{"_id":"67159c6fd3541f01af089523","slug":"issue-of-adult-videos-and-morality-very-serious-one-click-and-share-can-destroy-life-2024-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुद्दा: अश्लील वीडियो और कठघरे में नैतिकता... आपका एक क्लिक और शेयर जिंदगी तबाह कर सकता है","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
मुद्दा: अश्लील वीडियो और कठघरे में नैतिकता... आपका एक क्लिक और शेयर जिंदगी तबाह कर सकता है
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
तकनीक और वीडियो के कारण बढ़ रहीं चुनौतियां (प्रतीकात्मक)
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
इस बदलते दौर में तकनीक ने हमारे जीवन को कई तरह से आसान बनाया है, पर इसके साथ ही मानवीय संवेदनाओं पर गहरे घाव भी किए हैं। जैसे-जैसे तकनीकी प्रगति हो रही है, हमारे समाज में संवेदनहीनता, हिंसा और आपराधिक गतिविधियों का एक नया चेहरा उभर रहा है। अब अपराधियों के पास डिजिटल तकनीक के रूप में एक ऐसा हथियार है, जिसे वे अपनी घिनौनी मंशाओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी तकनीक की आड़ में अश्लील वीडियो खरीदने-बेचने का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।समाज का एक बड़ा तबका ऐसे वीडियो को इंटरनेट पर खोजते और देखते हुए इसे बढ़ावा दे रहा है। जब भी कोई दुष्कर्म का मामला सुर्खियों में आता है, कुछ लोग उससे जुड़े तथाकथित वीडियो इंटरनेट पर खोजने में जुट जाते हैं। पब्लिका द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट इस घिनौनी प्रवृत्ति को उजागर करती है। हाल में हुई कोलकाता की एक महिला प्रशिक्षु डॉक्टर की हत्या और दुष्कर्म की खबरों के सुर्खियों में आने के बाद गूगल ट्रेंड्स पर पीड़िता के नाम से अश्लील वीडियो की खोज में वृद्धि देखी गई। इससे पहले जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना के कथित सेक्स स्कैंडल मामले में भी ऐसा ही देखा गया था। ऐसे वीडियो देखने वाले पीड़िता के दर्द को महज मनोरंजन का साधन समझते हैं।
भारत में दुष्कर्म और असहमति से बनाए गए सेक्स वीडियो का बड़ा कारोबार है। पहले ये वीडियो गोपनीय ढंग से सीडी और पेन ड्राइव के माध्यम से बेचे जाते थे। लेकिन इंटरनेट के आने के साथ यह काला कारोबार अब इन्क्रिप्टेड ऐप्स पर चला गया है, जहां इन वीडियो क्लिप्स को रोकना संभव नहीं है।
फैक्ट चैकिंग संस्था बूम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम से ये अपराधी लिंक के जरिये सामग्री को प्राइवेट टेलीग्राम चैनल पर ले जाते हैं, जहां से यह काला कारोबार होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया साइट्स पर यदि आप ऐसे एक आपत्तिजनक पेज को फॉलो करते हैं, तो एल्गोरिदम और भी ऐसे अकाउंट आपको सुझाता है। लिंक के लिए यूपीआई, इंस्टेंट पे से भुगतान करने के बाद इच्छुक ग्राहक को टैराबॉक्स और क्लाउड एग्रीगेटर ऐप्स की ओर ले जाया जाता है। जहां वे इन अवैध और अमानवीय सामग्री तक पहुंच कर उसे डाउनलोड कर सकते हैं। एक बार डाउनलोडिंग के बाद इसका पता लगाना या रोकना लगभग असंभव हो जाता है।
अमेरिकी गैर लाभकारी संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन की रिपोर्ट कहती है कि भारत दुनिया में बाल यौन शोषण सामग्री का सबसे बड़ा निर्माता है। पॉक्सो ऐक्ट जैसे कठिन प्रावधानों और सजा के बाद भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री भरी हुई है। यह व्यापार इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी इसे रोकने में असमर्थ नजर आ रही हैं। इन चैनलों को बंद करना भी एक अस्थायी समाधान ही है, क्योंकि नए चैनल्स कुछ ही मिनटों में शुरू हो जाते हैं। इस अनैतिक व्यापार ने न केवल कानून को चुनौती दी है, बल्कि समाज की नैतिकता और संवेदनशीलता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। एआई जैसी तकनीक आने से अपराधियों के हौसले और बढ़ गए हैं, जहां तकनीक की मदद से सामान्य तस्वीर को फेक न्यूड तस्वीरों और डीपफेक वीडियो में बदला जा सकता है।
साल 2023 में भारत के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी सामग्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद यूट्यूब ने अपनी नई कम्युनिटी गाइडलाइंस के मुताबिक, अक्तूबर से दिसंबर के बीच करीब 25 लाख वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म से हटाया था। वहीं, टेलीग्राम पर 'स्टॉप चाइल्ड अब्यूज' चैनल के डेटा के मुताबिक, इस साल अब तक करीब छह लाख 70 हजार चैनल्स को बैन किया जा चुका है। पॉर्नोग्राफी और इस तरह की यौन हिंसा के वीडियो देखने की आदत के बीच गहरा ताल्लुक है। मनोचिकित्सक मानते हैं कि ऐसी सामग्री देखने से व्यक्ति की यौन और हिंसा के प्रति सामान्य दृष्टि विकृत हो गई है। यौन शिक्षा की कमी वाले भारत जैसे देश में यह समस्या को और गंभीर बना देती है। मंकी इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, पॉर्न वीडियो देखने के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर आता है, जिनमें 18 से 24 साल के युवाओं की संख्या 24 प्रतिशत है।
जाहिर है, इस समस्या का समाधान हम सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाकर ही कर सकते हैं। हमें ऐसी सामग्री के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा और समझना होगा कि ऐसे वीडियो पर हर क्लिक, हर शेयर किसी की जिंदगी को तबाह कर सकता है।