फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   is lack of scandal

घोटाले की कोई कमी है क्या

Sun, 14 Apr 2013 10:15 PM IST
श्याम विमल
श्याम विमल Updated Sun, 14 Apr 2013 10:15 PM IST
विज्ञापन
is lack of scandal

गद्दीनशीं राजनेताओं के यूपीए इलाके में घोटालों के धारावाहिक विवरण देख-पढ़कर उनके साझेदारों को सतर्क-सावधान हो जाना चाहिए। इस नेता बिरादरी से किसी भी तरह का संपर्क साधने में खतरे ही खतरे हैं।

विज्ञापन


क्या मालूम, कल को शनि-मंगल जैसा कोई क्रूर ग्रह मंत्री-नेता के घर में आ बैठे, तो हो सकता है, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र जैसी दुर्दशा वाली साढ़े साती की धारा लगा दे! राजनेताओं तथा अंडरवर्ल्ड के दादाओं की पारस्परिक लाभोन्मुखी मत्स्यगंधा बिरादरी के जाल में उलझे भोले नायक के साथ खलनायक का साथ हो जाए, तो बॉलीवुड क्या, दिल्ली स्थित राजनीतिक बिरादरी भी खलबला उठे।
विज्ञापन


कोयले की खदान के समान है कालिख पोत देने वाली आज की राजनीति। बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की कहावत को किस कदर सच कर देते हैं राजनेताओं के दरबारी चमचे। चुनाव जीत लेने के बाद बेगाने से हो जाने वाले राजनेता की जीत पर उल्लासित होकर जो चमचे हाथ की दो-दो उंगलियों से विक्टरी दर्शाते हैं, उन्हें भी सावधान हो जाना चाहिए कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि किसी घोटाले में धर लिए गए, तो उनके रिश्तेदार, दोस्त, आजू-बाजू में चिपकू लोग भी घोटाले के चक्रव्यूह में फंस सकते हैं। कल को उनके यहां सीबीआई-पुलिस का छापा पड़ सकता है या फास्ट ट्रैक कोर्ट का सम्मन तामील हो सकता है। तब मीडिया के बिच्छू कैमरेनुमा डंक उठाए या दोधारी जुबान लपलपाते सांप सूंघने आ जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए भैये, अपना मोटो तय कर लो कि न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर रखेंगे। ये जो इन्क्वाइरी कमीशन के कारिंदे होते हैं न, वे न जाने किथ मारिहौं-क्या घर, क्या परदेस। यूपीए की इस दूसरी पारी में घोटालों की कोई कमी दिखती है क्या? घोटाले के अनेकानेक कोण बसते हैं दुनियादारी या राजदारी में।


अधिग्रहीत जमीनें-कोयला खदानें-पशु चारा-खेल-सड़कें-दूरसंचार-रक्षा-हथियार-तोपें-ताबूत-जीपें-जहाज-हेलीकॉप्टर आदि की खरीद में न जाने कितने वीआईपी अभिभूत हुए पड़े हैं हमारे भारत महान में। जब हुकूमत में परिवर्तन कर डालता है मतदाता, तो गड़े मुर्दे खोदने का काम सर्वोपरि हो जाता है पदासीन पार्टी का। इस मुर्दा-खुदाई में गेहूं के साथ घुन भी पिस जाते हैं। इसलिए राजनेताओं की विक्टरी पर दीवाने बने तथा नाचते-दहाड़ते लड्डू-बर्फी भकोसते, पटाखों की लड़ियां फोड़ते नेता भक्तो, सावधान हो जाओ।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed