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विवाद : पाकिस्तानी कुचक्रों के बीच क्या सुलझेगा सिंधु जल विवाद, क्या होगी सहमति की परिणति

Mon, 10 Apr 2023 06:59 AM IST
Pankaj chaturvedi पंकज चतुर्वेदी
Updated Mon, 10 Apr 2023 06:59 AM IST
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सार
पाकिस्तान यह मुद्दा मध्यस्थता अदालत ले जाना चाहता था, इसलिए भारत ने उसे नोटिस भेजा था। उसने भारत की बात सुनने पर सहमति जताई है।
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Indus water dispute again in limelight India sent a notice to Pakistan under Water Sharing Treaty
सिंधु जल विवाद (सांकेतिक तस्वीर)।

विस्तार

सिंधु जल विवाद फिर चर्चा में है। इसी साल जनवरी में भारत ने पाकिस्तान को नदी जल बंटवारे की संधि के अनुच्छेद 12 के तहत नोटिस भेजा था। उसका जवाब अब आया है, कि वह संधि को लेकर नई दिल्ली की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है। पाकिस्तान हमारी दो परियोजनाओं-किशनगंगा और रातले पनबिजली परियोजनाओं पर तकनीकी आपत्तियों की जांच के लिए तटस्थ विशेषज्ञों की नियुक्ति करने के आग्रह से खुद पीछे हटकर मामले को मध्यस्थता अदालत में ले जाने पर अड़ा था, जो संधि के अनुच्छेद नौ में विवादों के निपटारे के लिए बनाए गए तंत्र का उल्लंघन है। इसलिए भारत ने सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस भेजा था।



गौरतलब है कि अगस्त, 2021 में संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि आईडब्ल्यूटी पर फिर से बातचीत की जाए, ताकि नदी में जल उपलब्धता पर पड़े जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और अन्य चुनौतियों से जुड़े उन मामले को निपटाया जा सके, जिन्हें समझौते में शामिल नहीं किया गया है। पाकिस्तानी आतंकवाद का जवाब देने के लिए भारत में नदियों का पानी रोकने पर लंबे समय से विचार चल रहा है, लेकिन क्या यह व्यावहारिक रूप से तत्काल संभव होगा?


दुनिया की सबसे बड़ी नदी-घाटी प्रणालियों में से एक सिंधु नदी की लंबाई कोई 2,880 किलोमीटर है। सिंधु नदी का इलाका पाकिस्तान (47 प्रतिशत), भारत (39 प्रतिशत), चीन (आठ प्रतिशत) और अफगानिस्तान (छह प्रतिशत) में फैला है। अनुमान है कि कोई 30 करोड़ लोग सिंधु नदी के आसपास के इलाकों में रहते हैं। सिंधु नदी तंत्र की छह नदियों में कुल 1.68 करोड़ एकड़ की जल निधि है। इसमें से भारत अपने हिस्से का 95 फीसदी पानी इस्तेमाल कर लेता है। बाकी पांच फीसदी पानी रोकने के लिए अभी कम से कम छह साल लगेंगे और इसकी लागत आएगी 8,327 करोड़ रुपये।

सिंधु नदी प्रणाली का कुल जल निकासी क्षेत्र 11,165,000 वर्ग किमी से अधिक है। यह पाकिस्तान के भरण-पोषण का एकमात्र साधन भी है। सिंधु नदी बेसिन के पानी के बंटवारे के लिए कई वर्षों की गहन वार्ता के बाद विश्व बैंक ने भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि की मध्यस्थता की। नतीजतन 19 सितंबर, 1960 को कराची में दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता हुआ। भारत-पाकिस्तान के बीच तीन-तीन युद्ध और लगातार तनावग्रस्त रिश्तों के बावजूद दोनों में से किसी ने भी इस संधि को नहीं तोड़ा।

यहां यह जानना जरूरी है कि पानी की बात केवल सिंधु नदी की नहीं है, असल में इसके साथ पंजाब की पांच नदियों के पानी का भी मसला है। सनद रहे कि भारत रावी नदी पर शाहपुर कंडी बांध बनाना चाहता था, पर उस परियोजना को 1995 से रोक दिया गया है। भारत ने अपने हिस्से की पूर्वी नदियों का पानी रोकने के प्रयास किए, लेकिन सामरिक दृष्टि से ऐसी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पाईं। अब शाहपुर कंडी के अलावा सतलुज-व्यास लिंक योजना और कश्मीर में उझा बांध पर भी काम हो रहा है। इससे भारत अपने हिस्से का सारा पानी इस्तेमाल कर सकेगा। मगर इस संधि में विश्व बैंक सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं शामिल हैं, जिनकी उपेक्षा करके और उन्हें नजरअंदाज कर पाकिस्तान का पानी रोकना कठिन होगा। ऐसा आतंकवादी गतिविधियों में पाकिस्तान की सीधी भागीदारी साबित करने के बाद ही संभव होगा।

यदि हम नदी का पानी रोकते हैं, तो उसे सहेज कर रखने के लिए बड़े जलाशय, बांध चाहिए और नहरें भी। यदि पानी रोकने का प्रयास किया गया, तो जम्मू व कश्मीर, पंजाब आदि में जल भराव हो जाएगा।

भारत की ये नदियों उंचाई से पाकिस्तान में जाती हैं। इनके प्राकृतिक जल-प्रवाह पर रोक समूचे उत्तरी भारत के लिए बड़ा संकट होगा। इसके अलावा, भारत से पाकिस्तान जाने वाली नदियों पर चीन के निवेश से कई बिजली परियोजनाएं चलती हैं। यदि उन पर विपरीत असर पड़ा, तो चीन ब्रह्मपुत्र के जरिये हमारे पूर्वोत्तर राज्यों को संकट में डाल सकता है। लेकिन पाकिस्तान के बदले रुख से विवाद सुलझने की उम्मीद बनती है। 

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