फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Kerala BJP enters Leftist stronghold Modi government social welfare schemes play a major role

राजनीति: वामपंथी दुर्ग में भाजपा की दस्तक, मोदी सरकार की समाज कल्याण योजनाओं की बड़ी भूमिका

Mon, 15 Dec 2025 06:14 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Mon, 15 Dec 2025 06:14 AM IST
विज्ञापन
सार
केरल के स्थानीय निकाय के चुनावी नतीजे जहां सत्तारूढ़ वामपंथी गठबंधन एलडीएफ के लिए खतरे के संकेत हैं, वहीं तिरुवनंतपुरम में भाजपा की शानदार जीत पार्टी का मनोबल बढ़ाने वाली है। भाजपा की यह जीत मोदी सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं की वजह से हुई है।
 
loader
Kerala BJP enters Leftist stronghold Modi government social welfare schemes play a major role
BJP Flag - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केरल में हुए नगर निगम चुनावों के नतीजे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोगों के करीब जाने, मतदाताओं की समस्याओं को समझने, शिकायतों का समाधान करने और गरीब समर्थक योजनाओं का प्रतिफल हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केरल में जमीनी स्तर (बूथ प्रमुख) पर लगातार काम किया। केरल, जिसे भगवान का अपना देश कहा जाता है, के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे वहां के लोगों के मिजाज को दर्शाते हैं, यानी वामपंथी पार्टी के मुख्यमंत्री पी विजयन को  2026 के विधानसभा चुनावों में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।


वामपंथी पार्टी को सबसे बड़ा झटका तिरुवनंतपुरम से लगा, जहां भाजपा के नेतृत्व वाला राजग गठबंधन निगम के चुनाव में आगे निकल गया, जिस पर भाकपा का 45 वर्षों से राज था। केरल में पिछले दस वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के 125 कार्यकर्ताओं की हत्या की गई। पीपल्स फ्रंट ऑफ इंडिया, जो एक हिंदू विरोधी उग्रवादी संगठन है, आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या करता था। इसका सीधा कारण यह था कि आरएसएस ईसाई चर्चों के करीब आ रहा था। केरल के स्थानीय निकाय के चुनाव में तीन प्रमुख धर्मों ने भी अहम भूमिका निभाई। नगर निगम चुनावों में, हिंदू भाजपा के साथ थे, ईसाई कांग्रेस के साथ गए, जबकि मुसलमानों ने पूरी तरह से भाकपा का साथ दिया।


अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के निर्माण ने भाजपा को इसमें मदद पहुंचाई। लेकिन भाकपा हर रोज भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाती थी। गाजा-इस्राइल युद्ध के दौरान भाकपा ने मोदी सरकार पर इस्राइल के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने फलस्तीन संबंधी नीतियों के पक्ष में प्रचार किया। सांसद के तौर पर प्रियंका गांधी फलस्तीन के पक्ष में लिखे बैग के साथ संसद पहुंचीं और इस्राइल विरोधी नारे लगाए। हालांकि कांग्रेस गुटबाजी में फंसी हुई थी। एक गुट दूसरे पर आरोप लगा रहा था। इसके अलावा, राहुल गांधी का वोट चोरी का मुद्दा और भारत जोड़ो यात्रा का भी असर था।

नरेंद्र मोदी सरकार के सामाजिक कल्याण कार्यक्रम गांव-गांव तक पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार ने दस साल तक ग्रामीण विकास पर ध्यान दिया। प्रधानमंत्री का मासिक संबोधन 'मन की बात', अमित शाह की केरल के कोने-कोने में बार-बार यात्रा, 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार से सबक, नतीजों के आधार पर भाजपा को जमीनी स्तर से फिर से खड़ा करना, पोलिंग बूथ एजेंट ढूंढना-इन सबने भाजपा की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की हार के नकारात्मक पहलुओं के कई कारण हो सकते हैं। मुख्य रूप से सबरीमाला मंदिर से सोने की कथित चोरी स्थानीय निकाय चुनावों में एक बड़ा मुद्दा था, जिसका इस्तेमाल विपक्षी पार्टियों (यूडीएफ और भाजपा) ने सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) में नियुक्त लोगों को निशाना बनाने के लिए किया।

सोना चोरी के अलावा, हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ के पिछड़ने के कई अन्य कारण भी हैं-एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा इन्सानों और जानवरों के बीच बढ़ते टकराव का है। केरल की 941 ग्राम पंचायतों में से एक चौथाई को वन्यजीवों के हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसे वामपंथी सरकार प्रभावी ढंग से हल नहीं कर पाई है। उच्च महंगाई दर और जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों ने लोगों में असंतोष पैदा किया, खासकर कम आय वाले कामकाजी परिवारों में। दूसरी तरफ, भाकपा ने मुस्लिम-बहुल इलाकों में अपना समर्थन खो दिया, क्योंकि यह धारणा बनी कि उसने हिंदुत्व एजेंडे के खिलाफ अपना रुख नरम कर लिया है, साथ ही समुदाय से जुड़े कुछ विवादों पर उसकी चुप्पी को भी इसका कारण माना गया।

इन चुनावों में केंद्रीय केरल में ईसाई जनाधार बड़े पैमाने पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की तरफ वापस चला गया। एलडीएफ ने कल्याण और विकास के क्षेत्र में अपनी दस साल की उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया, जो पिछले चुनावों की तरह ज्यादा असरदार साबित नहीं हुआ। इसके उलट, यूडीएफ ने ज्यादा सामंजस्यपूर्ण प्रचार किया, जो कचरा प्रबंधन, भ्रष्टाचार के आरोप और नागरिक सेवाओं जैसे स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित था। पंडालम जैसी कुछ खास नगर पालिकाओं में, एलडीएफ के अंदरूनी झगड़ों ने भी उनकी हार में योगदान दिया। स्थानीय कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर एक पोस्ट में, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को राज्य भर में स्थानीय निकायों में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी, और कहा कि यह अगले केरल विधानसभा चुनावों से पहले एक मजबूत संकेत है। उन्होंने लिखा- 'केरल के स्थानीय स्व-शासन चुनावों में क्या शानदार नतीजे आए! जनादेश साफ है, और राज्य की लोकतांत्रिक भावना साफ झलक रही है।'

ये नतीजे वाकई कांग्रेस के लिए एक बड़ी जीत हंै, जो पिछले 10 वर्षों से विपक्ष में है। पार्टी को चुनाव से पहले कई झटके लगे थे, जिसमें यौन शोषण की शिकायतों और अंदरूनी कलह के कारण पलक्कड़ के विधायक का पार्टी से निष्कासन भी शामिल था। इसके बावजूद, पार्टी ने अपने प्रचार में सबरीमाला सोने की चोरी के मामले पर ध्यान केंद्रित किया। इन नतीजों ने भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन को भी जश्न मनाने का मौका दिया, जो तिरुवनंतपुरम नगर निगम में 101 में से 50 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। निगम से जीते दो निर्दलीय अब प्रशासन का भविष्य तय करेंगे, क्योंकि निगम परिषद बनाने के लिए 51 विधायकों की जरूरत है। इसके साथ ही, भाजपा ने 24 ग्राम पंचायतों में भी जीत हासिल की।

इस चुनाव में 'पिनरई विरोधी' भावना और सत्ता का 'अहंकार' साफ तौर पर देखा गया। पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। भाकपा ने हाल ही में राज्य विधानसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया था, जो लगता है कि मतदाताओं को पसंद नहीं आया, कम से कम स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे तो यही दर्शाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed