणों को निर्देशित करती है। यह रक्त कोशिकाओं की गणना करती है, उनके विशिष्ट प्रकार को निर्धारित भी करती है और हिमोग्लोबिन के स्तर के बारे में बताती है।

इस तकनीक से शरीर के अंदर जाता है प्रकाश
फाइबर-ऑप्टिक तकनीक द्वारा प्रकाश को शरीर के अंदर डाला जाता है। इसका एक सामान्य उदाहरण एंडोस्कोप है। रोग का निदान और उपचार के लिए डॉक्टर सर्जरी के दौरान वीडियो स्क्रीन पर शरीर के अंदर का दृश्य देखने के लिए इस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं। नैनो-टेक्नोलॉजी के विकास के चलते प्रकाश-आधारित उपकरण सामने आ रहे हैं। पहनने योग्य ऑप्टिकल बायोसेंसर घड़ियों, फिंगर रैप आदि में फिट किए जा सकते हैं। यह उपकरण रियल टाइम में पसीने, आंसू और लार के गैर-आक्रामक माप की अनुमति देते हैं।
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