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एपस्टीन का दोजख: रोमन सम्राट टिबेरियस के महल और एपस्टीन के आइलैंड के बीच फर्क सिर्फ समय का

Sun, 15 Feb 2026 06:28 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 15 Feb 2026 06:28 AM IST
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सार
तीस ईस्वी में रोमन सम्राट टिबेरियस के इटली में स्थित कैप्री द्वीप पर बने महल और एपस्टीन के लिटिल सेंट जेम्स आइलैंड के बीच का फर्क सिर्फ समय का है, बाकी सब कुछ एक जैसा है। दोनों ही नर्क सिर्फ व्यक्तियों की नहीं, बल्कि सत्ता, हवस और शोषण की भी निर्मम कहानियों के गवाह हैं।
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Jeffrey Epstein Little Saint James Island hell Roman Empire tiberius villa jovis power abuse history
जेफ्री एपस्टीन और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जेफ्री एपस्टीन का हम्माम मनुष्यता का कुंभीपाक है, हेलहोल है। सत्ता से कारोबार तक, धर्म-अध्यात्म से तकनीक तक, विचार से संचार तक बीते 70 वर्षों की कीर्ति कथाएं नायक एपस्टीन के दोजख में सजे हैं। अतीत में, कहीं से तो शुरू हुआ होगा यह नर्क! टाइम मशीन तैयार है। टाइम मशीन हमें ले जा रही है, सीधे 30 ईस्वी, यानी करीब 1994 साल पीछे। अरे, अरे, गलत मत समझिए...यह नीचे जो नीला समंदर सूरज की रोशनी में चमक रहा है, वह कैरेबियन नहीं है और नीचे दिख रहा खूबसूरत द्वीप लिटिल सेंट जेम्स भी नहीं है, जहां 1990 के दशक से 2019 तक जेफ्री एपस्टीन ने आधुनिक इतिहास के सबसे घिनौने शोषण नेटवर्क की मेजबानी की थी। यह 30 ईस्वी है। आप भूमध्य सागर के ऊपर उड़ रहे हैं और नीचे है इटली का कैप्री द्वीप। वह 334 मीटर ऊंचाई पर टायरेनियन सागर को निहारता हुआ विला जोविस, जहां रहता है रोमन सम्राट टिबेरियस। वह चार साल से स्वैच्छिक निर्वासन में है। इस विला की कलंक कथा को सुनने से पहले रोम का चक्कर लगाते हैं। 42 ईसा-पूर्व में क्लॉडियन वंश में जन्मा टिबेरियस जर्मानिया और पैनोनिया में विजयी सेनापति रहा। स्वभाव से सख्त है। टिबेरियस जन्म से ही सत्ता के केंद्र में है, मगर उसे सिंहासन नहीं चाहिए। यह चौथी ईस्वी का दौर है। सम्राट ऑगस्टस ने टिबेरियस को उत्तराधिकारी नहीं चुना। सम्राट ने भरोसा किया गायस और लुसियस पर, मगर वे कम उम्र में ही गुजर गए। एक और दावेदार था, अग्रिप्पा पोस्टुमस, जो अयोग्य निकला और उसे देश से बाहर खदेड़ दिया गया। अब ऑगस्टस ने टिबेरियस को गोद लेकर सह-शासक बना दिया है।


यह 14 ईस्वी है। ऑगस्टस मर चुके हैं और 55 वर्षीय टिबेरियस ने ताज पहन लिया है। टिबेरियस की शुरूआत अच्छी है। रोम के लोग खजाना संभालने, नौसेना की मजबूती और फिजूलखर्ची रोकने के लिए टिबेरियस की तारीफ कर रहे हैं, मगर उसके भीतर क्रूरता और वासनाओं से भरा एक दैत्य भी है, जो इतिहासकारों के ब्योरे से सामने आएगा। यह 26 ईस्वी है। टिबेरियस ने अभूतपूर्व फैसला लिया है। वह रोम से जा रहा है। पहली बार है कि कोई रोमन सम्राट सत्ता में रहते हुए राजधानी छोड़कर स्थायी रूप से एक द्वीप पर बसेगा। औपचारिक कारण बताए गए-उम्र, थकान, स्वास्थ्य या षड्यंत्रों का डर। मगर इतिहास बताएगा कि वह कुछ और ही करने जा रहा था, जिससे ज्यादा घृणित कृत्य फिर 21वीं सदी में होंगे।


यह 27 ईस्वी है। टिबेरियस का विला जोविस बहुमंजिला है। 40 मीटर ऊंचाई है और चाक-चौबंद सुरक्षा है। यह तिलिस्मी महल है, कई स्तरों में बंटा हुआ। हर स्तर का प्रवेश नियंत्रित है। निजी कक्ष इतने अलग-थलग हैं कि बाहर से आवाज पहुंचना लगभग असंभव। गलियारे ऐसे कि निगरानी आसान, पलायन असंभव। यह महल पूरी तरह से निजी अपराधों के लिए डिजाइन किया गया है। किले पर एक सिग्नल टावर है, जिससे धुएं और आग के संकेतों द्वारा रोम और मिसेनम तक संदेश भेजे जाते हैं। प्रवेश केवल कठिन पैदल चढ़ाई से ही संभव था। किले के नीचे खड़ी चट्टानें हैं, जिन्हें इतिहास ‘टिबेरियस लीप’ कहेगा। सजा पाए लोग यहीं झोंके जाएंगे।

टाइम मशीन अब विला जोविस के ऊपर 35,000 फीट की ऊंचाई पर रुकी है। हम इसके अंदर नहीं जाएंगे। आपकी स्क्रीन पर आ रहे हैं टिबेरियस के जीवनीकार सूएटोनियस और इतिहासकार टैसिटस के अवतार। उनसे ही सुनिए कि विला जोविस के भीतर क्या चल रहा है-यह कोई संयोग नहीं है कि टिबेरियस ने रोम छोड़ा और कैप्री चुना। यह पलायन नहीं, बल्कि रणनीति है। कैप्री पर टिबेरियस ने एक समानांतर दुनिया बनाई। रोम में कानून चलता है, मगर कैप्री पर सम्राट टिबेरियस की इच्छा चलती है। रोम में नैतिकता का दिखावा है, कैप्री पर नग्न सत्ता का साम्राज्य है। यही वह क्षण है, जहां सत्ता जवाबदेही से पूरी तरह अलग हो गई। रोमन का सबसे घिनौना अध्याय यहीं खुल रहा है। टिबेरियस ने कैप्री पर बच्चों का एक संगठित यौन-दास नेटवर्क बनाया है। इन्हें दलालों के जरिये पूरे रोमन साम्राज्य से लाया और यौन शोषण के लिए ‘प्रशिक्षित’ किया जाता है। असहमति या रोने पर सजा मिलती है। कुलीन स्त्रियां भी उनका शिकार बनती हैं। एक रोमन महिला मल्लोनिया ने टिबेरियस के अत्याचारों के बाद आत्महत्या कर ली। बच्चों के साथ यौन हिंसा टिबेरियस का शगल है। यह नर्क एक शासक ने निर्मित किया है। रोम की सीनेट जानती है कि कैप्री में टिबेरियस ने क्या नर्क बना रखा है, लेकिन बोल नहीं सकती, क्योंकि प्रेटोरियन गार्ड टिबेरियस के नियंत्रण में हैं। आरोप लगाने का अर्थ है मृत्यु। गवाह गायब हो जाते हैं। सत्ता और भय ने कानून को निगल लिया है।

यह 37 ईस्वी है। टिबेरियस मर चुका है। कुछ कहते हैं कैलिगुला या प्रेटोरियन प्रमुख मैक्रो ने उसका दम घोंट दिया है। मगर रोम को पता है कि सम्राट होकर मरा है, उसे सजा नहीं मिली, दोषी नहीं ठहराया गया। रोम की सड़कों पर भीड़ चिल्ला रही है-टिबेरियस को टाइबर नदी में फेंक दो। सीनेट ने कहा है कि उसे देवता नहीं माना जाएगा। बस इतनी ही सजा है उसके लिए। उसके अवशेष फिर भी शाही मकबरे में रखे जा रहे हैं। उसके पीड़ितों का इतिहास गुमनाम है। टिबेरियस के विला जोविस और एपस्टीन के लिटिल सेंट जेम्स आइलैंड के बीच का फर्क सिर्फ समय का है, बाकी सब कुछ एक जैसा ही है। दोनों ही नर्क सिर्फ व्यक्तियों की नहीं, सत्ता के एक नियम की कहानी है। जब सत्ता निगरानी से मुक्त होती है, सबसे पहले नैतिकता की हत्या होती है और फिर मानवता की। अगर समाज ने समय रहते सत्ता से सवाल पूछना बंद किया, तो हर युग अपना टिबेरियस और एपस्टीन पैदा करेगा।
फिर मिलते हैं अगले सफर पर...
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