आर्थिकी: सामाजिक सुरक्षा के लाभ सबको मिले, निजी क्षेत्र की पेंशन योजनाओं को आकर्षक बनाना जरूरी
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विस्तार
केंद्र सरकार ने 70 साल या उससे अधिक उम्र के सभी वर्गों के लोगों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत उन्हें पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। उम्मीद है कि इससे 4.5 करोड़ परिवारों को फायदा होगा। इसी तरह केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को मंजूरी दी है। देश के करीब 57 करोड़ के श्रमबल में से तीन फीसदी से भी कम सरकारी क्षेत्र के कर्मचारी यूपीएस से लाभान्वित हुए हैं। लेकिन निजी और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के सामने वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के अलावा संगठित निजी क्षेत्र व असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी पेंशन की कुछ व्यवस्थाएं है, लेकिन वे अपर्याप्त हैं।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत मात्र 436 रुपये सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया जाता है। यह योजना 18 से 55 वर्ष की आयु के लोगों के लिए है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 18 से 70 वर्ष के लोग 20 रुपये सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर प्राप्त कर सकते हैं। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित है। एपीवाई के तहत, 60 साल की उम्र में 1,000 रुपये से लेकर 5000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन की गारंटी ग्राहकों द्वारा योगदान के आधार पर दी जाती है। देश का कोई भी श्रमिक जिसकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो, एपीवाई योजना में शामिल हो सकता है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक स्वैच्छिक, दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति बचत योजना है, जो निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को एक मजबूत सेवानिवृत्ति कोष बनाने में सक्षम बनाती है। इसी तरह व्यापारियों, दुकानदारों और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने दो प्रमुख पेंशन योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान-धन योजना (पीएम-एसवाईएम) है और दूसरी व्यापारियों, दुकानदारों और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस-ट्रेडर्स)।
इसके अलावा संगठित क्षेत्र में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा संगठन है। भविष्य निधि के लिए कर्मचारी का जो अशंदान कटता है, उसका एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है। पेंशन के लिए कर्मचारी को कम से कम दस साल तक नौकरी पूरी करनी होती है और पीएफ अकाउंट में अंशदान करना होता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15 हजार रुपये है। चिंताजनक है कि जहां असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोग पेंशन व्यवस्था से दूर हैं, वहीं बचत पर घटी हुई ब्याज दर के कारण देश में सामाजिक सुरक्षा की चिंताएं बढ़ रही हैं।
अब भी देश में बड़ी संख्या में लोगों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं हैं। अतएव अब सरकार को देश के आम आदमी के लिए सामाजिक सुरक्षा के बारे में गंभीरतापूर्वक ध्यान देना होगा और निजी क्षेत्र की पेंशन योजनाओं को भी आकर्षक बनाना होगा। उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के मद्देनजर निजी क्षेत्र तथा असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोगों के साथ-साथ आम आदमी को भी उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा देने की डगर पर नई रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।