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बढ़ रही हैं इमरान की मुश्किलें
Thu, 27 Dec 2018 06:46 PM IST
Raman Singh
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार
Published by: Raman Singh
Updated Thu, 27 Dec 2018 06:46 PM IST
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कुलदीप तलवार
प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान सरकार ने पिछले दिनों अपने पहले सौ दिन के कामकाज की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अपनी सांविधानिक अवधि (2023) पूरी होने तक पाकिस्तान की आर्थिक और हर क्षेत्र की तरक्की बहाल करने का वायदा किया है। बहरहाल रिपोर्ट यह नहीं दर्शाती कि चुनाव से पहले इमरान खान ने या उनकी पार्टी ने जनता से जो वायदे किए थे, उन पर कोई अमल हुआ, तो किस हद तक। ऐसा नजर आता है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ या हो रहा है, जो पिछली सरकारों से अलग हो। इसलिए पाकिस्तान की जनता मायूसी का शिकार हो रही है।
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पाकिस्तान दिवालियापन की तरफ बढ़ रहा है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद अब्बासी ने इमरान खान को पाकिस्तान का डोनाल्ड ट्रंप बताते हुए चेताया है कि सरकार अपनी आर्थिक नीतियां दुरुस्त करे, वर्ना महंगाई का सैलाब आ जाएगा। अवाम सड़कों पर आ गए, तो शासन चलाना मुश्किल हो जाएगा। इस समय पाक सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। इमरान खान पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मदद लेने के खिलाफ थे। इसके लिए वह मित्र देश सऊदी अरब और मलयेशिया भी गए, लेकिन उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली। चीन जैसे मित्र ने भी नगदी मदद देने से इनकार कर दिया। चीन का पिछले पांच वर्षों में पाक पर कर्ज 60 अरब डॉलर से बढ़कर 95 अरब डॉलर हो गया है। बढ़ते कर्ज से परेशान पाकिस्तान ने एक बार फिर आईएमएफ की ओर मदद के लिए देखना शुरू कर दिया है। आईएमएफ पहले पाक सरकार से आर्थिक असंतुलन दूर करने का ठोस आश्वासन चाहता है। इसके लिए उसने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं, जैसे बिजली की कीमत में बढ़ोतरी, ब्याज दर बढ़ाने और रुपये की कीमत कम करने व कर संग्रह का लक्ष्य बढ़ाने पर जोर। लेकिन ये शर्तें इतनी सख्त हैं, जिन पर पाकिस्तान अमल नहीं कर पाएगा। इसलिए हो सकता है कि आईएमएफ मदद देने से इनकार कर दे। अमेरिका ने भी आईएमएफ को कहा है कि पाक को मदद न दी जाए, क्योंकि उसे आशंका है कि पाक इस धनराशि से चीन का कर्ज उतारेगा।
सरकार के 100 दिन पूरे होने के एक दिन बाद ही विनिमय दर एक डॉलर के मुकाबले में पाकिस्तानी 144 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। गरज यह है कि इमरान खान असमंजस में दिख रहे हैं। जब किसी देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ाती है, तो शीर्ष नेतृत्व का दिशाहीन रुख और उलझता है, ऐसा ही इमरान खान के साथ हो रहा है। इमरान खान ने चुनाव मुहिम के दरम्यान पाक में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे जोर से नारा बुलंद किया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कई ऐसे मंत्रियों को साथ ले लिया, जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इमरान खान देश में धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) समेत अन्य भ्रष्ट गतिविधियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए एक नया कानून बनाए जाने की सख्त जरूरत महसूस करते हैं, लेकिन सत्ता के 100 दिन गुजरने के बाद भी कानून का प्रस्ताव संसद में पेश नहीं किया गया।
किसी भी सरकार के लिए सबसे अच्छा तरीका विपक्ष के साथ तालमेल बढ़ाते हुए सत्ता को आगे बढ़ाना होता है, लेकिन इमरान खान अभी तक ऐसा नहीं कर पाए। पाकिस्तान में दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी राजनीतिक पार्टी पीपीपी के मुखिया आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि नासमझ प्रधानमंत्री से देश नहीं संभाला जा रहा। चुनाव में लाई गई कठपुतलियों से काम नहीं चलता। आने वाले अगले कुछ दिनों में पता चल जाएगा कि इमरान खान अपनी सरकार को किस तरीके से चलाते हैं और जनता की ज्वलंत समस्याओं को कैसे हल करेंगे।