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शांति की उम्मीद: गाजा में थमा 15 महीने से जारी रक्तपात, संघर्ष विराम पूरी दुनिया के लिए राहत भरी खबर

Mon, 20 Jan 2025 06:08 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 20 Jan 2025 06:08 AM IST
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सार
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की ताजपोशी से ऐन पहले इस्राइल व हमास के बीच, भले दबाव में, युद्धविराम समझौते के क्रियान्वयन की शुरुआत पूरी दुनिया के लिए राहत लेकर आई है। लेकिन स्थायी शांति के लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष खुले दिल से समझौते की शर्तों को स्वीकार करें।
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Hope for peace check on Gaza bloodshed after 15 months Israel Hamas ceasefire relief for whole world
गाजा में युद्धविराम समझौते के बाद लोगों ने ढोल बजाकर और गले लगकर जताई खुशी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंद्रह महीनों तक चले निराशा व विध्वंस के दौर के बाद इस्राइल व हमास के बीच युद्धविराम समझौते की खबरें पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में थीं और अब अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पद की शपथ लेने से ऐन पहले इस्राइल के मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसके क्रियान्वयन की राह भी खुल गई है। 



यह समझौता इसलिए भी स्वागतयोग्य है कि इसके बाद दोनों तरफ से बंधकों व कैदियों की रिहाई संभव होने के साथ गाजा के बुरी तरह से ध्वस्त उस क्षेत्र के लिए मानवीय मदद का मार्ग भी खुल सकेगा, जिसे इस वक्त इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह सहमति तब बनी है, जब सात अक्तूबर, 2023 को हमास द्वारा इस्राइल में मचाए गए कत्ल-ए-आम के बाद शुरू हुआ संघर्ष बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान ले चुका है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि संबंधित पक्ष युद्धविराम को क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए एक अवसर के रूप में लेंगे।


नहीं भूलना चाहिए कि यह पिछले वर्ष मई में बाइडन द्वारा पेश किया गया वही समझौता है, जिसे इस्राइल व हमास दोनों ने ही अस्वीकार कर दिया था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के सीधे हस्तक्षेप के बाद, जिसमें उन्होंने अपनी ताजपोशी के बाद हमास को देख लेने और नेतन्याहू को भी घेरने के संकेत दिए थे, दोनों ही पक्षों पर समझौते को स्वीकारने का स्वाभाविक दबाव समझा जा सकता है।

चिंतित करने वाला सत्य यह है कि यह स्थायी शांति नहीं, बल्कि युद्ध विराम समझौता है। इसका महत्व तभी है, जब दोनों ही पक्ष खुले दिल से समझौते की शर्तों को स्वीकार करें, लेकिन पहले नेतन्याहू मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी में किया गया विलंब और फिर रविवार की सुबह, जबसे संघर्ष विराम लागू होना था, हमास द्वारा बंधकों के नाम बताने में की गई देरी से आगे की जटिलताओं के संकेत ही मिलते हैं।

नेतन्याहू का यह असमंजस, कि कहीं यह समझौता हमास की जीत का संकेत न दे, निरर्थक ही है, क्योंकि हमास खुद, ईरान व हिजबुल्ला के कमजोर पड़ने से, संघर्ष से निकलने का मार्ग ढूंढ रहा है। दोनों के संबंधों की जटिलता को देखते हुए सभी बंधकों की वापसी, फलस्तीनी कैदियों की रिहाई और छह हफ्तों के युद्ध विराम को स्थायी शांति में बदलना, यह सब कुछ आसान नहीं होने वाला और यह काफी हद तक आज अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ले रहे ट्रंप की नीतियों पर भी निर्भर करता है। इसके बावजूद कहना होगा कि यह समझौता शांति व स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पूरी दुनिया के लिए राहत लेकर आया है।

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