फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Interesting twist in Tamil Nadu politics Vijay s film Jana Nayakan and politics face crisis ahead of election

तमिलनाडु की राजनीति में दिलचस्प मोड़: चुनाव से पहले विजय की फिल्म 'जन नायकन' और राजनीति दोनों पर संकट

Tue, 13 Jan 2026 07:01 AM IST
आर. राजगोपालन अमर उजाला
अमर उजाला Published by: आर. राजगोपालन Updated Tue, 13 Jan 2026 07:01 AM IST
विज्ञापन
सार
करूर भगदड़ की सीबीआई जांच एवं जन नायकन  फिल्म की रिलीज पर रोक लगने से अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को झटका लगा है। अब देखना यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर पड़ता है।
loader
Interesting twist in Tamil Nadu politics Vijay s film Jana Nayakan and politics face crisis ahead of election
अभिनेता से नेता बने विजय थलापति - फोटो : ANI

विस्तार

अभिनेता से नेता बने विजय की सुपरस्टार लीड के तौर पर आखिरी फिल्म जन नायकन या जननायक तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से ठीक तीन महीने पहले एक गंभीर कानूनी पचड़े में फंस गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को तय की है। तब तक फिल्म रिलीज नहीं हो सकती। इससे प्रोड्यूसर्स को भारी नुकसान हुआ है। अभिनय और राजनीति, दोनों के लिहाज से विजय के लिए यह एक बड़ा झटका है। तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा के साथ चुनावी राजनीति में यह उनकी पहली गंभीर कोशिश है। अब इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है और यह एक कानूनी लड़ाई में बदल गई है।



एक अन्य तमिल फिल्म पराशक्ति को सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के तुरंत बाद द्रमुक ने जन नायकन को रोके रखने के लिए केंद्र सरकार पर हमला करना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने भाजपा और केंद्र सरकार पर सेंसर बोर्ड को ‘राजनीतिक हथियार’ बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों की तरह हो गया है और राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए केंद्र सरकार का ‘एक नया हथियार’ बन गया है। स्टालिन का यह बयान टीवीके अध्यक्ष विजय की फिल्म जन नायकन और पराशक्ति को सेंसर बोर्ड द्वारा बड़े पैमाने पर कट लगाए जाने के बाद आया। इसके बाद, टीवीके समर्थकों ने तुरंत कहा कि द्रमुक मगरमच्छ के आंसू बहा रही है और आरोप लगाया कि भाजपा पराशक्ति के मामले में नरम थी तथा जन नायकन के मामले में अड़ी हुई थी।


स्टालिन ने यह साफ नहीं किया कि उनकी आलोचना तमिलनाडु के हिंदी विरोधी आंदोलन पर आधारित फिल्म पराशक्ति के बारे में थी या विजय की जन नायकन के बारे में। सेंसर बोर्ड ने अभी तक जन नायकन को मंजूरी नहीं दी, जबकि उसने कई कट के साथ पराशक्ति को मंजूरी दे दी। टीवीके लॉन्च करने के बाद, विजय ने राज्य में सत्ताधारी द्रमुक और केंद्र में भाजपा, दोनों पर हमला किया। राजनीति में उनका प्रवेश बहुत नाटकीय था। उन्होंने जनसभाओं में भारी भीड़ जुटाई और तेजी से लोकप्रियता हासिल की। हालांकि, करूर भगदड़ ने उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया और इतनी जल्दी सत्ता हासिल करने की उनकी मंशा पर सवाल खड़े कर दिए। सोमवार को इस मामले में सीबीआई ने उनसे लंबी पूछताछ की है।

कुछ जानकारों ने जन नायकन विवाद को तमिल फिल्म उद्योग की अंदरूनी राजनीति से भी जोड़ा है। वे उदयनिधि स्टालिन, जो उप-मुख्यमंत्री और उद्योग में एक अहम व्यक्ति हैं, से जुड़े संभावित सत्ता संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। इस विवाद को द्रमुक से संबद्ध डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी रेड जायंट मूवीज से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विजय ने जन नायकन की रिलीज के लिए रेड जायंट की उपेक्षा की, जिससे कथित तौर पर सत्ताधारी पार्टी का प्रथम परिवार नाराज हो गया। फिल्म जन नायकन में विजय को गरीबों और दबे-कुचले लोगों के मसीहा के रूप में दिखाया गया है, जो मछुआरों की मदद कर रहा है, भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो रहा है, और उसे भावी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया गया है। यह राजनीतिक संदेश तब और स्पष्ट हो गया, जब उसी समय के आसपास एक और फिल्म, पराशक्ति, भी रिलीज होने वाली थी। पराशक्ति 1960 के दशक की तमिल राजनीतिक भावनाओं को जगाती है, जब हिंदी विरोधी आंदोलन अपने चरम पर था। यह एक भावनात्मक जगह है, जिस पर द्रमुक ने कब्जा किया हुआ है। दोनों फिल्मों में, संवाद, गाने के बोल और पटकथा क्षेत्रीय पहचान के राजनीतिक द्विअर्थी निहितार्थों से भरे हैं।

विजय के आखिरी अभिनय के तौर पर, जन नायकन उनके 30 साल के फिल्मी कॅरिअर को एक श्रद्धांजलि भी है और इस सिनेमा को एक प्रतीकात्मक विदाई के तौर पर देखा जा रहा है। मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस पीटी आशा ने शुरू में फिल्म को रिलीज के लिए मंजूरी दे दी थी। हालांकि, सेंसर बोर्ड ने यह कहकर आपत्ति जताई कि प्रोड्यूसर्स ने कुछ ऐसे सीन नहीं हटाए हैं, जो बोर्ड के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसके बाद, चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकल जज के आदेश पर रोक लगा दी और अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी तय की। कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती के एक ट्वीट के बाद इसमें एक और राजनीतिक मोड़ आ गया, जिन्होंने विजय से कई बार मुलाकात की थी और खुलकर विजय और जन नायकन का समर्थन किया था। इससे तमिलनाडु की राजनीति में कहानी बदल गई।

द्रमुक, जो कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, ने कड़ा विरोध किया। कांग्रेस और द्रमुक नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस हुई। द्रमुक ने सेंसर बोर्ड से पराशक्ति को मंजूरी मिलने के बाद विजय का समर्थन करना शुरू कर दिया और देरी के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे का इस्तेमाल विजय और टीवीके को राजग गठबंधन में मिलाने के लिए कर रहे हैं। मगर कोर्ट ने सवाल किया कि मंजूरी लिए बिना रिलीज की तारीख क्यों तय की गई और क्या न्यायपालिका पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि ऐसी चालें काम नहीं करेंगी। टीवीके ने कहा कि उसे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह कानूनी प्रक्रिया खत्म होने का इंतजार करेगा। नाटकीय, राजनीतिक और कानूनी पहलुओं को एक साथ देखने पर कुछ नतीजे सामने आते हैं। पहला, विजय ने संकट को शांति से संभाला। उन्होंने केंद्र सरकार या सेंसर बोर्ड पर सार्वजनिक हमला करने से परहेज किया और कानूनी रास्ते अपनाने का फैसला किया। दूसरा, हालांकि वह राजनीति में नए थे, लेकिन दो दिग्गजों को चुनौती दी-राज्य में द्रमुक और केंद्र में भाजपा, जो उनके राजनीतिक साहस को दर्शाता है। तीसरा, द्रमुक ने सफलतापूर्वक विवाद को भाजपा की ओर मोड़ दिया, ताकि अल्पसंख्यक वोटों को पक्का किया जा सके और उन्हें टीवीके में जाने से रोका जा सके।

बहरहाल, अप्रैल 2026 में, लगभग पांच करोड़ तमिल मतदाता जब तमिलनाडु विधानसभा के लिए 234 विधायक चुनेंगे, तब तक, वे शायद जन नायकन के संवाद भूल चुके होंगे, या शायद वे तब भी उसके गाने गुनगुना रहे होंगे।               

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed