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बनारस को कैसे संवारेंगे मोदी
स्टेफनी स्ट्रॉम
Updated Sat, 19 Jul 2014 09:34 PM IST
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इस शहर के लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिजली कब तक साथ देगी? इसी वर्ष मई में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से गंगा किनारे बसे इस बेबस शहर के लोगों को तकरीबन निर्बाध बिजली मिल रही है। वरना पहले आठ से दस घंटे तक उन्हें बिजली के बिना रहना पड़ता था। कालीन निर्यातक और कार डीलर एहसान खान कहते हैं, पिछले महीने उन्हें जेनरेटर की खास जरूरत नहीं पड़ी। वह कहते हैं, इससे मेरे जैसे कारोबारी के लिए बड़ी बचत होगी, क्योंकि इससे लागत घटेगी।
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मोदी ने वायदा किया है कि वह वाराणसी की समस्याओं को दूर कर इस पवित्र और गंदगी से अटे पड़े शहर को ऐसा बना देंगे, ताकि यह भारतीय संस्कृति का प्रतीक लगे साथ ही बेहतर आधारभूत संरचना के जरिये यहां के छोटे उद्योगों को संरक्षण मिल सके। निर्बाध बिजली के साथ ही उन्होंने नई सड़कें बनाने का भी वायदा किया है। इससे दस लाख से अधिक की आबादी के इस शहर के उपनगरों की तंग सड़कों पर लगने वाली भीड़ कुछ कम हो सकेगी। उन्होंने इस शहर की अर्थव्यवस्था का आधार माने जाने वाले बुनकर और पर्यटन उद्योगों को भी मदद देने का वायदा किया है।
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अनेक लोग वाराणसी को यह जानने के लिए केस स्टडी की तरह देख रहे हैं कि आखिर मोदी भारत के उन हिस्सों में किस तरह का बदलाव लाते हैं, जहां मुंबई और बंगलुरू जैसी चमक कभी दिखाई ही नहीं दी और जो कि देश में जारी आर्थिक सुस्ती की कुछ अधिक मार झेल रहे हैं। मगर इस शहर को ही देखें तो चुनौतियां काफी बड़ी हैं। वाराणसी की सड़कें या तो टूटी हुई हैं या गड्ढों से अटी पड़ी हैं। भवनों के निर्माण की वजह से जमा मलबे के साथ कचरों के ढेर लगे हुए हैं, जहां कुत्ते और सुअर मुंह मारते दिख जाते हैं।
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कई जगहों पर मानसून की बारिश के बाद नालियों में गंदा पानी बहने लगता है और सड़कों में भी गंदगी फैल जाती है। यहां के सुप्रसिद्ध घाटों में गंदगी है, और यहां खोमचे वालों, साधुओं और ठगों ने अड्डा जमा रखा है। यहां के कारोबारी मजाक करते हैं कि यहां 1970 के दशक में आखिरी बार किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम हुआ था, जब यहां एक उपनगरीय रेलवे स्टेशन और मोटर वर्क्स का निर्माण हुआ था।
वाराणसी के मेयर रामगोपाल मोहले के सहयोगी राज कुमार अग्रवाल कहते हैं, यहां के लोगों में हताशा बढ़ रही थी, लेकिन इस शहर से प्रधानमंत्री के चुने जाने के बाद से चीजें बदल रही हैं। लंबे समय के बाद यहां के लोग उत्साहित हैं। हालांकि वाराणसी में बिजली की आपूर्ति और रेलवे स्टेशनों की सफाई जैसी मोदी की शुरुआती पहल कॉस्मेटिक किस्म की है। रेल मंत्री ने वाराणसी के मुख्य स्टेशन के कायाकल्प के लिए दो अरब रुपये देने की घोषणा की है।
मोदी द्वारा लाए जाने वाले पुनर्जागरण की अटकलों के चलते खासतौर से हवाई अड्डे के आसपास जमीन की कीमतें बढ़ गई हैं। खान बताते हैं, 'मोदी के चुनाव जीतने से पहले मैंने शहर से 12 किमी दूर साढ़े पांच लाख में जमीन खरीदने के लिए बात की थी। फिर मुझे दिल्ली जाना पड़ गया और जब मैं लौटा तब तक मोदी चुनाव जीत चुके थे। जमीन के मालिक ने दाम बढ़ाकर 6.2 लाख रुपये कर दिए। आखिर में उसने वह जमीन सात लाख रुपये में किसी और को बेच दी।'
मोदी सरकार के बजट में गंगा की सफाई के लिए 20.4 अरब रुपये का प्रस्ताव किया गया है, जिससे वाराणसी को मदद मिलेगी। इसके अलावा ऐतिहासिक घाटों के लिए एक अरब, शिल्पकारी उद्योग के लिए दो अरब और हिंदुओं और बौद्धों के पवित्र शहर सारनाथ, वाराणसी और गया के टूरिस्ट सर्किल के लिए पांच अरब रुपये के प्रावधान किए गए हैं। और इस सबसे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खबर यह है कि मोदी अपने कार्यालय की एक शाखा यहां खोलेंगे।
इस शहर में चार विश्वविद्यालय हैं। इनमें एशिया का सबसे बड़ा आवासीय शिक्षण संस्थान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भी शामिल है। हिंदुओं और बौद्धों दोनों के लिए ही इस शहर का बड़ा महत्व है। कहते हैं कि वाराणसी में जिसकी मृत्यु होती है उसे मोक्ष मिलता है। बुद्ध ने जहां अपना पहला प्रवचन दिया था, वह जगह भी यहां से नजदीक ही है।
वाराणसी में हर वर्ष तीस लाख से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं। शहर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान दूसरे नंबर पर है। बुनकर उद्योग, कांसे और पीतल के बर्तनों और दूसरे सामानों का निर्माण तथा पान उद्योग यहां की आर्थिक गतिविधियों में कहीं अधिक योगदान करते हैं। वर्ष 2006 की एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक पर्यटन स्थलों की बदइंतजामी और आधारभूत संरचना की कमियां पर्यटन उद्योग के लिए बाधक हैं।
शहर के मेयर मोहले बताते हैं कि उन्होंने सीवेज पाइप बिछाने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि इन नालियों में बहने वाले गंदे पानी के ट्रीटमेंट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। शहर में रोजाना 35 करोड़ लीटर गंदा पानी निकलता है, जिसमें से सिर्फ एक तिहाई का ही ट्रीटमेंट हो पाता है। शहर में एक नया कचड़ा प्रबंधन संयंत्र बनाने की योजना एक दशक से ठंडे बस्ते में पड़ी है, क्योंकि राज्य सरकार इसके लिए कोई जगह नहीं तलाश पाई है। मोहले कहते हैं कि केंद्र सरकार अपनी मर्जी से घोषणाएं तो कर सकती है, लेकिन यदि राज्य सरकार उन पर अमल से इनकार कर दे तो कुछ नहीं हो सकता।
वैसे प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह वाराणसी को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में देखना चाहते हैं। इसी के मद्देनजर उन्होंने घाटों की साफ-सफाई और पर्यटकों को बेहतर नाव सुविधा देने के लिए 18 करोड़ रुपये देने की घोषणा कर चुके हैं।