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विदेश नीति: भारत के सामने 'करीबी मित्र' बांग्लादेश को पास रखना चुनौती; दोनों पड़ोसियों को मिलकर काम करना चाहिए

Sat, 22 Jun 2024 05:06 AM IST
Mahendra Ved महेंद्र वेद
Updated Sat, 22 Jun 2024 05:06 AM IST
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सार
भारत का दूसरा दौरा कर शेख हसीना ने संदेश दे दिया है। देखना यह है कि भारत राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बगैर बांग्लादेश को क्या दे सकता है।
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India Bangladesh Relation all Eyes on Indian Foreign Policy after PM Sheikh Hasina Visit
बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना पंद्रह दिनों के भीतर दूसरी बार भारत की यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत करना चाहते हैं। पर यह इस पर भी निर्भर करता है कि भारत बांग्लादेश को क्या दे सकता है। प्रधानमंत्री मोदी और हसीना, दोनों दक्षिण एशियाई क्षेत्र की जटिल राजनीतिक व भू-राजनीतिक गतिशीलता से वाकिफ हैं, जिसमें क्वाड चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करने की कोशिश कर रहा है। अनुमान लगाया जा सकता है कि चीन को अलग-थलग करने के लिए भारत ऐसे प्रस्ताव देगा, जिन्हें वह आसानी से मना नहीं कर पाएंगी। इससे हसीना को अगले महीने चीनियों से बातचीत में भी कुछ लाभ मिलेगा।



शेख हसीना ने चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास स्थगित कर दिया है। भारत रक्षा पर 50 करोड़ डॉलर की क्रेडिट लाइन का शीघ्र कार्यान्वयन चाहता है। हसीना ने तीस्ता नदी के विकास में वित्त पोषण और भागीदारी के चीन के प्रस्ताव को भी टाल दिया। समझौते के अनुसार, इसके पानी के समान बंटवारे की बांग्लादेश की पुरानी मांग है। लेकिन भारत इसे पूरा करने में असमर्थ रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल इससे सहमत नहीं है। इस बार भी समझौते की संभावना नहीं दिखती है। वर्ष 2026 में गंगा जल संधि खत्म हो जाएगी, जिसे परस्पर संतुष्टि के लिए फिर से नवीनीकृत किया जाना चाहिए। यदि भारत इसमें चूक जाता है, तो चीन को बांग्लादेश को अपने पाले में लाने की कोशिश करने का मौका मिल जाएगा। इसलिए भारत को अपने ‘सबसे करीबी’ और ‘मित्रवत’ पड़ोसी की आकांक्षाओं को पूरा करना चाहिए। भारत और बांग्लादेश, दोनों के पास दीर्घकालिक दृष्टिकोण हैं, जिसे पूरा करने के लिए सहयोग की जरूरत है। भारत 2047 तक ‘विकसित’ राष्ट्र बनना चाहता है और बांग्लादेश, ‘स्मार्ट’ राष्ट्र। आर्थिक विकास व सामाजिक सामंजस्य दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। मनुष्यों (कथित अपराधियों समेत), मवेशियों, हथियारों और नशीले पदार्थों की सीमा पार अवैध आवाजाही पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। 


बांग्लादेश को भारत से ऋण की उम्मीद है। इसके लिए वह चीन से भी संपर्क करेगा। हालांकि हसीना की इस यात्रा के दौरान किसी नए ऋण समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना नहीं है, पर ऐसी घोषणा संयुक्त विज्ञप्ति में की जा सकती है। भारत परस्पर लाभ के लिए निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने हेतु व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते का तेजी से क्रियान्वयन चाहता है।

वर्ष 2010 से भारत ने बांग्लादेश को 7.36 अरब डॉलर का ऋण देने का वादा किया है। बांग्लादेश इस साल अप्रैल तक केवल 1.73 अरब डॉलर या वादे का 23 प्रतिशत ही उपयोग कर पाया है। मौजूदा भारतीय क्रेडिट लाइन की शर्तें बहुत सख्त हैं। जैसे, हर परियोजना के लिए लगभग 65-75 प्रतिशत सामान या सेवाएं भारत से खरीदी जानी चाहिए, जिससे परियोजना के कार्यान्वयन में देरी हो रही है। हसीना ने सोनादिया बंदरगाह को विकसित करने के चीनी प्रस्ताव पर कहा कि उसे उम्मीद है कि भारत इसकी भरपाई करेगा। भारत एक नई द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के लिए उत्सुक है, और मोंगला समुद्री बंदरगाह में व्यापक भूमिका निभाना रहा है। हिंद-प्रशांत तक विस्तारित एक नया समुद्री मार्ग भी एजेंडे में है।

इसके अतिरिक्त, भारत का लक्ष्य समुद्री सहयोग को बढ़ाते हुए हिंद महासागर क्षेत्र में 'सागर' परियोजना का विस्तार करना है। बांग्लादेश का लक्ष्य भूटान से अधिक जलविद्युत आयात करना है, जिसके लिए भारत की सहमति की आवश्यकता है। उम्मीद है कि भारत भूटान से बांग्लादेश तक बिजली पहुंचाने के लिए अपने क्षेत्र के इस्तेमाल पर सहमत हो सकता है।

दोनों देशों के बीच सार्वजनिक परिवहन के लिए फेनी मोइत्री (मैत्री) पुल का जल्द उद्घाटन करने और रामपाल मोइत्री बिजली संयंत्र की दूसरी इकाई खोलने के लिए चर्चा चल रही है। द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों परियोजनाओं को प्रतीकात्मक रूप से खोले जाने की उम्मीद है। दक्षिण त्रिपुरा जिले में भारत-बांग्लादेश को जोड़ने वाले मैत्री सेतु के माध्यम से यात्री आवागमन इस साल सितंबर तक शुरू होने वाला है। इसमें शामिल जटिलताओं को देखते हुए शेख हसीना ने प्रधानमंत्री मोदी को बांग्लादेश आने का निमंत्रण दिया है। उस यात्रा के दौरान इनमें से कुछ मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जाहिर है, दोनों पड़ोसियों को मिलकर काम करना चाहिए, चाहे चीन का प्रभाव हो या न हो।

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