{"_id":"6ac97f73586daa025f04c2e7","slug":"h1b-visa-row-us-protectionism-cause-of-concern-for-indian-it-industry-solution-not-in-escalating-confrontation-2026-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिकी संरक्षणवाद: भारतीय आईटी उद्योग के लिए चिंता का विषय, समाधान टकराव बढ़ाने में नहीं","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
अमेरिकी संरक्षणवाद: भारतीय आईटी उद्योग के लिए चिंता का विषय, समाधान टकराव बढ़ाने में नहीं
Sat, 10 Oct 2026 05:27 AM IST
न्यूज डेस्क
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: न्यूज डेस्क
Updated Sat, 10 Oct 2026 05:27 AM IST
विज्ञापन
अमेरिकी वीजा पर और सख्ती की आशंका
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
ऐसे वक्त में, जब भारत व अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता एक तरह से अटक गई है, तब ट्रंप प्रशासन द्वारा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और केपजेमिनी जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों के साथ भारत की कुछ बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित किया जाना भारतीय आईटी उद्योग के लिए चिंता का विषय होने के साथ ही अमेरिकी आव्रजन नीति में बढ़ते संरक्षणवादी रुझान को भी दर्शाता है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि यह प्रोग्राम एच-1बी वीजा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास, यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में सहायक है, जिसके तहत नियोक्ता को यह पुष्टि करनी होती है कि अमुक कार्य के लिए अमेरिका में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। हर वर्ष स्वीकृत होने वाले एच-1बी वीजा में भारतीयों की करीब 70 फीसदी की भागीदारी होती है। हालांकि, इस निलंबन से किसी कर्मचारी का एच-1बी वीजा स्वत: रद्द नहीं होगा, लेकिन यह ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
विज्ञापन
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि सस्ते श्रम की चाह में विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने से अमेरिकी युवाओं में बेरोजगारी का प्रतिशत बढ़ रहा है। किसी भी सरकार के लिए अपने नागरिकों के रोजगार की रक्षा करना स्वाभाविक जिम्मेदारी है। लेकिन, यह भी ध्यान में रखना होगा कि कई क्षेत्रों में विशिष्ट कौशल वाले कर्मचारियों की मांग इतनी अधिक होती है कि कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं की तलाश करनी पड़ती है।
विज्ञापन
यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनियाभर के सबसे होनहार लोगों को अपनी ओर खींचने की काबिलियत की वजह से ही अमेरिका दशकों से तकनीक के क्षेत्र में खुद को वैश्विक अगुआ के तौर पर स्थापित किए हुए है। भारत ने उचित ही इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका की तरफ से की गई टिप्पणियां अनुचित हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय पेशेवरों के योगदान को नजरअंदाज करती हैं। जाहिर है, केवल विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता को अमेरिकी रोजगार संकट की वजह के रूप में देखना इस जटिल मुद्दे का एकपक्षीय आकलन होगा।
अमेरिका भारतीय आईटी उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है। भारतीय कंपनियों ने वहां वर्षों से जो कारोबारी विश्वसनीयता और तकनीकी विशेषज्ञता अर्जित की है, वह दोनों देशों के आर्थिक सहयोग की अहम पूंजी है। व्यापार वार्ता में पहले से मौजूद मतभेदों के बीच यह मुद्दा द्विपक्षीय रिश्तों को और जटिल बना सकता है। हालांकि, इसका समाधान टकराव बढ़ाने में नहीं, बल्कि दोनों देशों के परस्पर आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर रास्ता निकालने में है।