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नारी : सारी चीजें पा लना मुश्किल है लेकिन... मुझे इस जिंदगी से सब कुछ चाहिए
Sat, 08 Mar 2025 07:30 AM IST
शिव शुक्ला
सिमोन द बोउआ
सिमोन द बोउआ
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 08 Mar 2025 07:30 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस।
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विस्तार
महिला को रसोई या शयनकक्ष में बंद कर दिया जाता है, और इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया जाता है कि उसका क्षितिज सीमित है। उसके पंख काट दिए जाते हैं, और यह इल्जाम लगाया जाता है कि वह उड़ना नहीं जानती या उड़ ही नहीं सकती। बस उसके लिए भविष्य का द्वार खोल दिया जाए, तो वह वर्तमान में रहने के लिए मजबूर नहीं होगी।
स्त्री पैदा नहीं होती, बल्कि उसे बना दिया जाता है। औरत को औरत होना सिखाया जाता है। औरत बनी रहने के लिए उसे अनुकूल किया जाता है। तथ्यों के विश्लेषण से यह समझ में आएगा कि प्रत्येक मादा मानव जीव अनिवार्यतः एक औरत नहीं है। जब पुरुष ने औरत को अन्यता प्रदान की, तो औरत भी सहअपराधी हो गई। बहुधा तो औरतें खुद ही अपनी इस नगण्यता में संतुष्ट रहती हैं। मर्दों को इन्सान समझा गया और औरतों को मादा। जब-जब यह मादा इन्सानों की तरह बर्ताव करती, तब-तब इसके सिर पर मर्दों की नकल करने के इल्जाम लगा दिए जाते। वह इस ब्रह्मांड और यहां तक कि समय के अस्तित्व को भी नकार सकती थी, लेकिन किसी भी कीमत पर यह नहीं मान सकती थी कि प्यार शाश्वत नहीं होता।
मर्द, औरत से इसलिए नहीं बंधता कि वह औरत को खुशियां दे सके, असल में, वह अपने लिए खुशी की तलाश में औरत के पास तक जाता है। दो अलग-अलग प्राणी, अलग-अलग परिस्थितियों और स्वतंत्रता में आमने-सामने होते हैं तथा एक-दूसरे के माध्यम से एक-दूसरे के अस्तित्व के औचित्य को तलाशने की कोशिश करते हैं, वे हमेशा जोखिम और संभावनाओं से भरा एक साहसिक जीवन जीते हैं। औरत के प्रति जो पुरुष जितना आक्रामक और घृणापूर्ण होता है, वह उतना ही अपनी हीनग्रंथि का शिकार है। दरअसल, जो पुरुष औरत का जितना अधिक अपमान करता है, वह मानसिक रूप से उतना ही स्वयं में अपमानित होने की आशंका से ग्रस्त रहता है।
जिस दिन औरत अपनी कमजोरियों से नहीं, बल्कि अपनी ताकतों से प्यार करना सीख जाएगी, जिस दिन वह खुद से भागना छोड़कर और खुद की तलाश में निकल जाएगी, साथ ही अपना मान करना तथा पूरे दावे के साथ अपनी बात रखना जान पाएगी, उस दिन से प्यार पर उसका भी उतना ही हक होगा, जितना किसी मर्द का और उसी दिन से प्यार उसके लिए खतरा नहीं, बल्कि जीवन बन जाएगा। यों तो उसने खुद को इतना साधा है कि वह कभी न बदले, लेकिन किसी दिन अंगुलियों की एक छुअन भर से वह पिघल उठेगी।
मेरी बुद्धिमत्ता, मेरी जरूरतें और तमाम जिम्मेदारियों को उठाने में पूरी तरह सक्षम होना-ये कुछ ऐसी बातें हैं कि कभी भी कोई मुझे अपने वश में नहीं कर सकता। न तो कोई मुझे पूरी तरह समझ सकता है और न ही प्यार कर सकता है। वह सिर्फ मैं हूं, जिसने खुद को जाना और खुद को चाहा भी है। मुझे इस जिंदगी से सब कुछ चाहिए। मैं औरत भी होना चाहती हूं और मर्द भी। मुझे अनगिन दोस्त चाहिए और मेरा अपना अकेलापन भी। ढेरों काम करने हैं मुझे और बेहतरीन किताबें लिखनी हैं। खुद की खुशी के लिए यात्राओं पर निकल जाना है। मुझे खुदगर्ज होना है और खुदगर्जी से दूर भी रहना है। मैं जानती हूं कि ये सारी चीजें एक साथ पा लेना बेहद मुश्किल है और इस मुश्किल को सोचना भी मुझे गुस्से से पागल कर देता है।