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टाइम मशीन : युद्धों का इतिहास और हथियारों की तलाश, अब दुनिया देख रही है जंग का नया चेहरा

Sun, 11 May 2025 06:59 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 11 May 2025 06:59 AM IST
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सार
आदमी के कुल इतिहास का सबसे बड़ा हिस्सा जंगों की कत्ल ओ गारत से भरा है। तीर-कमान कहीं पीछे छूट गए, क्योंकि बारूद मिल गई थी। मगर इसके बाद भी जंगबाजों को ऐसे हथियारों की तलाश थी, जो दूर तक उड़ते हुए जाएं, अपना निशाना तलाशें और उसे तबाह कर दें। क्या जरूरत फौजियों, फाइटर जेट और यहां तक कि महंगी मिसाइल भेजने की।
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History of wars and search for weapons, now world is seeing new face of war
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

रात में सन्नाटा अचानक, हवा में भनभनाहट। सीमा पार एक उड़ता हुआ हथियार किसी ठिकाने को निशाना बनाता है। आग की लपटें उठती हैं और काला बिंदु अंधेरे में गायब हो जाता है। यह युद्ध का नया चेहरा है-न कोई पायलट, न चेतावनी, न सायरन, उड़ती हुई मशीनों का झुंड, सटीक निशाने और टारगेट खत्म। भारत के पाकिस्तान के बीच टकराव में ड्रोन युद्ध का आयाम ही बदल रहे हैं। युद्ध की दुनिया में ड्रोन सबसे सस्ता हथियार है, जो हमास-इस्राइल, रूस-यूक्रेन से लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष में कश्मीर और पंजाब तक फैले हैं।



जंग इन्सानों की आदिम फितरत है। आदमी के कुल इतिहास का सबसे बड़ा हिस्सा जंगों की कत्ल ओ गारत से भरा है। तीर-कमान कहीं पीछे छूट गए, क्योंकि बारूद मिल गई थी। मगर इसके बाद भी जंगबाजों को ऐसे हथियारों की तलाश थी, जो दूर तक उड़ते हुए जाएं, अपना निशाना तलाशें और उसे तबाह कर दें। क्या जरूरत फौजियों, फाइटर जेट और यहां तक कि महंगी मिसाइल भेजने की। आइए, टाइम मशीन में सीट पकड़िए। हम आपको ले जा रहे हैं उस दुनिया में, जहां जंग के माहिरों ने उड़ते हथियार के नक्शे बनाए थे।


टाइम मशीन पेरिस में है। साल है 1907 का। सड़कों पर फौजी घोड़ों की टापें गूंज रही हैं। उधर देखिए, जूलियस न्यूब्रोनर नाम का एक जर्मन दवा विक्रेता, एक कबूतर के गले में छोटा कैमरा बांध रहा है। सैन्य अधिकारी उसके प्रयास पर हंस रहे हैं। पर कबूतर दुनिया की पहली हवाई तस्वीरें ले आया है। फौजी दंग हैं और ऊंचाई से देखने की ताकत मिल गई है, जब जंग के नक्शे भरोसेमंद हो सकते हैं। कबूतरों का प्रयोग दुनिया में होने लगा है। यह 1911 का साल है। भारत में ब्रिटिश सेना ने संदेशवाहक कबूतरों को कैमरे पहन दिए हैं। बिना पायलट की जासूसी शुरू हो चुकी है। टाइम मशीन का अगला पड़ाव दूसरी बड़ी जंग है। अब हम 1944 के ब्रिटेन में हैं। ब्रिटेन ने क्वीन बी बना ली है। यह एक रेडियो-नियंत्रित पायलट रहित उपकरण है, जो विमानभेदी तोपों के निशाने ठीक करने के लिए बनाया गया है। जो बच जाते हैं, उनका दोबरा इस्तेमाल हो सकता है। दरअसल, हिटलर की फौज ने ब्रिटेन पर बज बम या डूडल बग छोड़ दिए हैं। यह 21वीं सदी के क्रूज मिसाइल का पूर्वज है। पंखों वाले पतंगों जैसे पल्सजेट से चलने वाले इन वी वन फ्लाइंग बम को हिटलर की फौज विमानों या रैंप से उड़ा रही है। ब्रिटेन में बड़ा खौफ है। जायरो कंपास वाले इन बम पतंगों में पल्सजेट इंजन लगा है। मित्र देशों की फौज खौफ में है। जर्मनी का यह नया हथियार बहुत आगे निकल गया है। जर्मनी ने वी टू , वी 3 रॉकेट और फ्रिट्ज एक्स बम हमले के लिए तैनात कर दी हैं, जिनके निशाने सटीक हैं। जर्मनी की इस ताकत से अमेरिका का पहला परिचय सितंबर, 1943 में सालेरनो इटली में जंग के दौरान हुआ है। मजबूत हुए अमेरिका ने  ऑपरेशन एफ्रोडाइट शुरू किया है। बी-24 बॉम्बर को विस्फोटकों से भरकर रिमोट से जर्मन बंकरों पर भेजा जा रहा है। ब्रिटेन में इसके सभी शुरुआती परीक्षण नाकाम रहे हैं। हिटलर की जंगी तकनीक अमेरिका पर भारी है। असफलता के बावजूद अमेरिकी सेना ने जर्मनी वी 3 रॉकेट लॉन्चर को ध्वस्त करने के लिए फिर इन्हीं विमानों को भेजा है। अभियान असफल हुआ है, केनेडी जूनियर (रॉबर्ट केनेडी जूनियर के चाचा) मारे गए हैं। तकनीक अभी कच्ची है, मगर हम आगे बढ़ते हैं।

टाइम मशीन अब वियतनाम के जंगल में है। यह साल है 1960 का। अमेरिका अब मजबूत है, चमकदार और लाल रायन फायरबी ड्रोन, जेट से लॉन्च होकर दुश्मन के ठिकानों की तस्वीरें लेता है। अमेरिका ने इन्हें लाइटनिंग बग्स का नाम दिया है, ये ड्रोननुमा उड़ते कैमरे वियतनाम युद्ध में सीआईए और अमेरिकी वायुसेना के सबसे कामयाब जासूस बन गए हैं। वियतनाम ने ड्रोन को जरूरी सैन्य तकनीक बना दिया है, मगर हत्यारे ड्रोन से मिलने के लिए हमें 2001 की तरफ बढ़ना होगा। टाइम मशीन अब अमेरिका में नेवादा के रेगिस्तान में है। यहां एक गुप्त केंद्र के भीतर का नजारा देखिए। अमेरिकी सेना का ऑपरेटर एक जॉयस्टिक हिलाता है और अफगानिस्तान में हजारों मील दूर एक कार फट जाती है। यह सीआईए प्रीडेटर ड्रोन है। इतिहास बन गया है। यह टारगेटेट ड्रोन हमला है, जिसमें एक तालिबान नेता मारा गया।

टाइम मशीन आपको बात रही है कि 2021 में, इसी प्रीडेटर से अल-कायदा के सरगना अयमान अल-जवाहिरी को काबुल में ढेर किया जाएगा। जॉर्ज बुश की युद्ध रणनीति इन्हें स्थापित करेगी। यमन, पाकिस्तान और सोमालिया में ड्रोन मौत का पर्याय बन जाएंगे।

अब टाइम मशीन मास्को में है। यह 2023 का साल है। यूक्रेन और रूस की जंग चरम पर है। मई की तीसरी तारीख है। दुनिया तस्वीरें देखकर चौंक उठी है। क्रेमलिन पर यूक्रेन ने ड्रोन हमला बोल दिया है। इससे पहले रूस के क्रैसनोडार में ड्रोन ने एक तेल डिपो उड़ा दिया है। रूस का सुरक्षा सिस्टम सदमे में है। यूक्रेन के ड्रोन उद्योग की चर्चा पूरी दुनिया में है। टाइम मशीन बता रही है कि 2024 तक यूक्रेन में ड्रोन का उत्पादन 22 लाख यूनिट तक पहुंच जाएगा, जो रूस से ज्यादा है। यूक्रेन 2026 तक 45 लाख ड्रोन सालना बनाएगा। ड्रोन अब सुपरपावर तक सीमित नहीं है। हमास सस्ते क्वाडकॉप्टर को हथियार बना रहा है। आइसिस खिलौना ड्रोन से बम गिराता है।

टाइम मशीन एलओसी के ऊपर से गुजर रही है। यहां भारत और पाकिस्तान में ड्रोन युद्ध जारी है। अब युद्ध विराम की खबर है। जंग इस्राइल और चीन के ड्रोन के बीच है। भारत इस्राइल के हारोप, हेरॅान, सर्चर, स्काईस्ट्राइकर और अमेरिका के कुख्यात प्रिडेटर एक्सपी से लैस है। पाकिस्तान ने चीनी सीएच-4 और विंग लूंग II ड्रोन का इस्तेमाल किया है। उसके पास तुर्किये का अंका और देश में बना बुर्राक ड्रोन है। जंग की सूरत बदल गई है। टारगेट को तलाशकर झुंड में झपट पड़ने वाले सस्ते ड्रोन सबसे ताकतवर हथियार हैं। ड्रोन 21वीं सदी का एके-47 बन चुका है, लेकिन जब मशीनें फैसले लेंगी, तब जवाबदेही किसकी होगी? आज का सफर यहीं तक, फिर मिलेंगे अलगे सफर पर...

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