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थोड़ा धैर्य रखिए, बदल जाएगा बहुत कुछ
महेश सी पुरोहित
Updated Thu, 10 Jul 2014 10:40 PM IST
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लोकलुभावन घोषणाओं की परंपरा से थोड़ा हटकर मोदी सरकार का पहला बजट भविष्य के लिए एक ढर्रा निर्धारित कर रहा है। इसमें खासकर दीर्घकालीन नीति के तहत कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस किया गया है। हालांकि काले धन की वापसी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर कोई खाका नजर नहीं आता। बजट इन बातों पर मौन है। इसके बावजूद यह विकासोन्मुख है, जिसका प्रभाव अगले पांच वर्षों में नजर आएगा।
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बजट में इस बात का प्रयास है कि जितने संसाधन हैं, उनका ठीक से उपयोग हो। स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में इसकी संभावनाएं दिखती हैं। जहां हमारे पास संसाधनों की कमी है, वहां पीपीपी के जरिये इसे पूरा किया जाए। और जहां पैसा नहीं है, वहां एफडीआई लाने की कोशिश हो, वहां 'बाहर का पैसा और नियंत्रण हमारा' सिद्धांत के तहत काम करें। इसे रक्षा के मामले में देखा जा सकता है, जिसमें 49 फीसदी एफडीआई की पेशकश की गई है, जिससे नियंत्रण भारत का ही रहेगा।
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इसके अलावा खर्च प्रबंधन को ज्यादा सक्षम रखने पर जोर है। बचाया हुआ पैसा हमारा लाभ ही है। सरकार की कर नीति इस मायने में बेहतर है कि जहां हमारे इनपुट की गुंजाइश है, वहां सीमा शुल्क में कमी की गई है। और जहां हमारे उत्पाद को बढ़ाया जा सकता है, वहां उत्पाद कर में कमी की गई है। बजट में कौशल विकास को बढ़ावा देने की बात की गई है।
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सरकार का पूरा जतन इस बात पर है कि पिछली यूपीए सरकार के समय की योजना मनरेगा चालू रहे, लेकिन उसका किसी भी तरह दुरुपयोग नहीं हो। मनरेगा में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे कहा जा रहा था कि सरकार मनरेगा को बंद कर सकती है। लेकिन इसे और व्यवहारिक रूप से सामने लाने की बात कही गई है।
वित मंत्री अरुण जेटली के बजट में कई नई योजनाओं का समावेश दिखता है। गंगा के कल्याण के लिए महत्ती योजना, गंगा घाट का विकास, हिमालय से जुड़े राज्यों के लिए हिमालयन इंस्टीट्यूट और कृषि विश्वविद्यालय जैसे प्रस्ताव उल्लेखनीय है, जिनमें निवेश से दीर्घकालीन हित जुड़े हैं। गंगा की सफाई महज धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी उसका अहम योगदान रहेगा। गौरतलब है कि सरकार वैकल्पिक स्रोतों से बिजली पैदा करने में दिलचस्पी दिखा रही है। इसके लिए पब्लिक बिल्डिंगों की छत को भी उपयोग में लाया जा सकता है। चौतरफा लाभों के लिए एक ऐसा ढांचा खड़ा करने की कोशिश है, जिसमें हम स्मार्ट सिटी, बड़े एयर पोर्ट, ग्रामीण क्षेत्र का शहरीकरण जैसी योजना सहित कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का ग्राफ देखते हैं। बेशक इनका लाभ आज नहीं मिलने वाला, लेकिन इनके फलीभूत होने का बडे़ स्तर पर लाभ मिलेगा।
बड़ा सवाल है कि क्या यह बजट महंगाई पर अंकुश लगाएगा। बढ़ी हुई महंगाई पर तो नहीं कह सकते, पर तैयारियां इसी दिशा में हैं कि महंगाई आगे लपकती हुई न जाए। अच्छा होता, यह बजट काले धन की उगाही के प्रयासों पर कुछ संकेत करता। खासकर तब, जब देश में विदेश से ज्यादा काला धन होने की बात अहम ढंग से उठ रही हो।