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समानता के अधिकार पर चोट

Mon, 13 Jul 2015 08:34 PM IST
शिवदान सिंह
शिवदान सिंह Updated Mon, 13 Jul 2015 08:34 PM IST
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hurting of right to equality

मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला, उत्तर प्रदेश का पुलिस भर्ती घोटाला और बिहार का शिक्षक भर्ती घोटाला देश के पहले एवं आखिरी घोटाले नहीं हैं। इन घोटालों के जरिये संविधान के अनुच्छेद 16 यानी समानता के अधिकार पर सीधा प्रहार किया गया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा या सरकारी भर्ती में फर्जीवाड़ा समान अवसरों के साथ योग्यता आधारित तंत्र के निर्माण की उम्मीद नष्ट करता है। हजारों नौजवान छात्रों के लिए इससे बुरी चीज क्या हो सकती है कि उनकी कड़ी मेहनत व वर्षों की पढ़ाई कोई मायने नहीं रखती, कॉलेजों में दाखिला और सरकारी नौकरी पैसों के बल पर खरीदी जा सकती है।

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व्यापम मध्य प्रदेश सरकार का ऐसा तंत्र है, जिसके द्वारा प्रदेश के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले तथा सरकारी नौकरियों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी करके नियुक्तियों के लिए सरकार को सिफारिश भेजी जाती है। मेडिकल शिक्षा विभाग के मंत्री खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2008-2014 तक थे। फिर भी व्यापम निष्पक्ष सरकारी तंत्र के बजाय एक भ्रष्ट तंत्र बन गया। परीक्षार्थियों के फोटो में हेराफेरी करके, उनके स्थान पर पेशेवर लोगों से परीक्षा दिलवाकर अयोग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियां एवं मेडिकल तथा इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले दिए गए। कहते हैं कि मेडिकल कॉलेजों की एक सीट एक करोड़ तक में बेची गई।
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उत्तर प्रदेश पुलिस में 2013 में 62,390 कांस्टेबल पद के लिए भर्ती की प्रक्रिया प्रदेश के स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड ने शुरू की। लिखित परीक्षा में सफलता के लिए कट ऑफ अंक निर्धारित किए गए, पर निर्धारित अंकों से नीचे रहे उम्मीदवारों का चयन हो गया, जबकि इससे कहीं ऊपर अंक प्राप्त करने वालों को विफलता का मुंह देखना पड़ा। मुख्यमंत्री के गृह जनपद मैनपुरी तथा इटावा के 32,000 लोग कट ऑफ से नीचे रहने के बावजूद पुलिस में नौकरी पा गए। राज्य में 14 नवंबर, 2014 को पुलिस सब-इंस्पेक्टर की भर्ती के लिए परीक्षा हुई। उस परीक्षा की ओएमआर सीट में भी धांधली की गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जनहित याचिका की सुनवाई के समय मांगे गए साक्ष्यों में इन बातों का खुलासा हुआ, जिस पर न्यायालय ने भर्तियों पर रोक लगा दी है।
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बिहार में 2006 से 2011 के बीच कक्षा छह से 12 तक के लिए शिक्षकों की भर्ती राज्य सरकार ने केवल सर्टीफिकेट देखकर की। भर्ती के दौरान आवेदकों ने जाली सर्टीफिकेटों के आधार पर नियुक्तियां पाईं। बिहार सरकार को कुल 42,000 शिकायतें जाली सर्टीफिकेटों के बारे में मिलीं। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पटना उच्च न्यायालय ने कहा कि फर्जी सर्टीफिकेट रखने वाले जो शिक्षक आठ जुलाई तक स्वयं त्यागपत्र दे देंगे, उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस पर फर्जी सर्टीफिकेट रखने वाले 15,000 शिक्षकों ने त्यागपत्र दे दिए।


उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार की आबादी देश की कुल जनसंख्या का करीब 50 प्रतिशत है। यानी आधी आबादी को प्रदेश सरकारों के तंत्रों ने संगठित तरीके से समानता के अधिकार से वंचित कर दिया। नौकरियों के इतने बड़े घोटाले राजद्रोह हैं, क्योंकि कानून के अनुसार जो भी कृत्य लोकतंत्र की शक्ति, विश्वास एवं तंत्र को नुकसान पहुंचाए, वह राजद्रोह की श्रेणी में आता है। तीनों राज्यों की सरकारों को चाहिए कि वे शीघ्र ही इनकी जांच पूरी कराकर इसमें लिप्त आरोपियों पर राजद्रोह की भी धारा लगाएं।

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