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पाकिस्तान पर भरोसा कैसे करें: हाइब्रिड मॉडल में चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बाध्य हो पड़ोसी, आईसीसी कड़ा रुख अपनाए
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पाकिस्तान क्रिकेट
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अमर उजाला
विस्तार
यह महज संयोग है कि चैंपियंस ट्रॉफी का उद्घाटन उसी दिन होगा, जिस दिन 26 साल पहले वाजपेयी ने लाहौर की बस यात्रा की थी। पाकिस्तान ने जुलाई, 1999 में कारगिल युद्ध के रूप में भारत को बड़ा झटका दिया था और फिर उसी साल दिसंबर में दिल्ली-काठमांडो इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी 814 का अपहरण कर लिया गया था।विश्वासघात की यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 मई, 2014 को अपने शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया, बदले में पाकिस्तान ने दो जनवरी, 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हमला करके भारत के शांति प्रयासों को विफल कर दिया। हालांकि एक उम्मीद है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड हाइब्रिड मॉडल (पाकिस्तान और पाकिस्तान से बाहर मैच कराकर) अपना सकता है, जो चैंपियंस ट्रॉफी को बचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे भारत की आपत्ति दूर हो सकती है और तटस्थ स्थानों पर दोनों देशों के मैच हो सकते हैं।
पर्दे के पीछे पाकिस्तान की चाल
पर्दे के पीछे शीर्ष क्रिकेट प्रशासक पीसीबी पर हाइब्रिड मॉडल अपनाने के लिए दबाव बना भी रहे हैं। खबरें बताती हैं कि पाकिस्तान को इस बात का एहसास है कि मैच में भारत की भागीदारी से उसे भारी कमाई होगी। इसने निकट भविष्य में चैंपियंस ट्रॉफी के लिए नए कार्यक्रम घोषित करने के बारे में चर्चा को बढ़ावा दिया है। हालांकि, भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के मद्देनजर टूर्नामेंट का बहिष्कार करने के रुख पर अड़ा हुआ है। राष्ट्र पहले, फिर क्रिकेट के प्रति अटूट प्रतिबद्धता भारत के खेल संबंधी गतिविधियों पर संप्रभुता और सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले रुख को दर्शाती है। यदि हाइब्रिड मॉडल पर सहमति बन जाती है, तो प्रमुख टीमों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकती है।
क्रिकेट जगत की उम्मीद
क्रिकेट जगत उम्मीद करता है कि दोनों पक्षों के लिए बेहतर नतीजा निकले, जिससे चैंपियंस ट्रॉफी की अखंडता और रोमांच बरकरार रहे। इस पृष्ठभूमि के विपरीत, पाकिस्तान ने हाल ही में एक बार फिर अपनी कपटपूर्ण कूटनीति और शरारती योजना का प्रदर्शन किया है, जिसके तहत भारत सहित आठ प्रतिभागी देशों के शहरों में ट्रॉफी ले जाने की योजना इस तरह से बनाई गई, जिनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के हिस्से भी शामिल थे। हालांकि आईसीसी ने जल्द ही विवादास्पद दौरे को रद्द कर दिया, लेकिन पाकिस्तान को सुनियोजित साजिश में लिप्त होने के दोष से मुक्त नहीं किया जा सकता।
शहबाज शरीफ की झूठी घोषणा
शहबाज शरीफ सरकार ने झूठी घोषणा की कि भारतीय क्रिकेट टीम भी भाग लेगी, जिससे उसे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह प्रचारित करने में मदद मिलेगी कि भारत ने पीओके की वैधता स्वीकार कर ली है। लेकिन भारत को उसके नापाक मंसूबे का पता चल गया और उसने ट्रॉफी का बहिष्कार करने का फैसला किया, जिसके कारण आईसीसी को कार्यक्रम बदलने पर मजबूर होना पड़ा। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा पाकिस्तानी विश्वासघात का विश्लेषण करने से पता चलता है कि पीओके में ट्रॉफी घुमाने की योजना के पीछे भी सेना का ही हाथ था, क्योंकि पाकिस्तानी सरकारें सैन्य जनरलों की कठपुतली रही हैं, जो कभी नहीं चाहते कि भारत के साथ संबंध सामान्य हों, क्योंकि उनकी प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी और कथित ‘निर्वाचित सरकारों’ को नियंत्रित करने का उनका अधिकार समाप्त हो जाएगा। ऐसे में, भारतीय क्रिकेट टीम की सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि सेना आतंकवादियों की फंडिंग करती है और अफगानिस्तान प्रायोजित आतंकी गुट सेना और सरकार के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
वर्ष 2009 में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर आतंकी हमले हुए ही थे, जिसमें छह खिलाड़ी घायल हो गए थे। हर तरह से पाकिस्तान आतंकवाद को वित्तपोषित एवं प्रायोजित करने वाला देश है, जिस पर भारतीय क्रिकेट टीम की सुरक्षा के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता। विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस पूरे विवाद का तर्कसंगत समाधान दिया है कि दुबई में हाइब्रिड मॉडल के तहत मैच कराया जाए, जो सभी बुनियादी ढांचे से लैस है और दुनिया की किसी भी टीम को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। टूर्नामेंट को पुनर्निर्धारित करते समय, भारत से संबंधित मैच और नॉकआउट गेम दुबई में खेले जा सकते हैं और बाकी सात टीमें पाकिस्तान में खेल सकती हैं। अगर पाकिस्तान को सद्बुद्धि आती है, तो वह हाइब्रिड आयोजन पर सहमत होकर चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन का श्रेय ले सकता है। लेकिन पाकिस्तान ने धमकी दी है कि अगर आयोजन स्थल बदले गए, तो वह ट्रॉफी का बहिष्कार करेगा। इस मामले में, आईसीसी पर भारत के शक्तिशाली प्रभाव होने का पाकिस्तान का आरोप वास्तविकता से मेल नहीं खाता है, क्योंकि इसका नेतृत्व एक विकसित देश न्यूजीलैंड के ग्रेग बार्कले कर रहे हैं, जिन्हें शायद ही प्रभावित किया जा सकता है।
श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के अन्य सदस्यों के अलावा इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया आदि जैसे अन्य विकसित देश उसके सदस्य हैं, जिन्हें भारत द्वारा निर्देशित नहीं किया जा सकता है। हालांकि, पाकिस्तान का मानना है कि भारत का बीसीसीआई अपने विशाल वित्तीय समर्थन के कारण अप्रत्यक्ष रूप से आईसीसी को नियंत्रित करता है, इसलिए जय शाह को आईसीसी का नया अध्यक्ष चुना गया है, जो बार्कले से एक दिसंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। शाह ने चैंपियंस ट्रॉफी दौरे के लिए शहरों के चयन पर कड़ी आपत्ति जताई है, क्योंकि यह भारत के राष्ट्रीय हित और अखंडता के खिलाफ है। मामला फिलहाल आईसीसी के पास है, जिसे पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए, ताकि वह हाइब्रिड मॉडल स्वीकार करने के लिए बाध्य हो सके, जिससे चैंपियंस ट्रॉफी को पाकिस्तान सरकार और उसके क्रिकेट बोर्ड के अहंकार और अतार्किक रुख के कारण बर्बाद होने से बचाया जा सके।