फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Hindenburg Report Share Market Short Selling 400 year old practice and connection with india

टाइम मशीन: शेयर बाजार और हिंडनबर्ग का प्रेत... शॉर्ट सेलिंग से कमाई अपराध नहीं, भारत से 400 साल पुराना रिश्ता

Sun, 07 Jul 2024 04:28 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 07 Jul 2024 04:28 AM IST
विज्ञापन
सार
लोगों को लगता है कि शेयर बाजार में शॉर्ट सेलिंग यानी किसी शेयर की गिरावट पर दांव लगाकर कमाना कोई पाप या अपराध है। मगर शेयरों की जालिम दुनिया में यह काम वैध है और 400 साल से जारी है। कभी-कभी तो शॉर्ट सेलरों ने वह काम किया है, जो शेयर बाजार के नियामकों और बैंकों को करना चाहिए था।

शॉर्ट सेलिंग के गुरु चानोस ने एनरॉन पर भारी शॉर्ट सेलिंग करते हुए, कंपनी के ‘क्रिएटिव अकाउंटिंग’ की कलई खोल दी। दुनिया का सबसे बड़ा अकाउंटिंग फ्रॉड सामने आ गया। ऊर्जा कंपनी एनरॉन, जो वॉल स्ट्रीट की डार्लिंग कही जाती थी, ने कर्ज छिपाया और खातों में बड़ा घपला किया।
loader
Hindenburg Report Share Market Short Selling 400 year old practice and connection with india
शेयर बाजार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंडनबर्ग रिसर्च का प्रेत भारतीय शेयर बाजार की पीठ पर सवार है। बीते साल इस रिपोर्ट ने अदाणी समूह की चूलें हिला दी थीं, समूह के शेयर-सितारे जमीन पर आ गए। हिंडनबर्ग, जो एक शॉर्ट सेलर है, पर आरोप लगा कि वह अदाणी की साख को धक्का पहुंचाने वाली रिपोर्ट इसलिए लाई, क्योंकि वह स्टॉक में जोरदार गिरावट पर दांव लगा रही है। सेबी ने भी हिंडनबर्ग को नोटिस भेजा। हिंडनबर्ग ने खुलकर बता दिया कि उसने अदाणी के शेयरों में गिरावट पर दांव लगाकर कमाया। उसने अदाणी समूह के कारोबार में कई खामियां पाईं। उसका आरोप था कि शेयरों की कीमत जबरन बढ़ाई गई, इसलिए इनका टूटना तय था। लोगों को लगता है कि शॉर्ट सेलिंग यानी किसी शेयर की गिरावट पर दांव लगाकर कमाना पाप या अपराध है। मगर शेयरों की जालिम दुनिया में यह वैध है और 400 साल से जारी है।



आइए, विराजिए टाइम मशीन में...हम आपको ले चलते हैं 400 साल पहले, जहां आपको पता चलेगा कि शॉर्ट सेलिंग के सबसे पुराने किस्से का भारत से करीबी रिश्ता है। कुर्सी की पेटी बांधिए...हम उड़ चले हैं सन 1600 की तरफ और उतरेंगे हॉलैंड में। 17वीं सदी के एम्सटर्डम में आपका स्वागत है। यह इमारत जो आपके सामने है, यह दुनिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज है, यहां वीओसी कंपनी के चर्चे हैं। यह डच ईस्ट इंडिया कंपनी की है, जिसे भारत से मसालों के कारोबार के लिए बनाया गया है। जिस डच ईस्ट इंडिया कंपनी से आप मुखातिब हैं, दुनिया का पहला शेयर बाजार इसी के लिए बना है। डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्धा शुरू कर दी है। खैर,17वीं सदी के एम्सटर्डम में हम एक अनोखी शख्सियत से मिलने वाले हैं। इस चहल-पहल भरे शहर में आपको इसाक ला मियरे का नाम बताने वाले बहुतेरे मिल जाएंगे, क्योंकि उन्होंने हॉलैंड की कारोबारी हवा में तूफान उठा दिया है। ला मियरे बेल्जियम के रहने वाले हैं। कुछ बरस पहले एम्सटर्डम में बस गए थे। 1602 में जब डच ईस्ट इंडिया कंपनी बनी, तो वह उसके संस्थापकों यानी वीओसी के सबसे शुरुआती शेयरधारकों में शामिल थे। 1605 तक वह कंपनी के बोर्ड में भी रहे। इसके बाद वीओसी में खुला एक अकाउंटिंग फ्रॉड, जिसके चलते ला मियरे को इस्तीफा देना पड़ा। यह 1607 का साल है और ला मियरे को लेकर खबरों का बाजार तप रहा है। वीओसी में फ्रॉड की झंझट के बाद ला मियरे पर पाबंदी लगाई गई कि वह यूरोप से एशिया जहाज भेजने वाली किसी डच कंपनी के साथ कोई कारोबारी रिश्ता नहीं रखेंगे। मियरे अब एम्सटर्डम लौट आए हैं और उन्होंने गदर मचा दी है। मियरे वीओसी के व्हिसलब्लोअर या एक्टिविस्ट निवेशक बन गए थे। उन्होंने वीओसी में वित्तीय अपारदर्शिता को लेकर चेयरमैन को चिट्ठी लिखी है, जिसके बाद वीओसी के प्रबंधन और शेयरधारकों में तहलका मच गया। मियरे का आरोप था कि वीओसी ने बड़ा कर्ज लिया है, जिससे शेयरधारकों को नुकसान होगा।


मियरे ने यह भी लिखा है कि कंपनी के खातों में सही जानकारी नहीं दी जाती। कंपनी के मालिक शेयरधारकों को सच्चाई नहीं बता रहे हैं। कुछ याद आया आपको, भारतीय कंपनियों पर भी ऐसे ही आरोप लगते हैं। कुछ-कुछ हिंडनबर्ग की रिपोर्ट जैसी मालूम होती है मियरे की यह चिट्ठी। वीओसी के निदेशकों में उथल-पुथल मच गई। बोर्ड का हंगामा सड़क पर आ गया है। चेयरमैन जॉन वैन ओल्डेनबर्नवेल्ट ने निवेशकों और ला मियरे की शिकायतों को नकार दिया है। एम्सटर्डम के स्टॉक एक्सचेंज में भारत से कारोबार करने वाली डच ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयरों में गिरावट पर भारी दांव लगाए गए। यानी जबर्दस्त शॉर्ट सेलिंग। ला मियरे और वीओसी के कुछ निवेशकों ने एक ग्रूट कंपनी बनाई है। यह एक तरह का इन्वेस्टर सिंडिकेट है, इसने वीओसी को भारी घाटे की आशंका देखकर शेयरों की भारी बिकवाली की है। 1607 से 1609 के बीच वीओसी के शेयरों की कीमत करीब 50 फीसदी टूट गई। वीओसी कंपनी ने हॉलैंड की सरकार से शिकायत की है। और यह लीजिए, सरकार ने ला मियरे और मंदड़ियों के कार्टेल पर कार्रवाई कर दी। शॉर्ट सेलिंग पर रोक लगा दी गई है। टाइम मशीन में बैठते हुए सामने स्क्रीन पर नजर जमाइए। वहां सूचना आई है कि ला मियरे एम्सटर्डम छोड़कर भाग गए हैं। अब हम चलते हैं ईस्ट इंडिया कंपनी के मुल्क यानी ब्रिटेन, जहां हॉलैंड जैसा ही कुछ हो रहा है। शॉर्ट सेलर्स यानी मंदड़ियों ने एक कंपनी को धर लिया है। यह 1733 का ब्रिटेन है। मामला साउथ सी कंपनी का है। इस कंपनी को लैटिन अमेरिका में गुलामों के कारोबार का एकाधिकार मिला था। इसके बदले साउथ सी ने सरकार का पूरा कर्ज खरीद लिया था। अब पता चला है कि कंपनी ने नकली तौर पर अपने शेयरों की कीमत बढ़ाई है। साउथ सी कंपनी डूबने वाली है, तो शेयरों में धुआंधार शॉर्ट सेलिंग चल रही है। अपने महान वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन को भी भारी नुकसान हुआ है। बाजार इस कदर गिरा कि ब्रिटेन में 1733 में शॉर्ट सेलिंग पर पाबंदी लगा दी गई।

वापसी के सफर में अब हमारी टाइम मशीन 21वीं सदी में आ गई है। आइए, अमेरिका होते हुए चलते हैं, शॉर्ट सेलिंग के आधुनिक गुरु से मिले बिना यह तीर्थयात्रा पूरी नहीं होगी। अमेरिका में 1938 के बाद शॉर्ट सेलिंग की छूट मिली। अलबत्ता मंदडि़यों को मनमानी की छूट नहीं है। यह 2001 है और हम ह्यूस्टन (टेक्सास) में एनरॉन के मुख्यालय पर पहुंच रहे हैं। येल यूनिवर्सिटी के छात्र जिम चानोस ने साइनिक एसोसिएट्स नामक एक हेज फंड बनाया है। चानोस को डूबने वाली कंपनियां पहचानने में महारत हासिल है। वह शॉर्ट सेलिंग का गुरु है। चानोस ने खूब कमाई की और बहुत-सी कंपनियों का सच उघाड़ दिया। इस बार एनरॉन निशाने पर है। हम 2001 में ठीक उस मौके पर हैं, जब जिम चानोस ने एनरॉन पर निशाना लगाया और इतिहास की सबसे बड़ी शॉर्ट सेलिंग की। चानोस को पता चला कि एनरॉन के खातों में कुछ बड़ा खेल हुआ है। कंपनी अपना नुकसान छिपा रही है। एनरॉन ने बाजार नियामक से अकाउंटिंग के नियम बदलने की मांग की थी। नवंबर, 2000 में एनरॉन के सीईओ जेफ स्किलिंग ने इस्तीफा दे दिया था, चानोस की टीम तब कंपनी के खातों में हेर-फेर का पूरा माजरा समझ चुकी थी। चानोस ने एनरॉन पर भारी शॉर्ट सेलिंग करते हुए, कंपनी के ‘क्रिएटिव अकाउंटिंग’ की कलई खोल दी। दुनिया का सबसे बड़ा अकाउंटिंग फ्रॉड सामने आ गया। जब तक आप टाइम मशीन में मुंबई की तरफ बढ़ेंगे, तब तक आपको पता चलेगा कि इस फ्रॉड ने अमेरिका को कानून बदलने पर बाध्य किया। आज का सफर मुंबई में खत्म हो रहा है, जहां सेबी और शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग आमने-सामने हैं। टाइम मशीन से निकलते हुए आप यही सोच रहे हैं कि ला मियरे, जिम चानोस से आज हिंडनबर्ग तक शॉर्ट सेलर नामुराद मंदड़िये हैं या क्रांतिकारी, जिनकी वजह से कंपनियों में घोटालों, धतकरमों का खुलासा होता है? फिर मिलते हैं अगले सफर पर...

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed