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ट्रंप-जिनपिंग अमेरिका और चीन को ले डूबेंगे : विवाद आसानी से हल होने वाला है, तो शायद आप गलत हैं

थॉमस एल फ्रीडमैन Updated Thu, 08 Aug 2019 12:06 AM IST
ट्रंप और शी जिनपिंग
ट्रंप और शी जिनपिंग - फोटो : a
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यदि आप सोचते हैं कि अमेरिका-चीन व्यापार विवाद आसानी से हल होने वाला है, तो शायद आप गलत हैं। आप जितना सोच सकते हैं, यह उससे भी ज्यादा गंभीर और खतरनाक है। अगर राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग को शीघ्र इसे खत्म करने का उपाय नहीं सूझा, तो हम बताते हैं कि हम कहां जा रहे हैं-इससे वैश्वीकरण की व्यवस्था भंग होगी, जिसने पिछले सत्तर वर्षों में इतिहास के किसी भी कालखंड की तुलना में दुनिया को पहले से ज्यादा शांत और समृद्ध बनाया है।
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और इसकी जगह पर हम एक डिजिटल बर्लिन की दीवार तथा दो इंटरनेट, दो प्रौद्योगिकी की दुनिया पैदा करने वाले हैं, जिनमें से एक पर चीन का वर्चस्व होगा और दूसरे पर अमेरिका का। यह बहुत ज्यादा अस्थिर और कम समृद्ध दुनिया होगी। ट्रंप और शी को सब कुछ छोड़कर बातचीत के लिए बैठना चाहिए, इससे पहले कि यह लोकलुभावन और राष्ट्रवाद के ईंधन से चालित एवं दोनों देशों में सोशल मीडिया द्वारा प्रवर्धित द्रुत ट्रेन बन जाए।

दरअसल दो चीजें बदल गई हैं-अमेरिका और चीन के व्यापार का चरित्र बदल गया, यह 'गहरा' हो गया और दोनों नेताओं ने खुद को ज्यादा मजबूत समझने की गलती करके एक-दूसरे को बाहर कर दिया। 'व्यापार के गहराने' का क्या मतलब है? पहले तीन दशकों तक अमेरिका चीन से टीशर्ट, टेनिस के जूते और खिलौने खरीदता था और चीन सोयाबीन तथा बोईंग जेटलाइनर अमेरिका से खरीदता था। और जब तक ऐसा चल रहा था, अमेरिका को इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि चीन की सरकार साम्यवादी, पूंजीवादी, अधिनायकवादी, उदारवादी या शाकाहारी है।

पिछले एक दशक में चीन मध्य आय वाला देश और अपनी प्रौद्योगिकी वाला महाशक्ति बन गया है। उसने मेड इन चाइना 2025 नामक एक योजना बनाई है। शी की योजना है कि वह टीशर्ट, टेनिस के जूते और खिलौने बेचना छोड़कर वही उच्च तकनीक वाले उपकरण बनाए और बेचे, जो अमेरिका और यूरोप बेचते हैं-स्मार्ट फोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम, 5 जी इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक कार और रोबोट।
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