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Independence Day: आजादी को समृद्ध बनाती प्रौद्योगिकी
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विस्तार
जैसा कि भारत आजादी के अमृत महोत्सव समारोहों के साथ आजादी की 75वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है, प्रौद्योगिकी ने निस्संदेह इसे एक रोमांचक आयाम दिया है, क्योंकि हम अगले 25 वर्षों यानी 2047 तक के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि देश ने 1947 में ही अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल कर ली, लेकिन नागरिकों ने 1991 में उदारीकरण और सुधारों के बाद ही सामूहिक रूप से आर्थिक आजादी का एहसास करना शुरू किया। उदारीकरण के बाद भारत की नॉमिनल जीडीपी 1991 के 275 अरब डॉलर से बढ़कर 2022 में 30.16 खरब डॉलर हो गई, जो डॉलर के संदर्भ में 8.2 फीसदी की जबर्दस्त चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) है।
भारत के जबर्दस्त विकास में देश के उद्यमी वर्ग के सामूहिक प्रयास का महत्वपूर्ण योगदान है-जो 1991 में मुक्त हुआ और रोमांचक अवसरों का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र हो गया। विशेष रूप से, आईटी उद्योग और अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित उपक्रमों ने भारत के विकास को प्रेरित किया है और आने वाले दशकों में इसमें तेजी लाने के लिए तैयार हैं। आज भारत वैश्विक स्तर पर किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में इस क्षेत्र में वर्चस्व बनाए हुए है। देश 175 अरब डॉलर के सॉफ्टवेयर का निर्यात करता है, इस क्षेत्र में 51 लाख लोग कार्यरत हैं और इसमें 60 फीसदी वैश्विक सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग बाजार शामिल है। दुनिया की शीर्ष 10 आईटी कंपनियों (वैश्विक बाजार मूल्य के आधार पर) में से पांच भारतीय हैं। शीर्ष पांच कंपनियों में तीन भारतीय हैं। शीर्ष दस कंपनियों में कार्यरत 30 लाख से ज्यादा लोगों में से 21 लाख भारतीय हैं। यहां तक कि 60 लाख सॉफ्टवेयर कर्मचारियों वाले अमेरिका में भी 10 लाख भारतीय हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करने वाले 95 लाख लोगों में से 35 लाख भारतीय हैं। भारत ने सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में, विशेष रूप से सेवाओं में, मानव पूंजी का जो निर्माण किया है, वह चौंका देने वाला है।
उदारीकरण के बाद आईटी सेवा उद्योग में तेजी से वृद्धि का कारण यह था कि हार्डवेयर पर उच्च सीमा शुल्क और आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया था। इससे उद्यमियों का एक असाधारण वर्ग उभरा। और यह चलन आज भी जारी है, क्योंकि भारत के स्टार्ट-अप इको सिस्टम को अभूतपूर्व रूप से सफल आईटी उद्योग के कंधों पर आगे ले जाया गया है। हमारे देश में 75,000 से अधिक स्टार्ट-अप हैं, जो संयुक्त रूप से 450 अरब डॉलर की पूंजी का निर्माण करते हैं, इनमें से 105 यूनिकॉर्न हैं। वर्ष 2014-2021 के बीच लगभग 120 अरब डॉलर की पूंजी इस क्षेत्र में आई, और मौजूदा 2022 की पहली छमाही में, पहले ही भारतीय स्टार्ट-अप्स द्वारा 16 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। भारत 2022-25 की समय सीमा में अतिरिक्त 120-150 अरब डॉलर की पूंजी जुटा सकता है, जिससे 2025 के अंत तक एक संयुक्त आईटी क्षेत्र का मूल्य 10 खरब डॉलर और 250 यूनिकॉर्न के करीब हो जाएगा। देश अभी अमेरिका और चीन के बाद दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्ट-अप का घर है, जो जल्द ही दूसरे स्थान पर आने की राह पर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को डिजिटल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया का आह्वान किया था। तबसे भारत में डिजिटलीकरण की विशेष प्रगति हुई है। भारत डिटिजलीकरण के मामले में वैश्विक अग्रणी बनकर उभरा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल ने भारत में डिजिटल पहुंच को लोकतांत्रिक बना दिया है और 1.4 अरब भारतीयों की उंगलियों ने डिजिटल समावेशन को संभव बनाया है। आज भारत निस्संदेह दुनिया की शीर्ष तीन डिजिटल शक्तियों में से एक है। यह देश के उद्यमी वर्ग और पिछले 30 वर्षों में विभिन्न पार्टियों की सरकारों की सक्रिय नीतियों का उत्पाद है। आज जब देश की स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाने के लिए भारत अगले 25 वर्षों की ओर देख रहा है, तो यह कहना सही होगा कि भारत दुनिया के डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी लोकतंत्रीकरण आंदोलन के केंद्र में होगा। राष्ट्र यह भी सुनिश्चित करेगा कि डिजिटलीकरण भारत की सामाजिक-आर्थिक उपलब्धियों को रेखांकित करता रहे।
विश्व स्तर पर भारत के तकनीकी नेतृत्व को मजबूत करने और बनाए रखने के लिए उच्च शिक्षा में निवेश करने की आवश्यकता है। राष्ट्र को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में डॉक्टरेट और परास्नातक विद्वानों की संख्या बढ़ाकर विशेषज्ञ तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। भारत अनुसंधान और नवाचार खर्च के मामले में अन्य अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है और इसे ठीक करने के लिए समय पर संसाधनों को तैनात करना चाहिए। प्रौद्योगिकी हर सामाजिक-आर्थिक विकास इंजन को गति देगी, और भारत इन मंचों को विकसित करने में पीछे नहीं रह सकता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 अनुसंधान एवं विकास के लिए एक भविष्योन्मुख ढांचा प्रदान करती है, जिसमें पांच वर्षों में 50,000 करोड़ के प्रारंभिक खर्च के साथ राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) का निर्माण शामिल है। स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाते हुए हम सभी भारतीय विश्व स्तरीय आईटी एवं अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र होने का गर्व कर सकते हैं। प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों ने पहले ही नागरिकों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोबाइल से जुड़े लाखों बैंक खातों, यूपीआई लेन-देन की मात्रा में वृद्धि, वीडियो और ऑडियो जैसे डिजिटल मोड की खपत और दूरसंचार की कम लागत से यह स्पष्ट है। ये उपलब्धियां, वास्तव में, उत्सव का कारण हैं, क्योंकि हम अगले 25 वर्षों के विकास के लिए रूपरेखा तैयार करते हैं और एक सच्ची वैश्विक शक्ति बनते हैं। -टीवी मोहनदास पई एरियन कैपिटल पार्टनर्स के चेयरमैन एवं निशा होला सी-कैंप की टेक्नोलॉजी फेलो हैं।